Monday, June 22, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त का कर रहे हैं वितरणहरियाणा लोकभवन में भव्य रूप से मनाया गया पश्चिम बंगाल स्थापना दिवसपंचकूला:चौपाल से चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा चुनावों का सम्पूर्ण इतिहास पुस्तक का विमोचन हुआअधिकारी आमजन की शिकायतों का निवारण प्राथमिकता के आधार पर करें सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीमुख्यमंत्री ने सिरसा में किया जनकल्याण शिविर का अवलोकनआगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में खिलेगा कमल: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीहरियाणा की प्राचीन संस्कृति सांग को फिर जीवंत कर रही सरकार -कृष्ण कुमार बेदीप्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से युवाओं को मिलेगा सशक्त भविष्य : राव नरबीर सिंह
National

प्रकृति का गणित - मुक्त हाथों से बांटों बढ़ता ही जायेगा !

June 26, 2021 09:39 AM

डॉ कमलेश कली

प्रकृति का गणित भी कुछ अलग तरह का है, बांटने से, दूसरों के साथ शेयर करने से घटता नहीं अपितु बढ़ता है।यह रहस्य जिसको समझ में आ जाता है, वह अपना सब कुछ बांटे बिना रह ही नहीं सकता। धर्म और परमार्थ में दान का बहुत महत्व बताया गया है,पर दान का अर्थ केवल वस्तु या स्थूल धन तक ही सीमित नहीं, अपितु जो कुछ भी हमारे पास है उसे दूसरों के साथ बांटने से है।जीसस का प्रसिद्ध वचन है जो देगा उसे और मिलेगा, जो बांटेंगा वह और पाने का हकदार बन जाता है। गुरु नानक देव जी ने किरत करो और वडं छको को धर्म का सार बताते हुए लंगर की प्रथा शुरू की।लंगर  का मूलमंत्र है दिल से सेवा, इस प्रसंग में एक गरीब व्यक्ति उनके पास आया और उनसे कहने लगा कि वह तो बहुत गरीब है, किसी की क्या सेवा कर सकता है। गुरु जी ने सहज भाव से कहा कि तुम गरीब हो, क्योंकि तुमने देना नहीं सीखा।उस व्यक्ति ने पूछा कि मेरे पास देने को कुछ भी तो नहीं है तो उन्होंने समझाया कि तुम्हारा चेहरा मुस्कान बिखेर सकता है, तुम्हारा मुंह भगवान की महिमा कर सकता है, दूसरों को सुकून का अहसास दिलाने के लिए मीठे दो बोल बोल सकता है, तुम्हारे हाथ किसी के हाथ पकड़ कर उसकी सहायता कर सकते हैं और तुम कहते हो कि तुम्हारे पास देने के लिए कुछ नहीं है।सच है कि आत्मा की गरीबी सब से बड़ी गरीबी है, पाने का हक उसे है, जो देना जानते हैं।दान को पुण्य माना गया है जबकि लोभ को पाप का बाप कहा जाता है।जो जिस के पास है उसे बांट देने से ही बढ़ता  है।नदी अपने जल को जब तक बांटती चलती है अर्थात बहती रहती है तो स्वच्छ और निर्मल रहती है, जहां नदी रुक जाती है,अटक जाती है, वहीं उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाता है, पानी खड़ा रहने से सड़ने लगता है। इसलिए उदारता को महानता की विशेषता माना जाता है, बुद्ध ने उदारता को पहला अध्यात्मिक गुण माना है,उदार वही हो सकता है जिसे भरोसा है कि आज जो मेरे पास है उसे लुटा देने से, बांट देने से खुटने वाला नहीं है । इस जगत में  अपना क्या है ,न कुछ साथ लाए हैं न ही लेकर जाना है, बांटना ही जीवन जीने का तरीका है, फिर जो है उसे बांटों, जरुरी नहीं कि धन या वस्तु ही बांटे, जो आसानी से दे सकते हो, जो तुम्हारे पास है उसे मुक्त हाथों से बांटों।

Have something to say? Post your comment
More National News
केरल में कोच्चि सहित 10 से ज्यादा जगहों पर ED की छापेमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से मध्य प्रदेश और ओडिशा के पांच दिवसीय दौरे पर महाराष्ट्र में बड़ा हादसा, श्रद्धालुओं से भरी पिकअप कुएं में गिरी, 8 लोगों की मौत MP के मुरैना में दर्दनाक हादसा, ट्रैक पर उतरे 4 यात्रियों की दूसरी ट्रेन से कटकर मौत बिहार, झारखंड, ओडिशा में 6 जून तक बारिश का अलर्ट, महाराष्ट्र-गुजरात में भी बरसेंगे बादल दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन, 89 साल की उम्र में ली आखिरी सांस बंगाल में आज कैबिनेट विस्तार, 35 नेता लेंगे मंत्री पद की शपथ कोयला, खान और इस्पात पर संसदीय समिति की आज 11 बजे होगी बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बीकानेर पहुंचे, बॉर्डर इलाकों का दौरा करेंगे गुजरात में बड़ा सड़क हादसा: राजकोट में श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी; सास-बहू की मौत, 20 यात्री घायल