Friday, April 10, 2026
Follow us on
BREAKING NEWS
पटवार प्रशिक्षण परीक्षा में निकिता यादव ने रचा कीर्तिमान, रेवाड़ी में प्रथम स्थान हासिलप्रदेश में 4 IAS और 13 HCS अधिकारियों के हुए तबाद,ले प्रदेश सरकार ने 17 अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किएहरियाणा में IPS अधिकारी का तबादला, मोहित हांडा को मिली नई जिम्मेदारीचंडीगढ़:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभों का वितरण करते हुएश्रमिकों के न्यूनतम पारिश्रमिक में बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी,डीसी अजय कुमार ने दी जानकारी, अनस्किल्ड, सेमी स्किल्ड और स्किल्ड श्रेणी में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरीआईडीएफसी बैंक घोटाले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा- ऊर्जा मंत्री अनिल विजहरियाणा के दो IAS अधिकारियों को किया गया सस्पेंड,आर के सिंह और प्रदीप कुमार को किया गया सस्पेंडहरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय में बड़ा फेरबदल,मुख्यमंत्री ने अपने अतिरिक्त प्रधान सचिव साकेत कुमार को हटाया और अजय कुमार को उप प्रधान सचिव बनाया,उत्तम सिंह होंगे गुरुग्राम के नए डीसी, अजय कुमार सीएम के डिप्टी प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाए गए
 
Sanskritik

तरक्की के मायने

September 20, 2013 06:06 PM

तरक्की के मायने

        भारत आर्थिक उन्नति कर रहा है,

        चमचमाती गाडि़यां, बड़े-बड़े मॉल्स,

        गगनचुम्बी इमारतें, बड़े-बड़े होटल्स तथा रिजोर्ट्स

        ये सब बयां करते हैं - तरक्की की कहानी।

        पर पूछिये एक अकुशल श्रमिक से जो

        ढो रहा ईंटें, उठा रहा तसले पर तसले,

        छोड़ कर आया अपने गांव को,

        उसके लिए आधुनिक भारत की तस्वीर कैसी है?

        उतनी ही धूसर जितनी धूसर उसकी पहनी हुई कमीज।

        पूछिये उस रिक्शा चलाने वाले से,

        सामान ढोने वाले से, जो तेज रफ्तार के वाहनों के बीच

        अपनी जान को जोखिम में डाल,

        दिन-रात एक कर रहा- क्या मायने है इस तरक्की के उसके लिए

        न उसकी आर्थिक सुरक्षा न उसकी सामाजिक सुरक्षा

        बीमार पड़ गया तो दो जून का खाना मुश्किल।

        पूछिये उस काम वाली बाई से,

        सुबह बिना कुछ खाये, करे साफ बर्तन उनके, जो खाये और अघाये हैं

        बारिश या मौसम खराब, तीज त्यौहार, उसको कोई छुटटी का हक नहीं,

        क्या मायने हैं आर्थिक स्वतन्त्रता के उसके लिए?

        उतनी ही अर्थहीन जितना अर्थहीन उन सब का जीवन,

        जो अकुशल, अनपढ़, पूंजीहीन सर्वहारा जो भी कहो-

        तरक्की के मायने केवल उनके लिए ही है, जिनके पास साधन है

        तरक्की बेकाम, बेकार, निरर्थक, अर्थहीन उनके लिए, जिनके पास साधन नहीं।

(डॉ0 क0 ‘कली’)

Have something to say? Post your comment