हरियाणा ने टीबी के खिलाफ लड़ाई में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाई है। राज्य ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के प्रमुख लक्ष्यों को पार करते हुए व्यापक जांच अभियान के माध्यम से 5.84 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की, 34,825 नए टीबी मरीजों की पहचान की तथा टीबी मामलों की कुल अधिसूचना (नोटिफिकेशन) के मामले में भी राष्ट्रीय लक्ष्य को पार कर लिया।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इस गति को बनाए रखने के साथ-साथ टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) तथा समुदाय आधारित स्क्रीनिंग को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए, ताकि टीबी मुक्त हरियाणा के लक्ष्य को जल्द प्राप्त किया जा सके।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रदेश में 52,500 के लक्ष्य के मुकाबले 54,368 टीबी मामलों की अधिसूचना दर्ज की गई, जो निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत है। यह सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से संभव हो पाया है। सरकारी क्षेत्र ने अपने लक्ष्य का 101 प्रतिशत, जबकि निजी क्षेत्र ने 105 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. आर.एस. ढिल्लों ने बताया कि हरियाणा ने संभावित टीबी रोगियों की जांच के लक्ष्य को भी पार कर लिया है। राज्य में 5.25 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 5,81,371 लोगों की जांच की गई, जिससे हजारों मरीजों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित हुआ।
उन्होंने बताया कि 24 मार्च से शुरू किया गया 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान राज्य की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने 4,711 स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए, जिनमें 2,814 शिविर उच्च जोखिम वाले गांवों में लगाए गए। इन शिविरों के माध्यम से जांच सुविधाएं सीधे संवेदनशील आबादी तक पहुंचाई गईं। अभियान के दौरान 2.87 लाख छाती के एक्स-रे तथा 1.70 लाख आणविक (मॉलिक्यूलर) एनएएटी परीक्षण किए गए, जिससे शीघ्र एवं सटीक जांच की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
बैठक में उपचार परिणामों की भी समीक्षा की गई। प्रदेश में 91 प्रतिशत उपचार सफलता दर दर्ज की गई, जो 90 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक से अधिक है। अधिसूचित टीबी मरीजों में से लगभग 97 प्रतिशत की एचआईवी जांच तथा 94 प्रतिशत की मधुमेह (डायबिटीज) जांच की गई, जिससे मरीजों का समग्र उपचार प्रबंधन सुनिश्चित किया गया।
राज्य टीबी अधिकारी डॉ. राजेश राजू ने बताया कि अब तक 24,813 टीबी मरीजों के पारिवारिक संपर्कों को टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) प्रदान किया जा चुका है। इसके अलावा निक्षय मित्र पहल के तहत 27,214 मरीजों को पोषण सहायता किट उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे पोषण सहायता और मरीजों द्वारा उपचार का नियमित पालन सुनिश्चित करने में मदद मिली।
उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन अभियान में तकनीक की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अभियान के दौरान शुरू किए गए टीबी मुक्त भारत ऐप और खुशी चैटबॉट पर अब तक 39,369 उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 23,016 स्वयंसेवक, 2,083 निक्षय मित्र तथा 9,164 टीबी मरीज शामिल हैं। इससे मरीजों की निगरानी और सामुदायिक सहभागिता के लिए मजबूत डिजिटल नेटवर्क तैयार हुआ है।
राज्य में जांच अवसंरचना भी काफी मजबूत हुई है। प्रदेश में वर्तमान में 22 जिला टीबी केंद्र, 168 टीबी यूनिट और 452 नामित माइक्रोस्कोपी केंद्र कार्यरत हैं। इनके अलावा 46 सीबीएनएएटी मशीनें तथा 248 ट्रूनैट मॉलिक्यूलर
जांच प्रणालियां उपलब्ध हैं। इनमें 150 मशीनें बीपीसीएल फाउंडेशन की सीएसआर पहल के तहत प्राप्त हुई हैं। दवा-प्रतिरोधी टीबी की उन्नत जांच की सुविधा पीजीआईएमएस रोहतक और आईआरएल करनाल की विशेष प्रयोगशालाओं में उपलब्ध है।
बैठक में बताया गया कि एनएएटी परीक्षण कवरेज मार्च में 42 प्रतिशत से बढ़कर 2 अगस्त तक 69 प्रतिशत हो गई है। राज्य के चार जिले 80 प्रतिशत के स्तर को भी पार कर चुके हैं, जो मॉलिक्यूलर जांच में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।
सामुदायिक स्तर पर जांच को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने हरियाणा के लिए 200 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें स्वीकृत की हैं। इनमें से 36 मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि शेष मशीनों को चरणबद्ध तरीके से लगाया जाएगा। साथ ही, सभी 22 जिलों में रेडियोग्राफरों की तैनाती की जा रही है, ताकि चल रहे 60 दिवसीय विशेष अभियान के दौरान पोर्टेबल एक्स-रे तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र पारिवारिक संपर्कों को शत-प्रतिशत टीबी निवारक उपचार उपलब्ध कराया जाए तथा उपलब्ध जांच अवसंरचना का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निक्षय पोषण योजना के तहत लाभों का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि व्यापक स्क्रीनिंग, आधुनिक जांच तकनीक, डिजिटल नवाचार, पोषण सहायता और जनभागीदारी पर आधारित रणनीति ने प्रदेश को राष्ट्रीय लक्ष्यों से आगे पहुंचाया है तथा टीबी मुक्त हरियाणा के अभियान को नई गति प्रदान की है।