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पंजाब में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ा, जागरूकता और जेंडर-इंक्लूसिव नीतियां आवश्यक: सीईईडब्ल्यू रिसर्च

September 09, 2025 07:16 PM
पंजाब में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की प्रक्रिया तेजी पकड़ रही है, जिसका कारण व्यवहारिक पहलुओं पर ध्यान देना और लैंगिक समानता वाली नीतियों को लागू करना है। यह बात काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के नए स्वतंत्र अध्ययनों में सामने आई है, जिन्हें वर्ल्ड ईवी डे पर पंजाब सरकार के सहयोग से सीईईडब्ल्यू की ओर से आयोजित पंजाब कॉन्क्लेव ऑन ई-मोबिलिटी एंड सस्टेनेबल पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन में जारी किया गया है। इन अध्ययनों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को अधिक से अधिक संख्या में अपनाने के लिए जन-जागरूकता, भरोसे का निर्माण और समावेशी नीति निर्माण को महत्वपूर्ण बताया गया है। अमृतसर में इलेक्ट्रिक ऑटो (ई-ऑटो) को अपनाने में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई है, जो फरवरी 2023 में सिर्फ 30 वाहनों से बढ़कर अगस्त 2025 में 1,300 से अधिक हो गई है। स्वच्छ और एक समान आवागमन साधनों की उपलब्धता पर इस चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए, इस कॉन्क्लेव में नीति निर्माताओं, शहरी नेतृत्वकर्ताओं, विशेषज्ञों और अमृतसर के ई-ऑटो चालकों को एक मंच पर लाया गया।
 
*अपने मुख्य अभिभाषण में पंजाब सरकार के स्थानीय निकाय एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. रवजोत सिंह* ने कहा, “पंजाब के प्रमुख शहर (अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला और एसएएस नगर (मोहाली)) आर्थिक विकास के इंजन हैं, और उनका सतत विकास हमारी सोच का मुख्य हिस्सा है। डीजल ऑटो को इलेक्ट्रिक ऑटो से बदलने से न केवल प्रदूषण कम होता है, बल्कि ड्राइवरों की आय भी बढ़ती है और पिंक ई-ऑटो योजना शुरू करके 200 महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। इस गति को आगे जारी रखते हुए, हम अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला और एसएएस नगर (मोहाली) में स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाने के लिए 447 इलेक्ट्रिक बसें - आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ -  शुरू कर रहे हैं। यह सम्मेलन एक हरे-भरे, समावेशी पंजाब के लिए रणनीति को कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
 
सीईईडब्ल्यू (CEEW) के अध्ययनों से सामने आया है कि ई-ऑटो से स्पष्ट आर्थिक लाभ होने के बावजूद - ये दैनिक बचत को 30 प्रतिशत तक बढ़ाते हैं, अमृतसर में व्यवहारिक पूर्वाग्रहों ने शुरुआत में इनको अपनाने में बाधा पैदा की। अध्ययनों से पता चला है कि कर्ज चुकाते हुए भी ई-ऑटो मालिक दैनिक बचत में 18 प्रतिशत अधिक लाभ कमा सकते हैं, जबकि किराए पर लेने वाले, अगर शुरुआती लागत को पूरा कर सकें तो वे 147 प्रतिशत अधिक लाभ कमा सकते हैं। हालांकि, सब्सिडी होने के बावजूद वित्तीय जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर आंकने और ई-ऑटो की रेंज की चिंताओं के कारण इन्हें अपनाने की दर सीमित रही है। पंजाब सरकार के साथ साझेदारी में, सीईईडब्ल्यू ने सार्वजनिक मंचों पर लक्षित संदेशों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रमुख स्थानों की मैपिंग, इलेक्ट्रिक ऑटो पायलटों को सक्षम बनाने और सामुदायिक भागीदारी जैसे कदमों के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान किया है। बीते ढाई वर्षों में ई-ऑटो का 30 से बढ़कर 1,300 होना यह रेखांकित करता है कि ड्राइवरों के बीच जागरूकता और व्यवहारिक हस्तक्षेप भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने कि वित्तीय प्रोत्साहन।
 
अपने उद्घाटन भाषण में, *श्री कुलवंत सिंह, आईएएस, निदेशक, स्थानीय सरकार विभाग, पंजाब सरकार* ने कहा, "एक समृद्ध और सतत भविष्य का पंजाब का विजन यहां के सभी नागरिकों का विजन है। अमृतसर में 1,200 डीजल ऑटो को इलेक्ट्रिक ऑटो में बदलने का सफर बहुत प्रेरणादायक रहा है, जो कि लक्षित नीति और समुदायिक भागीदारी से संभव हुआ है। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए, अब हम इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत में तेजी ला रहे हैं, जिसमें अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और एसएएस नगर (मोहाली) जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इनके लिए मार्गों को व्यवस्थित करना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिकीकरण की योजना को पीएमआईडीसी द्वारा सरकार के साथ मिलकर सावधानीपूर्वक बनाया जा रहा है। चुनौतियों का सामना करने और पंजाब की स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में सटीकता, गति और जुनून हमारा मार्गदर्शन करेंगे।"
 
