Sunday, May 03, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में बस पलटी, 40 यात्री घायलबंगाल में कल वोटो की गिनती, चुनाव आयोग ने तैनात किए 432 ऑब्जर्वरदिल्ली के विवेक विहार में आग की घटना बेहद दुखद, अमित शाह ने जताया शोकबंगाल: बीजेपी नेता सुभाष सरकार का दावा, जीतेंगे 170-180 सीटेंजैपनीज पार्क में बने भगवान परशुराम की 121 फुट की भव्य प्रतिमा : डॉ. अरविंद शर्मापंजाब का ओबीसी समाज एकजुट हो जाओ, अगली बार सरकार भाजपा की होगी : श्री नायब सिंह सैनी पंजाब में भाजपा की सरकार बनाओ ,हरियाणा में लागू सभी योजनाएं पंजाब में भी लागू कर देंगे : श्री नायब सिंह सैनीरतिया के पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा भाजपा में शामिल हुए ,प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में हुए शामिल
 
Haryana

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आंकड़ों के साथ खोली एमएसपी में मामूली बढ़ोत्तरी की पोल

September 22, 2020 06:16 PM

चंडीगढ़: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एमएसपी में बढ़ोत्तरी के आंकड़े पेश कर सरकार को आईना दिखाया है। उनका कहना है कि यूपीए सरकार के मुक़ाबले ये बढ़ोत्तरी कहीं नहीं ठहरती। आज भी प्रदेश की मंडियों में धान, बाजरा, मक्का, मूंग और कपास एमएसपी से बहुत कम रेट पर पिट रहे हैं। क्योंकि सरकार एमएसपी पर ख़रीद नहीं कर रही है। मजबूर में किसानों को प्राइवेट एजेंसियों के हाथों लुटना पड़ा रहा है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मंडी में किसान को एमएसपी देने और दाने-दाने की सरकारी ख़रीद करने का लेकर दावा करने वाली सरकार को आज प्रदेश की मंडियों में जाकर देखना चाहिए। प्रदेश की कई मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। लेकिन सरकार ख़रीद नहीं कर रही है। 1850 रुपये एमएसपी के बावजूद किसान को धान 1000-1200 रुपये में बेचनी पड़ रही है। नए क़ानून लागू करके सरकार किसानों को जिन प्राइवेट एजेंसियों के हवाले करना चाहती है, आज वो ही एजेंसियां किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठाकर एमएसपी से बहुत कम रेट में उनकी फसलें ख़रीद रही हैं। जब सरकार मंडियों को कमज़ोर करके इनको खुली छूट दे देगी तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये एजेंसियां किस तरह किसान का शोषण करेंगी। सरकार को बताना चाहिए कि आज प्राइवेट एजेंसियां किसानों को उचित रेट क्यों नहीं दे रही हैं? अब ऐसा कौन सा क़ानून है जो उन्हें उचित रेट देने से रोकता है? नए क़ानून लागू होने के बाद इन एजेंसियों का हृदय परिवर्तन कैसे हो जाएगा? यहीं वो सवाल हैं जिनके जवाब किसानों को नहीं मिल पा रहे हैं और वो नए क़ानूनों को लेकर आशंकित हैं।

हुड्डा ने कहा कि किसान, आढ़ती और विपक्ष सरकार से लगातार मांग कर रहे थे कि धान की खरीद 15 सितंबर से होनी चाहिए। सरकार ने ख़ुद 25 सितंबर से ख़रीद शुरू करने का ऐलान किया था। लेकिन अब वो 1 अक्टूबर से ख़रीद शुरू होने की बात कह रही है। बार-बार अपने बयान से पलटना बताता है कि सरकार की मंशा धीरे धीरे एमएसपी और मंडी व्यवस्था को खत्म करने की है। सरकार को चाहिए वो जल्द से जल्द धान की ख़रीद शुरू करे और पिछली बार की तरह इस बार किसान पर 25 क्विंटल की ही ख़रीद की लिमिट ना थोपे। अगर सरकार किसान से महज़ 25 क्विंटल धान ही ख़रीदेगी तो किसान बाक़ी धान लेकर कहां जाएगा?

