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Bhavishya

वायरस आया ‘कब्जे’ में, अब बन सकेगी दवा!

March 14, 2020 06:23 AM

COURTESY NBT MARCH 14

वायरस आया ‘कब्जे’ में, अब बन सकेगी दवा!


• चीन के वुहान शहर में जो वायरस का स्ट्रेन है, वहीं स्ट्रेन भारत के मरीजों में भी निकला है• इससे भारत में इस वायरस की टेस्टिंग किट बनाने और दवा की खोज में काफी मदद मिलेगी• इस वायरस को आइसोलेट करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है


डॉक्टर बलराम ने कहा कि अभी इस वायरस की जांच के लिए 51 से 65 लैब्स काम कर रही हैं, जहां पर इस वायरस की जांच की जा सकती है। इस बारे में डॉक्टर निवेदिता ने बताया कि एक लैब की क्षमता रोजाना 90 सैंपल की जांच करने की है और हमारे पास ऐसी 51 लैब पहले से हैं, अब इसकी संख्या 65 हो गई है। लेकिन अभी सभी लैब को मिलाकर सिर्फ 60 से 70 सैंपल की जांच ही रोजाना जरूरत हो रही है। हमारी क्षमता पूरी है। इस बारे में एक सवाल के जवाब में डॉक्टर बलराम ने कहा कि हमारी जांच करने की अभी जितनी क्षमता है, उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा है, इसलिए प्राइवेट लैब को इसकी जांच करने की अनुमति देने की जरूरत नहीं हुई है।
‘लैब की क्षमता का पूरा इस्तेमाल अभी नहीं हो रहा है’
आईसीएमआर के डीजी डॉक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि बाहर फंसे भारतीय लोगों को देश में लाने के लिए हमारी कई टीमें जा चुकी हैं। अभी तक किसी भी हेल्थ केयर में इस वायरस की पहचान नहीं हुई है।
‘किसी भी हेल्थ केयर वर्कर को कोरोना नहीं’


डॉक्टर ललित ने कहा कि इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए हाथ साफ रखना सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि हाथ जहां-जहां पहुंचता है और उसके संपर्क में वायरस आता है और वहां से नाक या मुंह तक पहुंचता है। इसलिए हाथ की सफाई सबसे अहम हैं। साबुन और पानी सबसे अच्छा तरीका है।
‘हाथ धोने के लिए साबुन और पानी पर्याप्त है’
एम्स के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर ललित धर ने बताया कि यह वायरस एयरबोर्न नहीं है, सामान्य शब्दों में कहें कि यह हवा में नहीं फैलता है। यह केवल ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने से ही एक से दूसरे तक पहुंचता है। इसलिए ऐसे संदिग्ध मरीजों से एक मीटर की दूरी बनाए रखना चाहिए। यह हवा में नहीं फैलता है।
‘हवा से नहीं फैलता है यह वायरस’
आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव ने कहा कि निगेटिव आने पर किसी की भी दोबारा जांच की जरूरत नहीं है। हां, अगर किसी मरीज में वायरस पॉजिटिव आता है तो उसमें दोबारा जांच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभी देश में जो हालात है, वह इसे रोकने का विंडो पीरियड है। बस जरूरत है कि लोग सहयोग करें, पैनिक न करें, अगले 30 दिन अगर इसी प्रकार सहयोग और बचाव पर ध्यान देते रहें तो हम इस वायरस को यहीं पर रोक पाने में सफल हो सकते हैं।
‘निगेटिव आने पर दोबारा जांच की जरूरत नहीं है’
Rahul.Anand@timesgroup.com

• नई दिल्ली: भारत ने कोरोना वायरस (COVID-19) को आइसोलेट करने में सफलता प्राप्त कर ली है। यह एक अच्छी खबर है क्योंकि इस कदम के बाद इस वायरस की काट के लिए दवा बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही इसकी जल्दी से जल्दी जांच के लिए रैपिड टेस्टिंग किट भी बनाई जा सकती है।

कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के सैंपल से पुणे में स्थित आईसीएमआर नैशनल इंस्टीयूट ऑफ विरोलॉजी (NIV) के वैज्ञानिकों ने इस वायरस को आइसोलेट कर लिया है। आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बलराम भार्गव ने बताया कि इस वायरस को आइसोलेट करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है। चीन के वुहान शहर में जो वायरस का स्ट्रेन है, वहीं स्ट्रेन भारत के मरीजों में भी निकला है। इससे भारत में इस वायरस की टेस्टिंग किट बनाने और दवा की खोज में काफी मदद मिलेगी, अब इसकी वैक्सीन बनाने की दिशा में भी काम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई पैनिक वाली स्थित नहीं है, हमारे पास जांच के लिए पर्याप्त किट और लैब हैं, अभी देश भर में कुल 51 लैब चल रही हैं, इन सबकी जितनी क्षमता है, उससे काफी कम का ही इस्तेमाल हो रहा है। हम पूरी तरह से तैयार हैं, और हर परिस्थिति के लिए काम कर रहे हैं।

डॉक्टर भार्गव ने बताया कि इससे पहले जापान, थाइलैंड, अमेरिका और चीन में इस वायरस को आइसोलेट कर चुके हैं। इस बारे में एनआईए पुणे की साइंटिस्ट प्रिया अब्राहम ने बताया कि जयपुर में पॉजिटिव पाए गए इटली के नागरिक और आगरा के रहने वाले छह लोगों में मिले वायरस की जांच कर इस स्ट्रेन को आइसोलेट करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि हमें जो स्ट्रेन मिला है, वह वुहान वाला ही स्ट्रेन है। वुहान में मिले वायरस से 99.98 पर्सेंट मिलता

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