Friday, August 07, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
सभी विभाग प्रत्येक विकास परियोजना में आपदा की तैयारी को शामिल करें : डॉ. सुमिता मिश्राभारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे आईएएस अजय सिंह तोमर रोहतक और अंबाला को मिले नए उपायुक्त, हरियाणा सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों के किए तबादले संत रविदास जी का संदेश विकसित, समरस और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला - कृष्ण लाल पंवारराइस मिलर्स को दिया जाएगा 30 जून 2025 तक का बोनस: मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सपरिवार किए बांके बिहारी के दर्शनहरियाणा के 'कॉमनवेल्थ पदक विजेता खिलाड़ियों' को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी - खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम अब देशभर के शोधकर्ताओं को होगा जे.सी. बोस विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का लाभ
Bhavishya

हर चार आरोपी में एक का ही दोष साबित हुआ SC-ST ऐक्ट के तहत

July 30, 2018 06:10 AM

COURSTEY NBT JULY 30

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा, वर्ष 2014-16 के दिए आंकड़े
हर चार आरोपी में एक का ही दोष साबित हुआ SC-ST ऐक्ट के तहत

 

nदलितों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए 195 विशेष अदालतें बनीं थीं
•एफआईआर दर्ज करने में देरी, आरोप साबित न हो पाना और गवाहों का मुकर जाना प्रमुख वजहें

•पीटीआई, नई दिल्ली

 

अनसूचित जाति और जनजातियों (एससी-एसटी) के खिलाफ अत्याचारों और अपराधों के मामले में वर्ष 2014-16 के दौरान केवल 27 फीसदी लोगों को दोषी ठहराया गया। एफआईआर दर्ज करने में देरी, अभियोजन पक्ष के आरोप साबित करने में विफल रहने और गवाहों के मुकर जाने जैसे कारणों की वजह से ऐसा हुआ। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, एससी-एसटी के खिलाफ कथित अपराधों से निपटने के लिए देश में 195 विशेष अदालतें गठित किए जाने के बावजूद दोषी ठहराए जाने के मामले में कमी रही।

उल्लेखनीय है कि एससी-एसटी (अत्याचार निरोधक) ऐक्ट को कथित तौर पर कमजोर किए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह आंकड़ा सामने आया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि 2016 में कुल 40,718 मामले एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज किए गए, जिसमें से 30,966 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया और इसमें दोषसिद्धि की दर 25.8 फीसदी रही। इसी तरह वर्ष 2015 में इस ऐक्ट के तहत 38,510 मामले दर्ज किए गए और इन मामलों में से 26,922 में आरोपपत्र दाखिल किया गया और दोषसिद्धि की दर 27.2 फीसदी रही। हालांकि, वर्ष 2014 में 40,208 मामला दर्ज किया गया था। इसमें से से 29,248 मामलों में आरोपपत्र दायर किया गया और दोषसिद्धि की दर 28.4 फीसदी रही। 2017 का आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है।

Have something to say? Post your comment