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने रबी की फसलों के लिए एमएसपी में बढ़ोतरी की महज़ खानापूर्ति की है। फसलों के समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी नाकाफी है। हरियाणा में मुख्यतः उगाए जाने वाले गेहूं पर सरकार ने सिर्फ 2.6% यानी 50 रुपये की बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है। जबकि पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट, बीज, दवाई, बुआई, कटाई, कढ़ाई और सिंचाई की लागत बेतहाशा बड़ी है। उसके मुक़ाबले एमएसपी में बढ़ोत्तरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आंकड़ों के साथ समझाया कि बीजेपी सरकार के दौरान लगातार एमएसपी में बढ़ोतरी का प्रतिशत गिरता आ रहा है। यूपीए सरकार के दौरान धान के रेट में हर साल औसतरन 14-15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करते हुए 800 रुपये बढ़ाए गए थे। इसके अलावा खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट की वजह से उस दौरान किसानों को एमएसपी से कहीं ज़्यादा 4000 से 6000 रुपये तक धान का रेट मिला। दूसरी तरफ मौजूदा सरकार में एमएसपी बढ़ोत्तरी दर घटकर सिर्फ 6 प्रतिशत सालाना रह गई। ज्यादातर किसानों को तो वो भी नहीं मिलता।

गेहूं के रेट में यूपीए सरकार के दौरान कुल 127 प्रतिशत यानी हर साल औसतन 13 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई। लेकिन मौजूदा सरकार में ये बढ़ोत्तरी घटकर सिर्फ 5 प्रतिशत रह गई। इस बार तो महज़ 2.6 की बढ़ोत्तरी की गई है। गन्ने के रेट को भी कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 3 गुणा बढ़ोत्तरी करते हुए 117 से 310 रुपये तक पहुंचाया गया। लेकिन इस सरकार ने 6 साल में महज़ 30 रुपये की बढ़ोत्तरी की है। उसकी भी बरसों से पेमेंट रुकी हुई है। हुड्डा ने कहा कि सरकार को मामूली बढ़ोत्तरी का ढिंढ़ोरा पीटने की बजाए ज़मीनी हक़ीक़त को समझना चाहिए और किसानों की मुश्किल दूर करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने अपनी और किसानों की मांग दोहराते हुए कहा कि ये 3 कृषि बिल किसान विरोधी हैं। इसलिए सरकार को चौथा कानून लेकर लाना चाहिए। इसमें मंडी से बाहर भी एमएसपी पर खरीद का कानूनी प्रावधान होना चाहिए। अगर कोई भी प्राइवेट एजेंसी किसान से एमएसपी से नीचे खरीदती है तो उसमें सजा होनी चाहिए। साथ ही अपने वादे के मुताबिक बीजेपी को स्वामीनाथन रिपोर्ट के सी2 फार्मूले पर एमएसपी देनी चाहिए।

 
Have something to say? Post your comment
 
 
More Haryana News
जैपनीज पार्क में बने भगवान परशुराम की 121 फुट की भव्य प्रतिमा : डॉ. अरविंद शर्मा रतिया के पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा भाजपा में शामिल हुए ,प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में हुए शामिल अवैध पोस्टर, बैनर व होर्डिंग्स हटाने को लेकर चुनाव आयोग सख्त प्रदेश में 11 सालों में विकास के साथ-साथ समाज में बढ़ी है जागरूकता-विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण आगामी 5 मई को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित होगी 'सशक्त नारी - सशक्त समाज - सशक्त राष्ट्र' संगोष्ठी और प्रदर्शनी
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गरनाला निवासी गुरप्रीत सिंह को गोली लगने से मौत मामले में अम्बाला एसपी को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए
प्रदेश में पेयजल आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
नकारात्मक ऊर्जा का नाश धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता के जागरण से होता है:अनिल विज
रीता शर्मा: समर्पण, नेतृत्व और पहली ADN बनने का गौरवपूर्ण सफर
पंचकूला:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्थानीय निकाय चुनाव संकल्प पत्र में वादों के बारे में जानकारी देते हुए