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Haryana

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अहम निर्णय लिए गए

August 13, 2020 09:03 PM

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भारत सरकार,जहां एक जल संसाधन मंत्रालय है, जिसे समेकित जल संसाधन प्रबंधन के उद्देश्य के लिए जल शक्ति मंत्रालय कहा जाता है, की तर्ज पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से ‘लघु सिंचाई एवं भूजल’ विषय को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की गई।

         यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के साथ पानी से संबंधित सभी विषयों को समेकित किया जा सके।

         हरियाणा सरकार (आबंटन) नियम1974 में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की क्रम संख्या 18 में सूचीबद्घ ‘लघु सिंचाई योजना’ को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को इसलिए हस्तांतरित किया गया ताकि सिंचाई के साथ-साथ सरफेज़ एवं सब-सरफेज़ पानी से संबंधित सभी मामलों को एक ही विभाग के तहत लाया जा सके जोकि जल क्षेत्र के व्यापक परिप्रेक्ष्य के लिए उचित है।

         हरियाणा राज्य में उपलब्ध ताजा पानी राज्य की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मुश्किल से पर्याप्त है और सतहीपानी, जो कि सिंचाई विभाग द्वारा प्रबंधित है और जिसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है, केवल सिंचाई के पानी की आवश्यकता का लगभग 40 प्रतिशत पूरा कर पाता है। परिणामस्वरूप लगभग 60 प्रतिशत पानी की आवश्यकता को वर्षा से या भूजल के माध्यम से पूरा किया जाता है। यह भी एक तथ्य है कि केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा हरियाणा के लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र को डार्क जोन घोषित किया गया है।

         हरियाणा, विशेषकर दक्षिणी हरियाणा में भूजल की गहराई 800 से 1000 फीट तक नीचे है, इसलिए एकीकृत जल संसाधन के उद्देश्य से सतही पानी के साथ-साथ भूजल का प्रबंधन एक एजेंसी और एक विभाग के साथ होना चाहिए। इस तरह की व्यवस्था राज्य को एकीकृत तरीके से अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से जल संसाधनों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाएगी। इसके मद्देनजर, वर्तमान में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधीन मौजूद ‘लघु सिंचाई योजना’ को परिसंपत्ति,वर्तमान काडर, स्टाफ और बजट के साथ सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा।

हरियाणा सरकार ने हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र (हरसक),हिसार के प्रशासनिक नियंत्रण को सभी विद्यमान परिसम्पत्तियों एवं दायित्वों के साथ‘जैसे है-जहां है’ आधार पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से लेकर नागरिक संसाधन सूचना विभाग (सीआरआईडी) को सौंपने का निर्णय लिया है।

         इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

        हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, हिसार जिसे वर्ष 2007 तक हरियाणा राज्य सुदूर संवेदी अनुप्रयोग केन्द्र के नाम से जाना जाता था, हरियाणा सोसायटी पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम 2012 के तहत चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार में स्थित एक पंजीकृत सोसायटी है। हरसक की स्थापना 1986 में राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में उपग्रह डाटा के उपयोग एवं अनुप्रयोग,सभी रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली के लिए नोडल एजेंसी और मानव रहित वाहन / ड्रोन आधारित सर्वेक्षण के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत की गई थी।

        हरसक के अन्य प्रमुख उद्देश्यों में सुदूर संवेदीकरण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, मार्गदर्शन, समन्वय और सहायता करना, और सुदूर संवेदी तकनीकों का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों के संपूर्ण सरगम की निगरानी एवं आकलन के लिए सर्वेक्षण करना, सुदूर संवेदन के निर्दिष्ट क्षेत्रों में राज्य के शिक्षण और अनुसंधान संगठनों को अनुसंधान एवं विकास में सहायता करना, सुदूर संवेदी प्रौद्योगिकी एवं इसके अनुप्रयोगों में उन्नत अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं, व्याख्यान,संगोष्ठियों का आयोजन करना और हरसक द्वारा किए गए सुदूर संवेदी जांच के परिणामों का समय-समय पर प्रकाशन करना शामिल है।

         हरसक की परिसंपत्ति में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से एक रुपया प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से 21अप्रैल, 2087 तक 99 वर्ष की अवधि के लिए पट्टïे पर ली गई 5 एकड़ भूमि शामिल है। पट्टा विस्तार योग्य है। इसके पास 146.32लाख रुपये की अन्य अचल संपत्तियां और7,24,27,776 रुपये की चल संपत्तियां भी हैं। इसके अलावा, हरसक का 46,42,86,966.90रुपये का बैंक डिपॉजिट और 51,62,84,938रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के लिए प्रतिबद्घ देनदारियां हैं।

         हरसक चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार कैंपस में स्थित है और इसका गुरुग्राम में एक नोड और पंचकूला में फ्रंट ऑफिस है। हरसक में 55 स्वीकृत तकनीकी एवं गैर-तकनीकी पद हैं।

