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श्री गुरु तेग बहादुर- मानवता के सच्चे रक्षक लेखक - बंडारू दत्तात्रेय, राज्यपाल, हरियाणा

April 23, 2022 02:18 PM

एक महान योद्धा, आध्यात्मिक व्यक्तित्व और मातृभूमि के प्रेमी नौवें सिक्ख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के सर्वाेच्च बलिदान की मानवता सदैव ऋणी रहेगी। उन्होंने धर्म, मातृभूमि और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। इसीलिए उन्हें ‘‘हिंद की चादर‘‘ के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाश पर्व को मनाते हुए, हमें उनके महान आदर्शों के प्रति समर्पित करने की जरूरत है जो हमें धार्मिक स्वतंत्रता और मानव कल्याण के महत्व के बारे में सिखाते हैं।
अद्वितीय तरीके से श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें निडर होकर एक स्वतंत्र जीवन जीने की शिक्षा दी। मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा गुरू जी और उनके परिवार को भारी यातनाएं देने पर भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि उन्हें एक दिव्य शांति के साथ सहन किया। त्याग मल से तेग बहादुर में उनका परिवर्तन मानव इतिहास में परम धार्मिक दृढ़ता, नैतिकता और बहादुरी की अद्भुत कहानी है। गुरू जी ने अपने जीवन का बलिदान दिया लेकिन सत्य और धार्मिकता के मार्ग को नहीं छोड़ा। उनकी दिव्य शक्ति ऐसी थी कि जब उनके शिष्यों को उनके सामने क्रूरता से मारा जा रहा था तो वे गहरे ध्यान में थे। श्री गुरु तेग बहादुर जी ने कहा था कि धर्म एक कर्तव्य है, और एक आदर्श जीवन जीने का तरीका है। गुरू जी की शहादत मनुष्य को कर्तव्य परायणता, स्वतंत्रता व देश के प्रति प्रतिबद्धता का पाठ पढ़ाती है।
आज की युवा पीढ़ी को श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, चरित्र और बलिदान से प्रेरणा पाकर मानवीय और नैतिक मूल्यों को जीवन में आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि भारत फिर से विश्व गुरु बने। श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अत्याचार और अन्याय के आगे झुकने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने बेहद कठिनाईयों के बावजुद आदर्श और सिद्धांत का मार्ग चुना। कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल ‘चक नानकी‘ स्थान पर उनसे मिलने पहूॅंचा जो आज पवित्रनगरी ‘‘श्री आनंदपुर साहिब‘‘ के नाम स प्रसिद्ध है। उन्होंने धैर्यपूर्वक कश्मीरी पंडितों की बात सुनने के बाद कहा कि वे औरंगजेब या उनके आदमियों को यह बता दें कि वे अपना धर्म तभी बदल सकते हैं जब उनके गुरु ऐसा करेंगे।
इसके बाद औरंगजेब के अत्याचारीकृत्य इतने भयानक हुए कि आज भी उन्हें याद करने से डर लगता है। श्री गुरु तेग बहादुर जी को उनके तीनों भक्तों - भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दयाला के साथ बंदी बना लिया गया। जब उन्होंने इस्लाम स्वीकार करने से इन्कार कर दिया तो तीनों को उनके गुरु के सामने मार दिया गया। इससे श्री गुरु तेग बहादुर जी अचंभित हुए और उन्होंने वर्ष 1675 में शहादत को गले लगा लिया। जब उनका सिर कलम किया गया तो वे स्वयं ध्यानरत थे। आज दिल्ली के चांदनी चौक में गुरुद्वारा शीश गंज साहिब त्याग और बलिदान की गाथा का प्रतीक है, जिसका मानव इतिहास में कोई मुकाबला नहीं है। भाई जैता जी श्री गुरु तेग बहादुर जी के पवित्र शीश को श्री आनंदपुर साहिब ले गए, जो दुनिया में सिक्खों के पवित्र स्थानों में से एक है।
उनके बलिदानों ने न केवल ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम‘‘ के सिद्धांत पर आधारित एक प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति को विलुप्त होने से बचाया, बल्कि एक  दृढ़ और समावेशी राष्ट्र बनाने के रूप में भी काम किया।
सिक्ख धर्म की नींव की स्थापना मानव इतिहास में एक सामान्य बात नहीं थी, बल्कि यह इस्लाम के खिलाफ हिंदू धर्म की ढाल बन गई। यह आज एक महान परंपरा व विरासत है, जिसे नौवें सिक्ख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अपने धर्म की रक्षा के लिए लोगों को शक्ति व मजबूती प्रदान की बल्कि सिक्ख धर्म की महानता को शिखर तक पहूॅचाया।
श्री गुरु तेग बहादुर जी जानते थे कि उनके भक्तों ने बिना किसी पछतावे के धर्म के लिए कीमत चुकाई है। उन्होंने सभी प्रलोभनों को अस्वीकार कर कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने आंसू की एक बूंद भी नहीं बहाई। श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन धर्म और मानवता के लिए एक सच्ची शहादत है। श्री गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब की क्रूरता के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने हर सवाल के जवाब में कहा कि - ‘‘मैं सिक्ख हूं और सिक्ख रहूंगा‘‘!
आज श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं और बलिदान से हमें सबक लेने की जरूरत है । उनका बलिदान, सत्य अहिंसा में विश्वास, और सबके प्रति एक परोपकारी दृष्टिकोण के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने अंधविश्वास, जाति आधारित भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी ताकि हर इंसान अपनी पसंद का आदर्श जीवन जी सके। एक सच्चा धर्म हमें समाज और लोगों की सर्वाेत्तम तरीके से सेवा करना सिखाता है। श्री गुरु तेग बहादुर जी कमजोर और वंचितों की बेहतरी के लिए लड़े। उनके सपुत्र गुरु गोबिंद सिंह ने न केवल अपने पिता के सिद्धांतों और मूल्यों को बरकरार रखा, बल्कि खालसा बनाकर उन्हें आगे बढ़ाया, जो धार्मिकता और न्याय के लिए लड़ाई का एक शानदार प्रतीक है।
हमें श्री गुरु तेग बहादुर जी की महान शिक्षाओं को सदैव याद रखना चाहिए। हमें सुख, दुख, सम्मान और अपमान में स्थिर और सन्तुलित जीवन व्यतीत करना चाहिए। उनकी शिक्षाएँ हमें उद्देश्यपूर्ण जीवन और समानता, सद्भाव नैतिक मूल्यों का पालन करने व सामाजिक जीवन में सुरूचिता बनाए बनाए रखने के मार्ग पर चलना सिखाती हैं। श्री गुरु तेग बहादुर जी के महान शब्द मानवता के लिए ऊर्जा और ज्ञान का एक चिरस्थायी स्रोत हैं। उनके शब्दों के मधुर पाठ का श्रद्धालुओं पर विद्युतीय प्रभाव पड़ता था। उन्होंने सबसे शांतिपूर्ण और मानवीय तरीके से निरंकुश और कट्टर शासक के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। श्री गुरु तेग बहादुर का जीवन हमें बिना विचलित हुए हर स्थिति का सामना करने और पूरी तरह से शांति और दृढ़ता के साथ जीना सिखाता है।

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