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Haryana

प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करेगा हरियाणा – संजीव कौशल

November 24, 2022 01:56 PM
हरियाणा के मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक किसानों को इस ओर प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार भरसक प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। इन्हीं योजनाओं का परिणाम है कि अब किसान रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर जा रहे हैं। 
 
मुख्य सचिव आज यहां प्राकृतिक खेती पर समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समय-समय पर प्राकृतिक खेती के सकारात्मक परिणामों के बारे में जानकारियां मिलती रही हैं, लेकिन अभी तक कहीं भी प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर उपलब्ध नहीं हैं। हरियाणा को इस दिशा में कदम बढ़ाने होंगे और प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करने होंगे, जिसमें इस पद्धति की पूरी प्रक्रिया, समयावधि और परिणामों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो। इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और रिसर्च निदेशक से बातचीत कर जल्द से जल्द इस कार्य को अमलीजामा पहनाया जाए। 
 
*प्राकृतिक खेती के लिए वर्तमान में चल रहे 2 प्रशिक्षण केंद्र, जल्द ही 3 और किये जाएंगे स्थापित*
 
श्री संजीव कौशल ने कहा कि प्राकृतिक खेती धीरे-धीरे समय की जरूरत बनती जा रही है। इस पद्धति से कम कृषि आदान व कम लागत के साथ किसान जैविक पैदावार बढ़ा सकता है और अपनी आय में भी वृद्धि कर सकता है। प्राकृतिक खेती का उद्देश्य रसायन मुक्त कृषि, प्रकृति के अनुरूप जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना और पर्यावरण एवं जलवायु प्रदूषण में कमी लाते हुए इस पद्धति को स्थाई आजीविका के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा किसानों को जागरूक और प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 2 प्रशिक्षण केंद्रों गुरुकुल, कुरुक्षेत्र और घरौंडा, करनाल में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, जल्द ही तीन स्थानों चौधरी चरण सिंंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हमेटी, जींद तथा मंगियाणा, सिरसा में 3 और प्रशिक्षण केंद्र स्था‌पित किये जाएंगे। 
 
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का मूल उद्देश्य खान-पान को बदलना है, इसके लिए खाद्यान ही औषधि की धारणा को अपनाना होगा। प्राकृतिक खेती ही इसका एकमात्र रास्ता है। किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए हर खंड में एक प्रदर्शनी खेत में प्राकृतिक खेती करवाई जाएगी। अब तक 5 जिलों में इस प्रकार के प्रदर्शनी खेत तैयार किये जा चुके हैं। 
 
*प्राकृतिक खेती के लिए प्रथम चरण में प्रशिक्षण और जागरूकता पर दिया जा रहा जोर*
 
बैठक में बताया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल, 2022 में राज्य सरकार ने पोर्टल लॉन्च किया था, जिस पर प्राकृतिक खेती अपनाने के इच्छुक किसान अपना पंजीकरण करवा सकें। प्राकृतिक खेती के लिए प्रथम चरण में सरकार की ओर से प्रशिक्षण और जागरूकता पर अधिक जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान इस पद्धति को अच्छे से समझ सके। अब तक इस पोर्टल पर 2992 किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया है। 1201 किसानों ने रबी सीजन के दौरान प्राकृतिक खेती करने के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इसके अलावा, 3600 मृदा सैंपल भी एकत्रित किए गए हैं। प्राकृतिक खेती के लिए अब तक 405 एटीएम, बीटीएम तथा 119 प्र‌गतिशील किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये अब मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य किसानों को प्रशिक्षित करने का काम करेंगे। इतना ही नहीं, 151 युवाओं को भी इस खेती की पद्धति का प्रशिक्षण दिया गया है। 
 
*हरियाणा की नई पहल*
 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी व प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रमों के लिए हर किसान को 3 हजार रुपये दिये जा रहे हैं। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। इतना ही नहीं, प्राकृतिक खेती के उत्पादों की पैकिंग सीधे किसान के खेतों से ही हो, ऐसी योजना भी तैयार की गई है, ताकि बाजार में ग्राहकों को इस बात की शंका न रहे कि यह प्राकृतिक खेती का उत्पाद है या नहीं।
 
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती सुमिता मिश्रा, कृषि विभाग के महानिदेशक श्री हरदीप सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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