Friday, January 30, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
निजी बस चालकों की होगी अनिवार्य ड्राइविंग टेस्ट, हरियाणा परिवहन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता- परिवहन मंत्री श्री अनिल विज20 एचसीएस अधिकारियों को मिला सुपर टाइम स्केल, सरकार ने जारी किए आदेशई-नीलामी से पूर्व विकास कार्य पूर्ण करना आवश्यक: राइट टू सर्विस कमीशनहरियाणा में चार आईएएस अधिकारियों का तबादलाराज्य सरकार का मुख्य फ़ोकस प्रदेश से एनीमिया और कैंसर को समाप्त करने पर रहेगा : आरती सिंह रावहरियाणा कृषि ऋण में लालफीताशाही खत्म करेगा, आरबीआई समर्थित डिजिटल क्रेडिट सिस्टम जल्द आएगायुवा ज्ञान, विनम्रता, सफलता और शक्ति के साथ सेवा भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीSC ने UGC के नए नियमों पर रोक लगाई, CJI बोले- नए आदेश तक 2012 के नियम लागू
 
National

प्रकृति का गणित - मुक्त हाथों से बांटों बढ़ता ही जायेगा !

June 26, 2021 09:39 AM

डॉ कमलेश कली

प्रकृति का गणित भी कुछ अलग तरह का है, बांटने से, दूसरों के साथ शेयर करने से घटता नहीं अपितु बढ़ता है।यह रहस्य जिसको समझ में आ जाता है, वह अपना सब कुछ बांटे बिना रह ही नहीं सकता। धर्म और परमार्थ में दान का बहुत महत्व बताया गया है,पर दान का अर्थ केवल वस्तु या स्थूल धन तक ही सीमित नहीं, अपितु जो कुछ भी हमारे पास है उसे दूसरों के साथ बांटने से है।जीसस का प्रसिद्ध वचन है जो देगा उसे और मिलेगा, जो बांटेंगा वह और पाने का हकदार बन जाता है। गुरु नानक देव जी ने किरत करो और वडं छको को धर्म का सार बताते हुए लंगर की प्रथा शुरू की।लंगर  का मूलमंत्र है दिल से सेवा, इस प्रसंग में एक गरीब व्यक्ति उनके पास आया और उनसे कहने लगा कि वह तो बहुत गरीब है, किसी की क्या सेवा कर सकता है। गुरु जी ने सहज भाव से कहा कि तुम गरीब हो, क्योंकि तुमने देना नहीं सीखा।उस व्यक्ति ने पूछा कि मेरे पास देने को कुछ भी तो नहीं है तो उन्होंने समझाया कि तुम्हारा चेहरा मुस्कान बिखेर सकता है, तुम्हारा मुंह भगवान की महिमा कर सकता है, दूसरों को सुकून का अहसास दिलाने के लिए मीठे दो बोल बोल सकता है, तुम्हारे हाथ किसी के हाथ पकड़ कर उसकी सहायता कर सकते हैं और तुम कहते हो कि तुम्हारे पास देने के लिए कुछ नहीं है।सच है कि आत्मा की गरीबी सब से बड़ी गरीबी है, पाने का हक उसे है, जो देना जानते हैं।दान को पुण्य माना गया है जबकि लोभ को पाप का बाप कहा जाता है।जो जिस के पास है उसे बांट देने से ही बढ़ता  है।नदी अपने जल को जब तक बांटती चलती है अर्थात बहती रहती है तो स्वच्छ और निर्मल रहती है, जहां नदी रुक जाती है,अटक जाती है, वहीं उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाता है, पानी खड़ा रहने से सड़ने लगता है। इसलिए उदारता को महानता की विशेषता माना जाता है, बुद्ध ने उदारता को पहला अध्यात्मिक गुण माना है,उदार वही हो सकता है जिसे भरोसा है कि आज जो मेरे पास है उसे लुटा देने से, बांट देने से खुटने वाला नहीं है । इस जगत में  अपना क्या है ,न कुछ साथ लाए हैं न ही लेकर जाना है, बांटना ही जीवन जीने का तरीका है, फिर जो है उसे बांटों, जरुरी नहीं कि धन या वस्तु ही बांटे, जो आसानी से दे सकते हो, जो तुम्हारे पास है उसे मुक्त हाथों से बांटों।

Have something to say? Post your comment
More National News
प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन, बारामती हादसे में 5 लोगों की मौत, जल गया पूरा विमान
क्रैश हुआ अजित पवार का विमान, महाराष्ट्र के बारामती में लैंडिंग के वक्त हादसा
बीजापुर एनकाउंटर: 4 महिलाओं समेत 6 माओवादी ढेर, हथियार और विस्फोटक बरामद बहराइच में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण वाली 10 मजारों को बुलडोजर से ध्वस्त किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले - सोमनाथ में गर्व, गरिमा और गौरव है विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, AAP ने वाल्मिकी नाइक को गोवा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया बंगाल: चंपाहाटी में पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका, कम से कम चार मजदूर घायल ओडिशा में 9-सीटर विमान क्रैश, राउरकेला से भुवनेश्वर जा रही थी फ्लाइट, 9 लोग थे सवार चौधरी चरण सिंह को समर्पित के. सी. त्यागी की किताब का विमोचन कल उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत पर 5 जनवरी को फैसला सुनाएगा SC