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Haryana

हरियाणा में बरोदा उपचुनाव 29 नवम्बर से पहले करवाने का चुनाव आयोग ने दिया संकेत

September 04, 2020 06:11 PM

विकेश शर्मा

चंडीगढ़ - आज 4 सितम्बर को भारतीय चुनाव आयोग द्वारा आगामी बिहार विधानसभा आम चुनाव और देश के विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में रिक्त पड़ी 64 सीटों और एक लोकसभा सीट के उपचुनावों के सम्बन्ध में की गयी बैठक के बाद जारी एक प्रेस नोट में स्पष्ट किया है कि आयोग द्वारा आगामी 29 नवंबर से पहले उक्त सभी चुनाव और उपचुनाव संपन्न करवा लिए जाएंगे. ज्ञात रहे कि उक्त 64 उपचुनावों की सीटों में हरियाणा विधानसभा की बरोदा सीट भी शामिल है. लिखने योग्य है कि मौजूदा बिहार विधानसभा का कार्यकाल भी 29 नवंबर 2020 तक ही है.

 

आज से करीब पांच माह पूर्व 12 अप्रैल 2020 को मौजूदा 14 वीं हरियाणा विधानसभा के सदस्य एवं सोनीपत ज़िले के बरोदा विधानसभा हलके से कांग्रेस पार्टी के विधायक श्री कृष्ण हुड्डा के निधन होने के बाद 90 सदस्यी हरियाणा विधानसभा की सदस्य संख्या एक घटकर 89 हो गयी है जबकि कांग्रेसी विधायकों की संख्या 31 से घटकर 30 हो गयी है.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि बीती 15 अप्रैल को हरियाणा विधानसभा सचिवालय ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिवंगत श्री कृष्ण हुड्डा की बरौदा सीट को 12 अप्रैल से रिक्त घोषित कर दिया. उन्होंने आगे बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 150 के तहत राज्य विधानसभा में मौजूदा विधायक की मृत्यु, त्यागपत्र अथवा उनका निर्वाचन रद्द होने अथवा उसके अयोग्य घोषित होने के कारण आदि कारणों से रिक्त हुई सीट पर भारतीय चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव करवाया जाता है.

धारा 151 ए के अनुसार ऐसा उपचुनाव करवाने की समय सीमा रिक्त घोषित की गयी विधानसभा सीट के छः माह के भीतर होती है हालांकि हेमंत ने बताया कि अगर रिक्त हुई विधानसभा सीट की शेष अवधि एक वर्ष से कम हो, तो उपचुनाव नहीं करवाया जाता है. इसके अतिरिक्त अगर कुछ विशेष परिस्थितियों (जैसे मौजूदा कोरोना-वायरस महामारी) में अगर निर्धारित छः माह की अवधि में चुनाव करवाना संभव न हो, तो चुनाव आयोग केंद्र सरकार के परामर्श से उपचुनाव को आगे भी भी टाल सकता है जैसा कि अब किया जा रहा है.

हेमंत ने बताया कि उक्त धारा 151 ए को भारतीय संसद द्वारा वर्ष 1996 में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में डाला गया था एवं यह 1 अगस्त 1996 से प्रभावी हुई. उन्होंने बताया की इस धारा से पहले चुनाव आयोग को किसी संसदीय सीट एवं किसी विधानमंडल/विधानसभा ककि सीट के चुनाव को स्थगित करने की शक्ति का स्पष्ट उल्लेख तो उक्त कानून में नहीं था परन्तु अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर आयोग यह कर सकता है. ऐसा चुनाव आयोग मतदान से पहले और बाद में भी कर सकता है जैसे हरियाणा में वर्ष 1990 में रोहतक ज़िले की महम विधानसभा सीट का उपचुनाव दो बार चुनाव आयोग द्वारा अलग अलग कारणों से रद्द किया गया था

हालांकि एक रोचक तथ्य के बारे में हेमंत ने बताया कि आज से करीब 30 वर्ष पूर्व 19 अप्रैल 1991 को चुनाव आयोग ने पंजाब विधानसभा के आम चुनावो की घोषणा कर दी जिनके लिए मतदान 22 जून 1991 को मतदान करवाया जाना था परन्तु दो दिन पूर्व 20 जून को प्रदेश में आतंकवाद के माहौल के कारण बिगड़ती कानून-व्यवस्था के दृष्टिगत आयोग ने मतदान को 25 सितम्बर 1991 के लिए स्थगित कर दिया. हालांकि इस संशोधित तिथि के कुछ दिनों पहले ही तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा संसद के दोनों सदनों से एक कानून- पंजाब में आम चुनावो को रद्द करने सम्बन्धी अधिनियम, 1991 पारित करवाकर प्रदेश के विधानसभा आम चुनावो के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी की गयी नोटिफिकेशन्स को ही रद्द करवा दिया जिससे सम्पूर्ण चुनाव प्रक्रिया रुक गयी और अंतत: इसके अगले वर्ष फरवरी, 1992 में राज्य में विधानसभा आम चुनाव करवाए गए.

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