पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे अपने -अपने वर्ग के युवाओं को नशा से दूर कर लें तो पूरा समाज नशा मुक्त हो जाएगा। अगर समय रहते नहीं संभले तो नशा भावी पीढ़ी को मानसिक और शारीरिक तौर पर खोखला कर देगा।
श्री कटारिया आज यहां सेक्टर 27 स्थित जाट भवन में "आओ नशामुक्त भविष्य का मिलकर निर्माण करें " नामक राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
राज्यपाल ने जाट समाज द्वारा नशा के खिलाफ जागरूकता फ़ैलाने के लिए आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए समाज के अन्य वर्गों को भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों का प्रभाव ज्यादा पड़ता है। जिस प्रकार समाज ने दहेज़ प्रथा या अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपना अभियान चलाकर लोगों में जागृति लाने का काम किया है , उसी प्रकार नशा के खिलाफ भी सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों एवं कॉलेजों के अलावा अन्य शिक्षण संस्थानों में भी इस प्रकार के सेमिनार आयोजित करके युवाओं को देश और युवा पीढ़ी बचाने के लिए अपनी आहुति देनी चाहिए।
श्री कटारिया ने विभिन्न जेलों में नशा बेचने के आरोप में पकडे गए लोगों से किया गया संवाद सांझा करते हुए बताया कि कुछ लोग धन दौलत कमाने के चक्कर में गरीब लोगों और विशेष कर युवाओं को अपने जाल में फांसते हैं , असली दोषी इनको बरगलाने वाला है न कि नशा करने वाला। उन्होंने अभिभावकों से भी अपने बच्चों की मित्र मंडली पर नजर रखने की हिदायत दी और कहा कि किसी भी युवा पर सबसे ज्यादा प्रभाव उसके संगी -साथियों का पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशा करने वालों से नफ़रत करने की बजाए उनको प्यार से समझाएं।
भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जरनल एवं पूर्व सांसद श्री सत्यपाल जैन ने सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जो व्यक्ति नशा करते हैं वो बाहरी तौर पर बेशक स्वस्थ दिखाई देते हैं लेकिन वो अंदर से खोखले हो चुके होते हैं। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में फ़िलहाल 8 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो किसी न किसी नशा के आदी हैं। उन्होंने कहा कि नशा एक भयंकर संकट लेकर आ रहा है। उन्होंने युवाओं में तनाव , अकेलापन , संवादहीन समाज को भी नशा में फंसने का कारण बताया।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस श्री मदन लोकुर ने नशा के मामले में कई क़ानूनी पहलुओं की जानकारी दी और बताया कि दवा के रूप में कुछ ड्रग की अनुमति तो संविधान में दी गई है , लेकिन नशा के तौर पर अत्यधिक मात्रा की मनाही है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ड्रग को रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई की सराहना करते हुए देश में नेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो , जज , पुलिस समेत अन्य महत्वपूर्ण कड़ियों को नशा के परीक्षण से लेकर अन्य पहलुओं की तकनीकी जानकारी से अपडेट करने का सुझाव दिया।
जाट सभा के अध्यक्ष एवं सेमिनार आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ एम.एस मलिक ( पूर्व डीजीपी , हरियाणा पुलिस ) ने सभी अतिथियों के स्वागत करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को नशा से बचाने के लिए यह सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। इसमें अनेक विद्वान नशा फैलने के कारण , बचाव और समाज में उनके पुनर्वास पर विचार रखेंगे जो कि अच्छे भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इस अवसर पर पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ रेणु विग ,पूर्व डीजीपी डॉ. के पी सिंह, लेफ्टिनेट जरनल सुखदीप सिंह सांगवान, पूर्व डीजीपी जी.एस मलही, ईडी के पूर्व डायरेक्टर करनेल सिंह, एन सी बी जोनल यूनिट चंडीगढ़ के अतिरिक्त डायरेक्टर अमनजीत सिंह , डॉ ईश्वर सिंह , डॉ सुमन सिंह , वरिष्ठ अधिवक्ता रामकुमार मलिक , रम्मी मलिक , डॉ एच के बाली , आकाश गोयल , प्रोफेसर हरबंस, रिपन महत्ता समेत कई विषय विशेषज्ञों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
सेमिनार में सीनियर ड्रग कंट्रोलर डॉ. सारिका मालिक ,जाट सभा के उपाध्यक्ष जयपाल पुनिया , सचिव बी एस गिल, महावीर फौगाट ,जे.एस ढिल्लो , नरेश दहिया , विमल जून , डॉ सत्यव्रत धनखड़ , मनबीर सिंह सांगवान , सुरेंद्र बांगड़ , अशोक श्योकंद , सुखबीर सिंह हुडा ,श्री प्रेम सिंह , डॉ सतबीर सिंह सैनी , श्री सतीश कुमार, श्री प्रेम सिंह , डॉ सतबीर सिंह सैनी , आनंद लाठर ,श्री कपिल मल्हान समेत कार्यकारिणी के अनेक सदस्य उपस्थित थे।