अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत में विश्वविद्यालय की थिंक इंडिया इकाई के सहयोग से राष्ट्रीय युवा सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 20 जनवरी 2026 को “विधिक सशक्तिकरण एवं युवा नेतृत्व: स्वामी विवेकानन्द का दृष्टिकोण” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में युवाओं के कल्याण हेतु सक्रिय रूप से कार्यरत प्रख्यात समाजसेवी एवं दूरदर्शी समाज सुधारक श्री प्रदीप जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) देविन्द्र सिंह ने की। इस अवसर पर कुलपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. ललित कुमार की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि श्री प्रदीप जी को स्मृति चिन्ह भेंट कर एवं पटका पहनाकर सम्मानित किया गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) देविन्द्र सिंह ने शिक्षा एवं नेतृत्व के क्षेत्र में स्वामी विवेकानन्द के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वामी विवेकानन्द के जीवन और आदर्शों का अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-खोज, चरित्र निर्माण और अंतर्निहित क्षमताओं के विकास की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभाओं को उजागर करने हेतु विविध शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के अवसर प्रदान करें। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को आजीवन शिक्षार्थी बने रहने, असफलता से न घबराने तथा जीवन को उसकी अवधि से नहीं बल्कि उसके सार्थक योगदान से आंकने की प्रेरणा दी।
मुख्य अतिथि श्री प्रदीप जी ने अपने मुख्य वक्तव्य में नरेन्द्र दत्त के जीवन में उनके गुरु परमहंस रामकृष्ण के मार्गदर्शन से आए परिवर्तन का उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप वे स्वामी विवेकानन्द के रूप में विश्वपटल पर प्रतिष्ठित हुए। उन्होंने वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानन्द के ऐतिहासिक संबोधन और उसके वैश्विक प्रभाव को स्मरण करते हुए विचारों की स्पष्टता एवं दृढ़ विश्वास की शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का यह दृढ़ विश्वास था कि मूल्यनिष्ठ, सजग और प्रतिबद्ध युवा भारत का रूपांतरण कर सकता है तथा सभी के लिए न्याय और समरसता सुनिश्चित कर सकता है, जो विधि के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप पंच परिवर्तन की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला, जिसमें सामाजिक समरसता, पारिवारिक जागरण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, नागरिक अनुशासन एवं स्वदेशी मूल्यों के संवर्धन पर बल दिया गया है, जिसका उद्देश्य भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना है।
कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों से उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, न्याय के मूल्यों को आत्मसात करने तथा स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के आह्वान के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. सुखविन्द्र सिंह, डॉ. पारुल, डॉ. अमित गुलेरिया, सुरक्षा सलाहकार सुधीर, कर्ण पनिहारी, रोहन मलिक, गणेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।