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Haryana

हरियाणा ने नशा तस्करी पर कसा शिकंजा

October 12, 2026 07:15 PM

हरियाणा सरकार प्रदेश में नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए विशेष साइबर जांच, ड्रग कार्टेल की वित्तीय गतिविधियों की निगरानी, दवाओं एवं रसायनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने तथा अभियोजन प्रक्रिया में तेजी लाने पर विशेष जोर दे रही है। इसके तहत वर्ष 2026-29 के लिए तैयार की जा रही मादक पदार्थ नियंत्रण की राष्ट्रीय रूपरेखा के अनुरूप प्रदेश की रणनीति को सुदृढ़ किया जा रहा है।

 

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनसीबी) की उच्चस्तरीय बैठक में इन पहलों की समीक्षा की गई।

 

गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा गत दिनों राज्यों को एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिया गया है। उनका मानना है कि जिस तरह से देश में आतंकवाद और नक्सलवाद को खत्म किया गया है, उसी तर्ज पर हमें नशे के कारोबार को खत्म करना है। इसके लिए समय-सीमा निर्धारित करके बहुआयामी रणनीति पर काम करना होगा।

 

एचएसएनसीबी के चेयरमैन संजय कुमार ने बताया कि प्रदेश में अब तक 71 ड्रग कार्टेल की पहचान की गई है तथा उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी है। डार्कनेट के माध्यम से होने वाली नशा तस्करी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देन की जांच के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में साइबर जांच की विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए एक साइबर विशेषज्ञ को भी जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध धन का पता लगाने, संगठित तस्करी नेटवर्क की पहचान करने तथा पुलिस, अभियोजन और नियामक एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

 

एडीजीपी ने बताया कि हरियाणा पुलिस ने जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,809 मामले दर्ज किए और 6,824 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में मामलों में 39.93 प्रतिशत तथा गिरफ्तारियों में 26.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी से सितंबर 2025 के दौरान 2,722 मामले दर्ज किए गए थे और 5,393 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित मामलों की संख्या 346 से बढ़कर 380 हो गई, जबकि मध्यवर्ती मात्रा से जुड़े मामले 1,887 से बढ़कर 2,844 हो गए, जो 50.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं।

 

नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 113 मामलों में 19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गईं। पिछले वर्ष की इसी अवधि में 49 मामलों में 5.92 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई थीं। इस प्रकार अटैच की गई संपत्तियों के मूल्य में 229.72 प्रतिशत और संपत्ति अटैचमेंट से संबंधित मामलों में 130.61 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

प्रदेश ने संपत्तियां अटैच करने के लिए 30 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके मुकाबले अब तक 19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 15.09 करोड़ रुपये की संपत्तियों से संबंधित प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन हैं। वर्ष 2007 से सितंबर 2026 तक 534 प्रभावित व्यक्तियों से संबंधित 318 मामलों में कुल 86.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं।

 

एचएसएनसीबी के चेयरमैन संजय कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 से सितंबर 2026 तक 167 नशा तस्करों से संबंधित 176 अनधिकृत अथवा अवैध कब्जे वाली संपत्तियों को ध्वस्त किया गया है। वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े मादक पदार्थों के मामलों में वित्तीय जांच को मजबूत करने के लिए ब्यूरो के मुख्यालय में एक विशेष वित्तीय जांच प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। इसके तहत 139 पुलिसकर्मियों को चार विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है। ब्यूरो चिह्नित ड्रग कार्टेल से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर वित्तीय जांच कर रहा है, ताकि अवैध आय के स्रोतों और उनके वित्तीय नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

 

उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों की बरामदगी के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान हेरोइन की बरामदगी पिछले वर्ष की इसी अवधि के 43.176 किलोग्राम से बढ़कर 84.695 किलोग्राम हो गई, जो 96.16 प्रतिशत की वृद्धि है। अफीम की बरामदगी 235.550 किलोग्राम से बढ़कर 430.326 किलोग्राम हो गई, जबकि कोकीन की बरामदगी 1,004.76 ग्राम से बढ़कर 2,958.757 ग्राम तक पहुंच गई। इसी प्रकार एमडी और एमडीएमए की बरामदगी 525.036 ग्राम से बढ़कर 1,761.55 ग्राम हो गई।

 

बैठक में प्रेगाबालिन, जोपिक्लोन और टैपेंटाडोल जैसी औषधियों के अवैध इस्तेमाल तथा उनके नशे के उद्देश्य से दुरुपयोग को उभरती चुनौती बताया गया। इन दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक नीतिगत एवं नियामकीय उपाय करने तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई।

 

सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल हो सकने वाले प्रीकर्सर रसायनों की निगरानी को भी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। बैठक में बताया गया कि पंजीकृत फर्मों का विवरण सत्यापन के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग के साथ साझा किया गया है। अवैध रूप से संचालित सिंथेटिक ड्रग निर्माण प्रयोगशालाओं की पहचान करने के लिए पुलिस की अग्रिम पंक्ति को भी सतर्क किया जा रहा है। थाना प्रभारियों, पुलिस चैकी प्रभारियों और गश्ती कर्मचारियों को ऐसी गतिविधियों के संकेतों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जारी चेतावनी संकेतों की सूची प्रदेश के पुलिस थानों और पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों में प्रदर्शित की गई है।

 

बैठक में नशा तस्करी के मामलों में अभियोजन और दोषसिद्धि की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि दर वर्ष 2023 में 48.81 प्रतिशत, वर्ष 2024 में 54.67 प्रतिशत और वर्ष 2025 में 54.68 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान यह बढ़कर 58.34 प्रतिशत हो गई। चालू वर्ष में मध्यवर्ती मात्रा से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि दर 69.89 प्रतिशत और वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े मामलों में 62.09 प्रतिशत रही।

 

प्रदेश में 21 फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त सिरसा, फतेहाबाद, अंबाला, हिसार, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र और पानीपत में एनडीपीएस मामलों के लिए आठ समर्पित फास्ट ट्रैक अथवा विशेष न्यायालय कार्यरत हैं। नशा तस्करी के मामलों का अधिक बोझ झेल रहे जिलों में अतिरिक्त फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

 

महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन को प्रभावी बनाने के लिए अभियोजन निदेशालय के समन्वय से 50 एनडीपीएस मामलों को विशेष निगरानी के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से एक मामले में 14 वर्ष के कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा हुई है।

 

बैठक में नशा तस्करी के मामलों में वांछित फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि 29 फरार आरोपियों की पहचान की गई है। इनके संबंध में दो ब्लू नोटिस और एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है तथा संबंधित जानकारी नई दिल्ली स्थित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ साझा की गई है। जिला प्रशासन को कानून के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक मामलों में लुकआउट सर्कुलर जारी करने और पासपोर्ट निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

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