हरियाणा सरकार ने सहायता प्राप्त गैर-सरकारी विद्यालयों से 28जुलाई, 1988 से 10 मई, 1998 तक की अवधि के दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं गैर-शिक्षक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पंडित दीन दयाल उपाध्याय मानदेय योजना के माध्यम से पैंशन के रूप में मासिक मानदेय प्रदान करने का निर्णय लिया है।

इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

         इस निर्णय के अनुसार प्राचार्य को20,000 रुपये, मुख्याध्यापक को 18,000रुपये, प्राध्यापक को 16,000 रुपये, अध्यापक/हिन्दी/पंजाबी/संस्कृत/उर्दू अध्यापक को14,000 रुपये, जेबीटी/कला अध्यापक/पीटीआई/कटिंग एवं टेलरिंग अध्यापक को12,000 रुपये, नॉन टीचिंग स्टाफ (तृतीय श्रेणी) को 11,000 रुपये और नॉन टीचिंग स्टाफ (चतुर्थ श्रेणी) को 6,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा।

         वर्तमान में, 28 जुलाई, 1988 से 10 मई, 1998 तक की अवधि के दौरान सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या लगभग 352 है, जिन्हें सरकार के इस निर्णय से लाभ होगा।  इन द्वारा भावी पीढ़ी के भविष्य के लिए अपनी सेवा के दौरान बहुत योगदान दिया गया था और इस समय ये लोग वृद्घावस्था में बिना किसी वित्तीय सुरक्षा के अपनी आजीविका के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।

         ऐसे अधिकारी एवं कर्मचारी स्कूलों से अपनी सेवानिवृत्ति के समय सहायता प्राप्त स्वीकृत पदों पर 10 वर्ष की न्यूनतम योग्यता सेवा की शर्त पूरी करते हों। यह मानदेय सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु तक प्रदान किया जाएगा और सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु उपरांत उसके आश्रित या कानूनी उत्तराधिकारी को किसी भी परिस्थिति में किसी भी स्तर पर इस लाभ के लिए योग्य नहीं माना जाएगा।  

         इस मानदेय राशि का भुगतान केवल उन्हीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किया जाएगा जो किसी अन्य स्रोत या सेवानिवृत्त पेंशन का लाभ प्राप्त नहीं कर रहेे हैं। यह नीति पहली जनवरी, 2019 से प्रभावी होगी।

         मानदेय प्राप्त करने के लिए पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपने आवेदन शपथ पत्र सहित उक्त नियम एवं शर्तों का उल्लेख करते हुए संबंधित सहायता प्राप्त गैर-सरकारी विद्यालयों की प्रबंधन मंडल को प्रेषित करना होगा और वे उसे अपनी सिफारिशों के साथ  संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी या जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे। उन्हें यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि वे भविष्य में इस मानदेय राशि को बढ़ाने के लिए नहीं कहेंगे।

 हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नगर निगम,अंबाला के गांव साधोपुर में स्थित लगभग7.72 एकड़ भूमि वर्तमान कलेक्टर दर पर महिला एवं बाल विकास विभाग को समेकित बहुउद्देशीय परिसर के निर्माण के लिए हस्तांरित करने के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें ऑब्जर्वेशन होम, स्पेशल होम,प्लेस ऑफ सेफ्टी और चिल्ड्रन होम स्थापित किए जाएंगे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सितंबर, 2019 के चौथे दिन से पहले चुने गए अध्यक्षों की नियुक्ति, हटाने या निलंबन को नियंत्रित करने वाली शर्तों के संबंध में हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा-279 में संशोधन के लिए अध्यादेश या/ और विधेयक लाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

         यह संशोधन सितंबर, 2019 के चौथे दिन से लागू माना जाएगा, जिस तिथि को हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 लागू हुआ था।

         संशोधन के अनुसार, ‘हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 में कुछ भी शामिल होने के बावजूद,हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से पहले नगर पालिकाओं के अध्यक्ष के रूप में चुने गए व्यक्तियों की नियुक्ति, हटाने या निलंबन के लिए या ऐसे व्यक्ति(यों) द्वारा खाली किए गए किसी भी पद / कार्यालय को भरना हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होना जारी रहेगा, जो हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से तुरंत पहले अस्तित्व में था।

        हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से पहले नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में चुने गए व्यक्ति (यों) में से किसी के खिलाफ किए गए या शुरू की गई या शुरू की जा सकने वाली या शुरू की जाने वाली सभी कार्रवाइयां हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होंगी, जो हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से तुरंत पहले अस्तित्व में था।

