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कैप्टन साहब जत्थेबंदिया भेज दी, एसवाईएल का पानी भी भेज दे : धनखड़

November 27, 2020 06:57 PM

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि किसान आंदोलन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा प्रायोजित हैं। धनखड़ ने सीएम कैप्टन को आड़े हाथों लेते हुए नसीहत दी कि आपने जत्थेबंदिया भेज दी, यदि वे इतने ही किसान हितैषी हैं तो एसवाईएल का पानी भेज दे। यदि वे इतने ही किसान हित की बात करना चाहते हैं तो हरियाणा के किसान की बात सुनें। सर्वोच्च न्यायालय भी हरियाणा के हक में पानी देने का फैसला सुना चुका है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष शुक्रवार को भाजपा जिला कार्यालय का भूमिपूजन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
धनखड़ ने पंजाब सीएम को दो टूक कहा कि किसान हित को लेकर कैप्टन जो ढोंग कर रहे हैं वे आश्वस्त करें कि एसवाईएल का पानी हरियाणा के किसान को दे रहे हैं। पिछले दिनों पंजाब सरकार की ओर से नहर को साफ कराने के साथ मिट्टी भी डलवा दी गई थी। पंजाब के किसानों को जमीन वापस देने का फैसला लिया था, उसे पलटा जाए। कैप्टन किसानों को आश्वस्त करें कि वे किसान के हित की बात करने वाले व्यक्ति हैं तो हरियाणा के हक के पानी की भी बात करें और उसे दिलवाएं। पंजाब सरकार हरियाणा का 19 लाख एकड़ फीट पानी दबाए बैठी है।
किसान आंदोलन पर ओमप्रकाश धनखड़ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन अंदेशे पर है, संदेशे पर नहीं। संदेशा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह है कि मंडी यूं ही चलेगी और एमएसपी यूं ही आएगा। उन्होंने किसानों को आह्वान किया कि वे अंदेशे पर नहीं चलें, केवल प्रधानमंत्री और सरकार के कहे पर भरोसा करें। नए काननू से किसानों को अपनी फसल बेचने का एक नया प्लेटफार्म मिला है। किसानों को जहां बिचौलियों से छूटकारा मिला है, वहीं उनकी फसल की डिमांड भी बढ़ी है।
तीन कृषि कानूनों के जरिये प्रधानमंत्री ने किसान की दिशा व दशा बदलने का काम किया है। भाजपा सरकार ने केवल स्वामीनाथन की रिपोर्ट से 50 प्रतिशत मुनाफा देना शुरू किया तो किसानों के खाते में सीधे 6 हजार रुपये आ रहे हैं। किसी भी प्रधानमंत्री ने किसानों के बारे में ऐसा करने का नहीं सोचा, जो प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। किसानों के लिए फसल बीमा लेकर आए।
धनखड़ ने कहा कि हरियाणा के किसानों को केवल राजनीतिक पार्टियों द्वारा बरगलाया जा रहा है। किसानों ने कभी भी कृषि कानूनों का विरोध नहीं किया है, केवल राजनीतिक दलों से जुड़े ही लोग कानूनों का विरोध जता रहे हैं, क्योंकि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है। वे अब किसानों के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं, जिन्होंने ताउम्र किसानों का शोषणा किया वे आज किसान हितैषी होने का ढोंग कर रहे हैं, किसान आज इनके चेहरे पहचान चुका है। किसान हितैषी होने का ढोंग करने वालों के चेहरे भी बेनकाब हो चुके हैं।

 
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