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विश्व शांति के लिए श्रीराम कथा जैसे कार्यक्रमों का आयोजन बहुत जरूरी - राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय

November 20, 2022 06:36 PM

हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि विश्व शांति के लिए श्रीराम कथा जैसे कार्यक्रमों का होना बेहद जरुरी है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और लोगों को प्रेरणा मिलती है। इतना ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव जैसे कार्यक्रमों के दौरान श्रीराम कथा का होना एक अद्भुत संगम है। इस अनोखे संगम से एक नए समाज का सृजन संभव होगा।

राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय रविवार को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव कुरुक्षेत्र के मेला क्षेत्र में गीता ज्ञान संस्थानम द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन के कार्यक्रम में संतों और गणमान्य लोगों के साथ अपने विचारों को सांझा कर रहे थे।

उन्होंने अपने विचारों को सांझा करते हुए कहा कि मानव मात्र को संस्कारित करने वाली रामकथा में आकर असीम शांति व सुख का अनुभव हो रहा है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सुख, शांति व समरसता आती है। रामकथा सुनकर सकारात्मक विचार आते हैं और लोग नकारात्मकता से बाहर आते हैं। इस प्रकार रामकथा विश्व के कल्याण का सूत्र है। धार्मिक आयोजनों से मन में स्वच्छता और संतुष्टि मिलती है, जो शांतिमय जीवन के लिए बेहद जरूरी है। व्यक्ति के जीवन में शांति है तो समृद्धि है। आज देश व प्रदेश के लोग कुरूक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की आभा से सराबोर है। आज कुरुक्षेत्र में भारतीय सनातन संस्कृति के दो महान प्रेरणादायक शास्त्रों का संगम हुआ है। हम सबका सौभाग्य है कि हम मोरारी बापू की पावन वाणी से श्रीराम कथा सुन रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से श्रीराम के चरित्र को प्रस्तुत किया। रचनाओं के माध्यम से सामाजिक मूल्यों को स्थापित किया, क्योंकि सामाजिक मूल्य व्यक्ति के हित और स्वार्थ से ऊपर होते हैं। श्रीराम ने भी सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए उन्हें अपने जीवन में उतारा। श्रीराम का चरित्र लोकमानस का आदर्श चरित्र है। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम और आदर्श के प्रतिष्ठापक हैं। इस भारत भूमि के वे इतिहास ही नहीं, वर्तमान और भविष्य भी हैं। राम सृष्टि के कण-कण में विद्यमान हैं। वे अन्न और जल के समान सुलभ है। वर्तमान राजनीतिक आपाधापी, सामाजिक अस्थिरता और भौतिक आकर्षण के समय में श्रीराम के साहस और आदर्श का स्मरण होते ही एक आदर्श समाज की संरचना हृदय-पटल पर चित्रित हो जाती है। समाज की वर्तमान स्थिति में श्रीराम कथा प्रकाश स्तम्भ की तरह जीवन की राह दिखलती है। समाज में अनेक प्रकार की विकृतियां और कुरीतियां हैं।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि 5159 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर अर्जुन का मोहभंग करने और कर्म करने का संदेश दिया। यह गीता के उपदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए पूर्णतः प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि 31 सालों के बाद एक बार फिर से संत मोरारी बापू की श्री राम कथा को सुनने का अवसर कुरुक्षेत्र ही नहीं हरियाणा प्रदेश वासियों को मिला है। इस कथा से पूरी मानवता को एक नई प्रेरणा मिलेगी।

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