हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। प्रदेश सरकार 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जन-जन का अभियान बनाकर हरियाणा को और अधिक हरा-भरा बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति से जुड़ना ही भगवान शिव से जुड़ना है। सावन के पावन माह की शुरुआत पर हर व्यक्ति "एक लोटा जल भगवान शिव के नाम और एक पौधा आने वाली पीढ़ी के नाम" का संकल्प ले।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी वीरवार को करनाल के कुटेल स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्य प्राणी मंत्री श्री राव नरबीर सिंह ने की, जबकि हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 800 स्कूली बच्चों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण कर 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया तथा सभी को 'एक पेड़ मां के नाम' की प्रतिज्ञा दिलाई। इसके उपरांत उन्होंने वन विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा 'हरियाणा फॉरेस्ट न्यूज' एवं 'धार्मिक वृक्षारोपण' पुस्तिकाओं का विमोचन किया। समारोह के दौरान मियावाकी के तहत 20 हजार पौधों का रोपण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान स्वच्छ हरियाणा, हरित हरियाणा विषय पर आयोजित क्विज व पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि सावन महीने का शुभारंभ हुआ है। भगवान शिव का संपूर्ण स्वरूप प्रकृति से जुड़ा हुआ है और उनका प्रत्येक रूप हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते हैं, उसी प्रकार बेल सहित अन्य उपयोगी वृक्षों का रोपण और संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हर घर, हर गांव, हर खेत और हर शहर को हरियाली से भरने का संकल्प लें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करता है, जबकि वृक्ष पूरी पृथ्वी के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन जीवन बचाती है, लेकिन जंगल हमें चौबीसों घंटे प्राकृतिक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और हरियाली अनेक बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे पूर्वजों ने पीपल, वट, तुलसी और नीम जैसे वृक्षों को विशेष महत्व दिया। माता अमृता देवी बिश्नोई और उनके साथियों का बलिदान आज भी हमें वृक्षों की रक्षा का संदेश देता है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब सरकार के साथ समाज भी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेकर आगे आए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान आज जन आंदोलन का रूप ले चुका है। पंचायतों और सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। दुर्लभ एवं संकटग्रस्त वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है तथा किसानों को खेतों की मेड़ों और उपलब्ध भूमि पर स्थानीय एवं उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि और वानिकी एक-दूसरे के सहयोगी हैं और वृक्ष किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और पर्यावरण की भी रक्षा करते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 1 करोड़ 40 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 44 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से सघन वन विकसित किए जाएंगे। पिछले वित्त वर्ष में प्रदेश में 1 करोड़ 52 लाख पौधे लगाए गए। प्रदेश में 58 हर्बल पार्क, 75 नमो पार्क, प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ऑक्सी वन, गांवों में पंचवटी तथा कुरुक्षेत्र के 134 तीर्थों पर पंचवटी वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं। प्रदेश के 610 वन मित्र हरियाली बढ़ाने और पौधों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं प्राण वायु देवता योजना के तहत 5,360 पुराने एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए प्रति वृक्ष 3,000 रुपये वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
*विद्यार्थी कम-से-कम एक पौधे को गोद ले*
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से स्कूली विद्यार्थियों से आह्वान किया कि प्रत्येक विद्यार्थी कम-से-कम एक पौधे को गोद ले और उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी पौधे का नाम रखें, उसके विकास का रिकॉर्ड तैयार करें और अपने जन्मदिन सहित अन्य विशेष अवसरों पर उसके संरक्षण का संकल्प दोहराएं। यदि आज का युवा एक-एक पौधे को जीवनभर संवारने का संकल्प ले ले, तो हरियाणा की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का सपना स्वतः साकार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पौधरोपण किसी एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी आजीवन जिम्मेदारी और संस्कार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। सच्चा विकास वही है, जिसमें सड़क भी हो और छायादार वृक्ष भी, उद्योग भी हों और स्वच्छ हवा भी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली से समृद्ध हरियाणा छोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
*'एक पेड़ मां के नाम' अभियान लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम कर रहा: हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण*
