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आज किसानो के संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई जिसमें निर्णय लिया गया कि सभी किसान दिल्ली जाएंगे और अगर कोई सरकार हमे रोटी है तो वही बेथ कर प्रदर्शन किया जाएगा

November 19, 2020 06:56 PM

चंडीगढ़: आज किसानो के संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई जिसमें देश भर से आये किसान जत्थेबंदियों के किसान नेता शामिल हुए जिसके बारे में जानकारी देते हुए बलबीर सिंह राजेवल ने बताया कि 500 से ज्यादा किसान जाथेबंदिया की 7 सदस्य कमेटी की बैठक हुई है जिसमे तय हुआ है कि किसान सभी दिल्ली जाएंगे और अगर कोई सरकार हमे रोटी है तो वही बेथ कर प्रदर्शन किया जाएगा।

योगेंद्र यादव ने किसानों की ड्यूटी जो लगाई गई है उसकी जानकारी देते हुए बताया कि किसानों ने इतिहासिक काम किया है किउंकि आज तक किसानों की इतनी बड़ी यूनिटी नही बानी जिसमे 500 किसान संघठन एक साथ आये हैं।इस एक्ट के तहत किसान इतिहासिक संघर्ष करने जा रहे है ।काफी स्काई से 26 और 27 नॉवम्बर को दिल्ली चलो का नारा है और 26 nov तारीख को संविधान दिवस है।आज हम घोषणा करते हैं कि देश भर का किसान दिल्ली आएगा हालांकि ट्रेन नही चल रही कोरोना के चलते तो जो किसान नही आ सकेंगे वह अपने क्षेत्र में प्रदर्शन करेंगे और विरोध करेंगे।

नेशनल हाइवे 1,जीटी रॉड कुंडली बॉर्डर,जयपुर दिल्ली हाइवे,अगर दिल्ली हाइवे ,रोहतक हिसार दिल्ली हाइवे और बरेली दिल्ली हाइवे के हापुड़ में से किसान दिल्ली की तरफ मार्च करेंगे व कुल 5 जगह से दिल्ली में दाखिल होंगे।जिसके लिए हम इजाजत मांग रहर हैं कि हमे प्रदर्शन की इजाजत दी जाए और अगर नही आगे बढ़ने दिया जाता तो अनिश्चित कालीन धरना शुरह उसी जगह बैठा कर शुरू कर दिया जाएगा।

पंजाब के किसानों को सजा दी जा रही है कि अगर वह प्रदर्शन कर रहे है तो मालगाड़ी बन्द की गई है जो निंदनीय है।गुरनाम सिंह ने बताया कि यह अनोदलन ओअंजब में ओहले शुरू हुआ जिसके बाद हरियाणा में शुरू हुआ जहां ओर हमारे पर लाठीचार्ज हुए व धारा 307 लगाई गई जिसके बाद आज खुशी की बात हैकि पूरे देश  में अंदूण जोर पकड़ रहा है और इन कानूनों के खिलाफ है।संयुक्त किसान मोर्चा के अंतर्गत अगला आंदोलन लड़ा जाएगा ।26-27 का मोर्चा कब तक चलेगा यह नही पता पर इसकी शुरुआत 26 तारीख से शुरू होकर कब तक चलेगा मालूम नही और 5 रास्तों से हम दिल्ली के लिए आगे बढ़ेंगे व आगे नही जाने दिया तो रास्ते हम पूर्ण बंद करेंगे।चाहिए यह कि हमे दिल्ली जाने दिया जाए और हमे जो जानकारी मिल रही है कि दिल्ली अगर नही जाने दिया तो हम सभी रास्ते बंद करेंगे।यह आंदोलन देश के सभी नागरिकों को प्रभावित करेगा।एक ब्लेकमेलिंग इन कानूनों के साथ करने की आशा है जिसके चलते कॉरपोरेट ऊना व्यपार करेगा।पूरी दुनिया मे से जहां सस्ता मिलेगा वहां से व्यपारी खरीदेगा अनाज व जहां महंगा होगा वहां इसे बेच जाएगा।हनन मोल्ला वेस्ट बंगाल से 8 बार सांसद रह चुके हैं उन्होंने बताया कि यह आंदोलन देश का आंदोलन है जहां पर की एक सेक्शन यह भी प्रचार कर रहा है कि सिर्फ पंजाब मे आंदोलन हो रहा है जबकि ऐसा नही है बल्कि सभी जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।मोदी सरकार की किसान विरोधी सोच को हमने सामने रख है ।आंदोलन 2 हिस्सों में बांटा है कि जो दिल्ली के साथ लगते राज्य है वहां के किसान दिल्ली कूच करेंगे और जो नही आ रहे वह ग्रामीण आंदोलन करेंगे व ग्रामीण हड़ताल करेंगे।पूरे देश मे।27 तारीख को देश मे केंद्र सरकार के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।जगजीत सिंह ने कहा कि पंजाब अनाज बेचने में 60% हिस्सा रखता है और यह आंदोलन जो दिल्ली जाएगा उसमे ज्यादातर पंजाब का किसान होगा यह भी स्पष्ट है।पंजाब से भी जो दिल्ली को जाती सड़कें है उन पर भी किसान जाएगा व दिल्ली को अलग कर दिया जाएगा।हम 5 महीने का राशन लेकर जा रहे हैं।

हरियाणा में किसान पंजाब के मुकाबले कियूं कमजोर रहे हैं तो उसमें गुरनाम सिंह ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और हरियाणा में भाजपा की सरकार है तो वहां पर लाठीचार्ज हुआ है व 22 मामले 307 के प्रदेश में दर्ज हुए है व यहां तक कि 302 के मामले भी है।पंजाब में धान की खरीद अछि हुई है जबकि हरियाणा में ऐसा नही है।खाप पंचायत को हमने चिठी लिखी है व उनसे मुलाकात भी की है लेकिन ऐसा नही है कि वह सभी साथ नाहज कुछ साथ भी है।

योगेंद्र यादव ने राजनीतिक पार्टियों के समर्थन पर यादव ने कहा कि बिना अपनी पार्टी के झंडे के जो भी आये वह आ सकते है बेशक मोदी भी आ जाए।पंजाब में किसान बाकी राज्यों के किसान के मुकाबले आगे है।कई राज्यों में आंदोलन के चलते बड़े आंदोलन हहै है जिन्हें दिखाया नही जाता और कहा जाता है कि बाकी जगह प्रदर्शन नही है।

शिव कुमार शर्मा उर्फ काका ने बताया कि जब यह अध्यादेश आया तो हमे 10 से 15 दिन तक इसे समझने लगे गए जिसके बाद पूरे देश मे मुहिम शुरू की है लेकिन सभी अभी तक नही समझे हैं जिन्हें अभी समय लगेगा लेकिन पंजाब का किसान सबसे पहले समझ और यह डेथ ब्रंट है।यह पहकी बार है कि सभी एकमत हो किसान एक साथ लड़ रहे हैं।किसान इतिहासिक मोड़ पर है व जनता हमे सहयोग दे रही है।अडानी व अम्बानी के उत्पादन का बहिष्कार देश को नाइ दिशा दे रहा है।

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