स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में 3 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले परिवारों तक 'चिरायु' स्वास्थ्य योजना के लाभ का विस्तार किया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की 13 अक्टूबर, 2026 की अधिसूचना के अनुसार, चिरायु विस्तार योजना 1 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगी।
इस विस्तारित योजना के तहत, पात्र परिवार मामूली वार्षिक योगदान देकर प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का कैशलेस अस्पताल इलाज प्राप्त कर सकेंगे। इस विस्तार से मध्यम और उच्च आय वाले अधिक से अधिक परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले खर्च के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
योजना के अनुसार, 3 लाख रुपये से अधिक और 6 लाख रुपये तक की सत्यापित वार्षिक आय वाले परिवारों को प्रति वर्ष 4,000 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि 6 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार 5,000 रुपये प्रति वर्ष का योगदान देंगे। पात्र परिवार पैनलबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त (कैशलेस) इलाज पाने के हकदार होंगे। पात्रता का सत्यापन परिवार पहचान पत्र (PPP) डेटाबेस के माध्यम से किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि इस विस्तार से जेब से होने वाले मेडिकल खर्च को कम करने में मदद मिलेगी और अप्रत्याशित मेडिकल आपात स्थितियों का सामना कर रहे परिवारों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। मौजूदा आय श्रेणियों से परे कवरेज का विस्तार करके, सरकार का उद्देश्य हरियाणा के अधिक से अधिक निवासियों तक गुणवत्तापूर्ण अस्पताल देखभाल पहुंचाना है।
यह योजना आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के ढांचे का पालन करती है और इसमें माध्यमिक व तृतीयक (सेकेंडरी और टर्शरी) स्वास्थ्य देखभाल शामिल है। इसमें 2,694 उपचार पैकेज शामिल हैं, जिनके अंतर्गत सर्जिकल प्रक्रियाएं, चिकित्सा उपचार और डे-केयर प्रक्रियाएं आती हैं। लागू पैकेजों के तहत निर्दिष्ट दवाओं और नैदानिक सेवाओं (डायग्नोस्टिक सर्विसेज) का खर्च भी कवर किया गया है।
योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें पात्र परिवार के आकार या उसके सदस्यों की आयु की कोई सीमा नहीं है। सभी पूर्व-मौजूद (पहले से चली आ रही) बीमारियां भी कवर की गई हैं। इलाज की प्रक्रियाओं में अस्पताल में भर्ती होने से तीन दिन पहले तक की जाने वाली जांचें और डिस्चार्ज के बाद 15 दिनों तक होने वाले पात्र चिकित्सा खर्च भी शामिल हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि लाभार्थी राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी प्रावधान के तहत भारत में कहीं भी पैनलबद्ध अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं। लाभार्थियों की शिकायतों के निवारण के लिए जिला और राज्य दोनों स्तरों पर एक शिकायत निवारण तंत्र काम करेगा। अस्पताल में भर्ती होने के समय लाभार्थियों को अपना आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड नंबर या पीपीपी आईडी प्रदान करना होगा।
नामांकन प्रक्रिया को आसान और सुलभ बनाया गया है। पात्र परिवार आधिकारिक पोर्टल https://chirayuayushmanharyana.in/ के माध्यम से अपने वार्षिक योगदान का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी डेटाबेस एकीकरण के लिए सीआरआईडी (CRID) हरियाणा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ पात्र लाभार्थियों व सफल भुगतानों का विवरण साझा करेगी।
लाभार्थी कार्ड सरकारी अस्पतालों, कॉमन सर्विस सेंटरों , गांव स्तर के सीएससी ऑपरेटरों और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से बनाए जाएंगे। प्रत्येक कार्ड एक वर्ष के लिए वैध रहेगा, जिसकी नीति अवधि 1 नवंबर से अगले वर्ष 31 अक्टूबर तक होगी। सरकार आने वाले वर्षों के लिए भुगतान की समय सीमा निर्धारित और घोषित करेगी।
अधिसूचना में कुछ छूट/अपवाद भी निर्दिष्ट किए गए हैं। केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS), पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS), रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं या चिकित्सा उपस्थिति योजनाओं के साथ-साथ सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत कवर किए गए व्यक्ति पात्र नहीं होंगे।
हरियाणा सरकार के कर्मचारी, सेवानिवृत्त राज्य सरकार के कर्मचारी और उनके आश्रित जो सरकार से चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रीइम्बर्समेंट) या कैशलेस इलाज के हकदार हैं, वे भी इस योजना से बाहर रहेंगे। इसी तरह, अन्य राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के कर्मचारी व पेंशनभोगी तथा उनके आश्रित, यदि अपनी संबंधित सरकारों से चिकित्सा लाभ प्राप्त कर रहे हैं, तो वे भी पात्र नहीं होंगे।
70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित और संशोधित प्रावधानों के अनुसार वय वंदना योजना के तहत कवर किया जाएगा।
यह विस्तार 1.80 लाख रुपये से अधिक और 3 लाख रुपये तक की सत्यापित वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए मौजूदा चिरायु व्यवस्था को और आगे बढ़ाता है, जो प्रति परिवार प्रति वर्ष 1,500 रुपये का भुगतान करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
1 नवंबर (हरियाणा दिवस) से प्रभावी होने वाले इन नए प्रावधानों के साथ, यह विस्तार राज्य सरकार के उस प्रयास की दिशा में एक और कदम है, जिसके तहत सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाना और आबादी के एक बड़े हिस्से को अस्पताल में भर्ती होने के खर्चों से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।