         यहां यह उल्लेखनीय है कि हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 को राज्य विधानसभा द्वारा अधिनियमित किया गया था, जो प्रकाशित है और 4 सितंबर, 2019 से प्रभावी है। इस संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि नगरपालिका [हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 (इसके बाद ‘अधिनियम’ के रूप में संदर्भित)के तहत] में अध्यक्ष सहित सभी सीटें प्रत्यक्ष चुनाव में चुने गए व्यक्ति द्वारा भरी जाएंगी। अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए, जो अधिनियम प्रदान किया गया था, उसमें भी संशोधन किया गया और अध्यक्ष को अब नगर पालिकाओं के अन्य सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया नहीं जा सकता। इस संशोधन अधिनियम के माध्यम से नगरपालिकाओं के अध्यक्ष के कार्यालय के संबंध में परिणामी संशोधन किए गए हैं।

        अब, एक अध्यादेश या विधेयक लाकर हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा-279 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया ताकि अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित व्यक्तियों के निलंबन, हटाने या उनके द्वारा रिक्त पदों को भरने के संबंध में हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 से पहले चुने गए लोगों को नियंत्रित किया जा सके।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अक्तूबर, 2018के चौथे दिन से पहले चुने गए मेयर की नियुक्ति, हटाने या निलंबन को नियंत्रित करने वाली शर्तों के संबंध में हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1994 की धारा-421 में संशोधन के लिए अध्यादेश या/और विधेयक लाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

         यह संशोधन अध्यादेश अक्तूबर, 2018के चौथे दिन से लागू माना जाएगा, जिस तिथि को हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 लागू हुआ था। 

         संशोधन के अनुसार, ‘हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 में कुछ भी शामिल होने के बावजूद, हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 के लागू होने से पहले नगर निगम के  मेयर के रूप में चुने गए व्यक्तियों की नियुक्ति,हटाने या निलंबन के लिए या ऐसे व्यक्ति(यों) द्वारा खाली किए गए किसी भी पद / कार्यालय को भरना हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होना जारी रहेगा, जो हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 के लागू होने से तुरंत पहले अस्तित्व में था।

        हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 के लागू होने से पहले नगर निगम के मेयर के रूप में चुने गए व्यक्ति (यों) में से किसी के खिलाफ किए गए या शुरू की गई या शुरू की जा सकने वाली या शुरू की जाने वाली सभी कार्रवाइयां हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होंगी, जो हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 के लागू होने से तुरंत पहले अस्तित्व में था।

यहां यह उल्लेखनीय है कि हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 को राज्य विधानसभा द्वारा अधिनियमित किया गया था और इसे 4 अक्तूबर, 2018 को प्रकाशित किया गया । राज्य विधान सभा द्वारा ऐसा ही एक अधिनियम हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019अधिनियमित किया गया जिसे प्रकाशित किया जा चुका है और जो 4 सितम्बर, 2019 से प्रभावी है।

         इस संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि नगरपालिका [हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 (इसके बाद‘अधिनियम’ के रूप में संदर्भित) के तहत] अध्यक्ष सहित सभी सीटें प्रत्यक्ष चुनाव में चुने गए व्यक्ति द्वारा भरे जाएंगे। अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए, जो अधिनियम प्रदान किया गया था,उसमें भी संशोधन किया गया और अध्यक्ष को अब नगर पालिकाओं के अन्य सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया नहीं जा सकता। इस संशोधन अधिनियम के माध्यम से नगरपालिकाओं के अध्यक्ष के कार्यालय के संबंध में परिणामी संशोधन किए गए हैं।

        अब, एक अध्यादेश लाकर हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा-421में संशोधन करने का निर्णय लिया गया ताकि अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित ऐसे व्यक्तियों के निलंबन, हटाने या उनके द्वारा रिक्त पदों को भरने के संबंध में हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 से पहले चुने गए लोगों को नियंत्रित किया जा सके।

 हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पंजाब ग्राम शामलात भूमि(विनियमन), अधिनियम, 1961में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

         संशोधन के अनुसार, चूंकि मनीमाजरा खंड हरियाणा राज्य का भाग नहीं है, इसलिए अधिनियम की धारा-2 के परिभाषा खंड से‘खंड मनीमाजरा’ शब्द को हटाया जाएगा। अधिनियम की धारा-2 (जी) (4) में संदर्भित‘पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952 की धारा-3 के खंड (एमएमएम)’ शब्दों के स्थान पर‘हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-2 के खंड (द्ब1)’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

          इसके अतिरिक्त, कथित नदी प्रभावी क्षेत्र से संबंधित अधिनियम की धारा-2 (जी) के अपवाद खंड (द्ब) को हटाने का भी निर्णय लिया गया ताकि गलत व्याख्या से बचा जा सके। पंजाब सरकार द्वारा इसे पहले ही 1976के अधिनियम संख्या 19 द्वारा लोपित किया जा चुका है।   

