पंचकूला में आज रात पुलिस और दो कथित शूटरों के बीच मुठभेड़ का मामला सामने आया है।
एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, पकड़े गए दोनों आरोपी अर्शदीप सिंह और जगराज सिंह कथित तौर पर एक कुख्यात गैंग से जुड़े हुए हैं।
पुलिस को आशंका है कि दोनों मोहाली, पंचकूला या चंडीगढ़ में किसी टारगेट को निशाना बनाने के इरादे से यहां आए थे।
हालांकि, कथित टारगेट की पहचान और हमले की योजना के बारे में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मुठभेड़ के दौरान आरोपियों ने पुलिस टीम पर पांच गोलियां चलाईं।
एफआईआर के अनुसार, एक गोली पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) की बुलेटप्रूफ जैकेट में लगी, जबकि दूसरी गोली असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) सुनील कुमार के कान के पास से गुजर गई।
पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चार गोलियां चलाईं।
इस दौरान दोनों आरोपियों के पैरों में एक-एक गोली लगी और उन्हें काबू कर लिया गया।
*पंचकूला के सेक्टर 3 स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम के पीछे हुई मुठभेड़...*
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह घटना सेक्टर-20 थाना क्षेत्र में ताऊ देवी लाल स्टेडियम के पीछे सेक्टर-3 की सड़क पर हुई।
पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में कार्रवाई कर रही थी।
इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दोनों आरोपियों की पुलिस टीम से मुठभेड़ हो गई।
एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।
दोनों के घायल होने के बाद उन्हें काबू कर लिया गया। कार्रवाई पंचकूला पुलिस ने डीसीपी क्राइम अमरिंदर सिंह की अगुवाई में की।
*अमृतसर के रहने वाले हैं दोनों आरोपी...*
पुलिस रिकॉर्ड में आरोपियों की पहचान अर्शदीप सिंह और जगराज सिंह के रूप में दर्ज है।
दोनों पंजाब के अमृतसर जिले के रहने वाले बताए गए हैं।
एफआईआर में दोनों के कथित तौर पर एक कुख्यात गैंग से जुड़े होने का उल्लेख है।
पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि क्या दोनों को ट्राइसिटी में किसी व्यक्ति पर हमला करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
कथित टारगेट कौन था, आरोपियों को किसने भेजा और उनके स्थानीय संपर्क कौन हैं—इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आ सकते हैं।
दो अवैध हथियार बरामद, कई धाराओं में केस दर्ज
एफआईआर के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो अवैध हथियार बरामद किए हैं।
मामले में आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25(6) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड, हथियारों के स्रोत, गैंग से कथित संबंधों और ट्राइसिटी में उनकी गतिविधियों की जांच कर रही है।