Wednesday, May 06, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
जालंधर में BSF मुख्यालय के बाहर धमाका, खंगाले जा रहे सीसीटीवी कैमरेचुनावी उपलब्धियों के साथ सांस्कृतिक शिक्षा का संतुलन भी जरूरीमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गौशाला चारा अनुदान राशि वितरण समारोह में की बतौर मुख्य अतिथि शिरकतमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र से श्री नांदेड़ साहिब के लिए तीर्थ यात्रियों की विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवानामुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र पर आयोजित सेमिनार में की बतौर मुख्य अतिथि शिरकतप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधन जारीबंगाल-असम में जीत का BJP मुख्यालय में जश्न, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुंचेबंगाल चुनाव रिजल्ट: नंदीग्राम से BJP उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी 10200 वोटों से जीते
 
National

भावना तो तर्क वितर्क से परे होती है!

January 19, 2022 07:12 PM
डॉ कमलेश कली 
बचपन से ही मेरी मां हम सब को  खाना खाने से पहले भगवान को भोग लगाने के लिए कहती थी, और कुछ नहीं तो कृष्ण अर्पणं बोल दो ऐसा कहती थी। घर में विशेष अवसरों पर विधिवत भोग लगता था और ऐसा माना जाता था कि भोग लगाने से सब प्रभु प्रसाद बन जाता है, फिर तेरा मेरा नहीं रहता,बरकत भी रहती है,रज भी होता है अर्थात तृष्णा नहीं रहती। मंदिर, गुरुद्वारे और सब धर्म स्थलों पर भोग लगाने और फिर प्रसाद वितरण करने के अपनी  अपनी प्रथा होती है पर किसी न किसी रूप में  अर्पित जरुर किया जाता है, यहां तक यज्ञ करते हुए भी नैवेद्य समर्पित किया जाता है।एक बार एक छात्र ने अपने गुरु जी से इस संदर्भ में सवाल किया कि हम यूं ही भगवान को भोग लगाने की प्रथा निभाते हैं, क्योंकि भगवान तो खाता ही नहीं, अगर भगवान खाता तो अर्पित हुई वस्तु ,खाद्य पदार्थ  कम होना चाहिए ,जब भगवान खाते ही नहीं तो फिर भोग लगाने न लगाने से क्या फर्क पड़ता है। गुरु जी उस छात्र के सवाल पर उस समय तो चुप रहे , थोड़ी देर में उस छात्र बुलाकर पुस्तक से एक श्लोक याद करने को कहा ,तुभ्यम वस्तु गोविन्दं,तुभ्यमेव समर्पेयते,गृहाण सम्मुख हो भुत्वा, प्रसीदं परमेश्वर:, छात्र ने थोड़ी देर में श्लोक कंठस्थ कर लिया और गुरु जी को सुनाने लगा। गुरु जी बोले नहीं तुम्हें याद नहीं हुआ। छात्र ने आग्रह कर के कहा ,आप चाहे तो पुस्तक में देख सकते हैं।तब गुरु जी बोले, श्लोक तो किताब में वैसे का वैसा है,पर तुम्हारे पास कैसे आ गया?इस पर छात्र चुप हो गया,तब गुरु जी ने समझाया कि पुस्तक में जो श्लोक है,वह स्थूल है, तुमने कंठस्थ कर लिया तो सूक्ष्म रूप से श्लोक तुम्हारे दिमाग में चला गया, श्लोक वहां पुस्तक में भी वैसे का वैसा है, और  तुम्हारे दिमाग ने भी याद कर इसे गृहण कर लिया है। ऐसे ही जब हम भगवान को भोग लगाते हैं तो भगवान हमारी भावना अनुसार उसकी भासना लेते हैं, स्थूल रूप से चाहे वस्तु और खाद्य पदार्थ कम नहीं होता,पर हमारी भावना वहां तक पहुंचती है। शिष्य को अपनी बात का उत्तर मिल गया, और उसे समझ में आ गया कि भावना तो तर्क वितर्क से परे होती
 
Have something to say? Post your comment
 
 
More National News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधन जारी बंगाल-असम में जीत का BJP मुख्यालय में जश्न, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुंचे बंगाल चुनाव रिजल्ट: नंदीग्राम से BJP उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी 10200 वोटों से जीते PM मोदी आज शाम 6:30 बजे BJP मुख्यालय पहुंचेंगे, कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे पश्चिम बंगाल: BJP कार्यकर्ता ने ममता बनर्जी के घर के बाहर जय श्रीराम के नारे लगाए गुजरात: उमरेठ विधानसभा उप चुनाव में बीजेपी के हर्षद परमार बंपर वोटों से जीते असम के शुरुआती रुझानों में बीजेपी को बहुमत, 126 सीटों में से 71 पर बीजेपी आगे बंगाल चुनाव: TMC-BJP के बीच कांटे की टक्कर बंगाल में बीजेपी रुझानों में 100 सीटों पर आगे निकली, वहीं असम में भी बीजेपी 50 सीटों पर आगे भवानीपुर सीट के रुझानों में ममता बनर्जी पीछे चल रही हैं, बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी उनसे आगे चल रहे हैं