         भूमि के प्रचलित पट्टïा मूल्य को देखते हुए और शामलात भूमि पर काबिजों के विरूद्घ दण्डात्मक प्रावधान के रूप में कार्रवाई हेतु जुर्माना राशि की 5000 रुपये से10,000 रुपये प्रति हैक्टेयर की वर्तमान दर को हर वर्ष भूमि के क्लैक्टर रेट के एक प्रतिशत के बराबर की राशि से अनधिक दर तक बढ़ाया जाना प्रस्तावित है लेकिन यह भूमि के वर्तमान कलैक्टर दर से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

हरियाणा में ओल्ड गुरुग्राम के निवासियों को मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 6821.13 करोड़ रुपये की लागत से गुरुग्राम में हुडा सिटी सेंटर से विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों तक मेट्रो रेल कनेक्शन की अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को स्वीकृति प्रदान की गई।

         कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 28.80किलोमीटर है, जिसमें छ: इंटरचेंज स्टेशनों के साथ 27 एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं। यह लिंक हुडा सिटी सेंटर से शुरू होकर सेक्टर45, साइबर पार्क, जिला शॉपिंग सेंटर, सेक्टर47, सुभाष चौक, सेक्टर 48, सेक्टर 72 ए,हीरो होंडा चौक, उद्योग विहार फेज 6, सेक्टर10, सेक्टर 37, बसई गांव, सेक्टर 9, सेक्टर 7,सेक्टर 4, सेक्टर 5, अशोक विहार, सेक्टर 3,बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर 23 ए, सेक्टर 22, उद्योग विहार फेज 4, उद्योग विहार फेज 5 से गुजरते हुए अंत में साइबर सिटी के निकट मौलसरी एवेन्यू स्टेशन पर रैपिड मेट्रो रेल गुरुग्राम के मौजूदा नेटवर्क से जुड़ेगा।

यह मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (एमआरटीएस) परियोजना गुरुग्राम शहर के अधिकतम हिस्से को लाभान्वित करेगी। यह सुभाष चौक पर एमआरटीएस कॉरिडोर के साथ, सेक्टर 10 में बस स्टैंड के साथ, सेक्टर5 में रेलवे स्टेशन के साथ और मौलसरी एवेन्यू स्टेशन पर रैपिड मेट्रो के साथ जुड़ेगा।

         सुभाष चौक पर एमआरटीएस कॉरिडोर हुडा सिटी सेंटर में पीली लाइन के साथ जुड़ेगा और इसीलिए दिल्ली के साथ गुरुग्राम के एक बड़े हिस्से को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह हीरो होंडा चौक और सेक्टर-22 में आरआरटीएस स्टेशनों के साथ भी जुड़ेगा और सराय काले खान (एसकेके), नई दिल्ली की तरफ और दूरी तरफ शाहजहांपुर,नीमराना और बहरोड़ (एसएनबी),राजस्थान तक कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। ये लिंकेज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में परिवहन प्रणाली की दक्षता को बढ़ाएंगे।

         इस मैट्रो कोरिडोर पर वर्ष 2025, 2031और 2041 के लिए प्रतिदिन क्रमश: 5.34 लाख यात्री, 7.26 लाख यात्री और 8.81 यात्री दौरे होने का अनुमान है।

         एमआरटीएस के शुरू होने से बसों की संख्या, इंटरमीडिएट पब्लिक ट्रांसपोर्ट (आईपीटी) और निजी वाहनों के उपयोग में कमी आएगी। इसके फलस्वरूप ईंधन की खपत, वाहन परिचालन लागत और यात्रियों के यात्रा समय में कमी जैसे अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक लाभ होंगे। इसके अलावा, इसकी मदद से दुर्घटनाओं, प्रदूषण और सडक़ रखरखाव लागत में कमी आने से समाज को सामान्य रूप से अन्य लाभ भी होंगे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा सिविल सेवा नियमों में संशोधन को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की गई।

        इन नियमों में हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (वेतन) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (यात्रा भत्ता) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारियों को भत्ता) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य भविष्य निधि) नियम और हरियाणा सिविल सेवा (पेंशन) नियम शामिल हैं।

        इन सात नियमों में वेतनमान में संशोधन से संबंधित आवश्यक संशोधन के अलावा पहले से ही लिए गए नीतिगत निर्णयों को शामिल करने वाले कुछ और संशोधन भी किए गए हैं। इन नियम पुस्तिकाओं का मुद्रण हो चुका है और मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। शेष दो पुस्तकें नामत: हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारियों को भत्ता) नियम और हरियाणा सिविल सेवा (यात्रा भत्ता) नियम बाद में मुद्रित करवाई जाएंगी।

हरियाणा विधान सभा का मानसून सत्र 26 अगस्त, 2020 को बाद दोपहर दो बजे बुलाने का निर्णय लिया गया है।

         इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

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