सीईईडब्ल्यू के अध्ययनों से सामने आया है कि महिलाओं को वाहन और कर्ज की सुविधा तक सीमित पहुंच से लेकर प्रशिक्षण व सुरक्षा के बुनियादी ढांचे की कमी जैसी व्यवस्थित बाधाओं का लगातार सामना करना पड़ रहा है,  जिनकी देश के ट्रांसपोर्ट वर्कफोर्स में सिर्फ 0.03 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 2024 तक 27 राज्यों ने ईवी से जुड़ी नीतियां जारी की, जिसमें  से केवल दो राज्यों (दिल्ली और पश्चिम बंगाल) ने स्पष्ट रूप से तिपहिया वाहन क्षेत्र में महिलाओं के ड्राइवर के रूप में काम करते से जुड़े प्रावधान किए हैं। पंजाब ने भी अमृतसर नगर निगम, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और सीईईडब्ल्यू (CEEW) के साथ साझेदारी में इस दिशा में बदवाव किया है। इसमें पुराने डीजल ऑटो की स्क्रैपिंग के अनिवार्य नियम को महिलाओं के लिए खत्म करने, लाइसेंस की सुविधा देने, 2019 में शुरू हुई रिजूवनेशन ऑफ ऑटो-रिक्शॉज इन अमृतसर थ्रू होलिस्टिक इंटरवेंशन्स (RAAHI) योजना के तहत 90 प्रतिशत से अधिक तक सब्सिडी देने और राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) के तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) गठित करने जैसे कदम शामिल हैं। इनसे मार्च 2024 के बाद से 200 महिलाओं को पिंक ई-ऑटो चलाने में सक्षम बनी हैं, जिससे उन्हें सिलाई या कारखाने में नौकरियों करने की तुलना में प्रति महीने लगभग 5,000 रुपये अधिक आय होने की जानकारी सामने आई है।
 
*डॉ. हिमानी जैन, फेलो, सीईईडब्ल्यू*, ने कहा, “पंजाब की ईवी की कहानी सततशीलता से आगे की बात है। यह लोगों के बारे में है, उनकी आकांक्षाओं, उनकी सोच, उनके अवसरों के बारे में है। सीईईडब्ल्यू के अध्ययन दिखाते हैं कि भले ही ई-ऑटो से आर्थिक लाभ की बात स्पष्ट हो, लेकिन इसे अपनाने में भरोसा, साथियों का प्रभाव और बातचीत मायने रखती है। इसी के साथ, राज्यों की अधिकतर नीतियों में महिलाओं को व्यवस्थित तरीके से अलग कर दिया जाता है। पंजाब की पिंक ई-ऑटो योजना ने यह कर दिखाया है कि सही योजना कितनी जल्दी बदलाव ला सकती है। नीतियों में व्यवहारिक समझ और महिलाओं को शामिल करके, पंजाब अपने इन प्रयोगों को विस्तार दे सकता है और भारत में ईवी कार्रवाइयों के अगले चरण का नेतृत्व कर सकता है।” 
 
इस कार्यक्रम में दो लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गई: "स्विचिंग गियर्स" जो ऑटो चालकों के अनुभव को दिखाती है, और "गुलाबी ट्रेल्स," जो अमृतसर में महिलाओं के पिंक ई-ऑटो चलाने की कहानी बताती है।
 
इस कार्यक्रम में पंजाब विकास आयोग के सदस्य श्री शोइकत रॉय के साथ चर्चा हुई। इसके अलावा, पंजाब सरकार के स्थानीय सरकार एवं परिवहन विभाग, अमृतसर नगर निगम, ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल जुसाममेनारबीट (जीआईजेड) जीएमबीएच, निकोर एसोसिएट्स, पर्पज, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बैंगलोर, द अर्बन लैब, एसजी आर्किटेक्ट्स, यूटी चंडीगढ़ परिवहन विभाग, पनबस और पंजाब म्युनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (पीएमआईडीसी) के नेतृत्वकर्ताओं के साथ पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इनमें पंजाब के ईवी पायलट प्रोजेक्ट्स को विस्तृत और समावेशी कार्यक्रमों में बदलने के लिए राज्य स्तर पर समन्वित कदमों की जरूरत पर जोर दिया गया।
 
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