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि जिस परिसर में आज पौधारोपण किया जा रहा, विश्वविद्यालय रूपी इस पौधे को वर्षों पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने लगाया था। आज मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में उसी संकल्प को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आज लगाए जा रहे पौधे आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनेंगे और मेडिकल विश्वविद्यालय परिसर को हराभरा एवं स्वच्छ वातावरण प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। जिस प्रकार बड़े संस्थान किसी क्षेत्र के विकास को नई दिशा देते हैं, उसी प्रकार यह विश्वविद्यालय करनाल और पूरे हरियाणा की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्री हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में विकसित होने वाला मियावाकी वन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे परिसर में घना हरित क्षेत्र विकसित होगा, लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति से जो विरासत मिली है, उसे और समृद्ध बनाकर आने वाली पीढ़ियों को सौंपना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में हरियाणा निरंतर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि बजट में घरौंडा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 100 एकड़ में मियावाकी वन विकसित करने की घोषणा की गई है, जो भविष्य में पर्यावरण संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में स्टेडियम सहित अन्य विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
*घरौंडा विधानसभा को मिली सौग़ात*
हालाँकि यह कार्यक्रम वन विभाग का था परंतु इस दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंदर कल्याण के निवेदन पर मेडिकल यूनिवर्सिटी कैंपस के साथ लगती मुगल ड्रेन नंबर-1 के हिस्से को मज़बूत किये जाने की घोषणा की। सिंचाई विभाग द्वारा इस प्रोजेक्ट के लगभग 7.00 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। इस हिस्से के सौंदर्यीकरण का कार्य वन विभाग को दिया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा ड्रेन नंबर-1 और ड्रेन नंबर-2 के सुदृढ़ीकरण व रीमॉडलिंग के कार्य की भी घोषणा की है जिसके लिए पैसा नाबार्ड द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। सिंचाई विभाग द्वारा इसकी डीटेल व अनुमान तैयार किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने गाँव उपली में 100 एकड़ में बनने वाले डियर पार्क का भी जिक्र किया जिसकी घोषणा उन्होंने अपने बजट में की थी।
विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने जहाँ मुख्यमंत्री का आभार जताया वहीं उन्होंने कहा कि इस वन महोत्सव के दौरान मेडिकल यूनिवर्सिटी में बड़े स्तर पर होने वाले वृक्षारोपण से यह प्रांगण बहुत हरा भरा तथा ख़ूबसूरत होगा।
*पर्यावरण संरक्षण आज केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है: कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह*
पर्यावरण, वन एवं वन्य प्राणी मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण देने के लिए हर व्यक्ति को कम-से-कम दो पेड़ अवश्य लगाने चाहिए और उनकी देखभाल भी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के 13 जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का हिस्सा हैं। सर्दियों के मौसम में दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा के ये जिले भी वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से प्रभावित होते हैं। ऐसे में अधिक से अधिक पौधारोपण ही प्रदूषण से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
राव नरबीर सिंह ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में पेड़ों का विशेष महत्व है। पेड़ जीवनभर हमें छाया, ऑक्सीजन और फल-फूल देते हैं और अंत समय में भी अंतिम संस्कार के काम आते हैं। इसलिए हमें पेड़ों को केवल लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना चाहिए।
उन्होंने बदलती जीवनशैली का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2018 में एक सर्वे के अनुसार देश में लगभग 10 करोड़ शादी के कार्ड छपे थे। सोचिए, इन्हें बनाने के लिए कितने पेड़ों की कटाई हुई होगी। आज वर्ष 2026 में यह संख्या और भी बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि शादी के निमंत्रण के साथ भेजे जाने वाले भारी-भरकम गिफ्ट बॉक्स और कागज का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ डालता है। आज जब हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन है और हम अन्य शुभकामनाएं व संवेदनाएं डिजिटल माध्यम से भेज सकते हैं, तो विवाह के निमंत्रण भी डिजिटल माध्यम से भेजने की आदत विकसित करनी चाहिए। इससे बड़ी मात्रा में कागज की बचत होगी और पेड़ों की कटाई भी कम होगी।
राव नरबीर सिंह ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के स्थापित होने से इस क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण के प्रयासों और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में यह क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। जिस प्रकार वर्षों पहले गुरुग्राम में उद्योगों के आने से वहां की तस्वीर बदल गई थी, उसी प्रकार यह मेडिकल यूनिवर्सिटी भी करनाल और आसपास के क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगी तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता, विधायक श्री रामकुमार कश्यप, श्री जगमोहन आनंद, श्री योगेंद्र राणा, श्री भगवान दास कबीरपंथी, करनाल मेयर श्रीमती रेणुबाला गुप्ता, जिलाध्यक्ष प्रवीण लाठर, चेयरमैन श्री रवि सैनी, श्री यशपाल ठाकुर, सतीश गुप्ता, सुभाष चंद्र, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री केसी मीणा सहित गणमान्य मौजूद थे।