Saturday, January 03, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
निहंग सिंहों ने सदैव धर्म, राष्ट्र और मानवता की रक्षा की: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीसंत कबीरदास का संदेश आज भी प्रासंगिक, समाज को जोड़ने की देता है प्रेरणा- कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा* करनाल में बनने वाले एलिवेटेड फ्लाईओवर का नाम रखा जाएगा अटल सेतु - मनोहर लालउमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत पर 5 जनवरी को फैसला सुनाएगा SCप्रयागराज: पौष पूर्णिमा पर माघ मेले में 21 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकीहिमाचल: बब्बर खालसा ने ली नालागढ़ ब्लास्ट की जिम्मेदारी, FIR दर्जस्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी राई शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भावी ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने की होगी प्रयोगशाला- खेल राज्य मंत्री गौरव गौतमजनगणना-2027 के लिए हरियाणा तैयार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
 
National

प्रकृति का गणित - मुक्त हाथों से बांटों बढ़ता ही जायेगा !

June 26, 2021 09:39 AM

डॉ कमलेश कली

प्रकृति का गणित भी कुछ अलग तरह का है, बांटने से, दूसरों के साथ शेयर करने से घटता नहीं अपितु बढ़ता है।यह रहस्य जिसको समझ में आ जाता है, वह अपना सब कुछ बांटे बिना रह ही नहीं सकता। धर्म और परमार्थ में दान का बहुत महत्व बताया गया है,पर दान का अर्थ केवल वस्तु या स्थूल धन तक ही सीमित नहीं, अपितु जो कुछ भी हमारे पास है उसे दूसरों के साथ बांटने से है।जीसस का प्रसिद्ध वचन है जो देगा उसे और मिलेगा, जो बांटेंगा वह और पाने का हकदार बन जाता है। गुरु नानक देव जी ने किरत करो और वडं छको को धर्म का सार बताते हुए लंगर की प्रथा शुरू की।लंगर  का मूलमंत्र है दिल से सेवा, इस प्रसंग में एक गरीब व्यक्ति उनके पास आया और उनसे कहने लगा कि वह तो बहुत गरीब है, किसी की क्या सेवा कर सकता है। गुरु जी ने सहज भाव से कहा कि तुम गरीब हो, क्योंकि तुमने देना नहीं सीखा।उस व्यक्ति ने पूछा कि मेरे पास देने को कुछ भी तो नहीं है तो उन्होंने समझाया कि तुम्हारा चेहरा मुस्कान बिखेर सकता है, तुम्हारा मुंह भगवान की महिमा कर सकता है, दूसरों को सुकून का अहसास दिलाने के लिए मीठे दो बोल बोल सकता है, तुम्हारे हाथ किसी के हाथ पकड़ कर उसकी सहायता कर सकते हैं और तुम कहते हो कि तुम्हारे पास देने के लिए कुछ नहीं है।सच है कि आत्मा की गरीबी सब से बड़ी गरीबी है, पाने का हक उसे है, जो देना जानते हैं।दान को पुण्य माना गया है जबकि लोभ को पाप का बाप कहा जाता है।जो जिस के पास है उसे बांट देने से ही बढ़ता  है।नदी अपने जल को जब तक बांटती चलती है अर्थात बहती रहती है तो स्वच्छ और निर्मल रहती है, जहां नदी रुक जाती है,अटक जाती है, वहीं उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाता है, पानी खड़ा रहने से सड़ने लगता है। इसलिए उदारता को महानता की विशेषता माना जाता है, बुद्ध ने उदारता को पहला अध्यात्मिक गुण माना है,उदार वही हो सकता है जिसे भरोसा है कि आज जो मेरे पास है उसे लुटा देने से, बांट देने से खुटने वाला नहीं है । इस जगत में  अपना क्या है ,न कुछ साथ लाए हैं न ही लेकर जाना है, बांटना ही जीवन जीने का तरीका है, फिर जो है उसे बांटों, जरुरी नहीं कि धन या वस्तु ही बांटे, जो आसानी से दे सकते हो, जो तुम्हारे पास है उसे मुक्त हाथों से बांटों।

Have something to say? Post your comment
More National News
उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत पर 5 जनवरी को फैसला सुनाएगा SC पीएम मोदी 17 जनवरी और 18 जनवरी को मालदा-हावड़ा में रैलियां कर सकते हैं केंद्र सरकार ने X को लिखी चिट्ठी, ग्रोक से अश्लील कंटेंट हटाने के निर्देश, रिपोर्ट भी मांगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति ने दी नववर्ष की बधाई, की समृद्धि की कामना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीं नए साल की शुभकामनाएं, की शांति और खुशहाली की प्रार्थना गैंगस्टर इंद्रजीत के ठिकानों पर ED की छापेमारी, करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा नए साल से पहले हिमाचल सरकार वित्तीय जरूरतों के लिए ₹1000 करोड़ का कर्ज लेगी ओडिशा: बालेश्वर रेलवे स्टेशन पर युवक ने यात्रियों को परेशान किया, RPF ने अरेस्ट किया BJP राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आज पटना पहुंचेंगे, 31 दिसंबर को है पिता की पुण्यतिथि बांग्लादेश: उस्मान हादी की हत्या पर ढाका में प्रोटेस्ट जारी, शाहबाग में भी प्रदर्शन हुआ