हरियाणा सरकार ने यमुना नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक व्यापक एवं बहुआयामी कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश में प्रतिदिन 580 मिलियन लीटर (एमएलडी) अतिरिक्त सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन क्षमता विकसित की जाएगी। इसके साथ ही प्रतिदिन 1,455 टन जैविक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 9 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यमुना में गिरने वाले प्रदूषकों को कम करना, जल गुणवत्ता में सुधार लाना तथा नदी के पारिस्थितिक तंत्र को सुदृढ़ बनाना है।
इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने यमुना प्रदूषण नियंत्रण उपायों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में की। उन्होंने सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को निर्देश दिए कि चल रही परियोजनाओं में तेजी लाई जाए, लंबित बाधाओं का शीघ्र समाधान किया जाए तथा सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि प्रस्तावित आधारभूत संरचना के अंतर्गत 423.5 एमएलडी क्षमता वाले 10 सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 828.88 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अतिरिक्त औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए 156.5 एमएलडी क्षमता वाले 9 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 30 एमएलडी क्षमता के दो सीईटीपी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
बैठक में बताया गया कि दो सीवेज शोधन संयंत्र लगभग पूर्ण होने की स्थिति में हैं। पानीपत के मतलौडा में 3 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा इसे 31 जुलाई, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं गुरुग्राम के बजघेड़ा में 2 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 31 अगस्त, 2026 तक चालू करने की योजना है।
मुख्य सचिव ने 423.5 एमएलडी क्षमता वाले प्रस्तावित एसटीपी कार्यक्रम की भी विस्तृत समीक्षा की। इसके अंतर्गत गुरुग्राम के धनवापुर, बेहरामपुर, नौरंगपुर और सेक्टर-107, फरीदाबाद के मिर्जापुर और सूरजकुंड, सोनीपत, कुंडली तथा पानीपत के समालखा में नई परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं, कई मामलों में वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं तथा कार्यों के निष्पादन के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी गई है। शेष परियोजनाएं विभिन्न स्वीकृति चरणों में हैं।
बैठक में औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित 9 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की भी समीक्षा की गई। इनमें फरीदाबाद के प्रतापगढ़ और मिर्जापुर, गुरुग्राम के बादशाहपुर तथा सेक्टर-18, 34 और 37, सोनीपत के कुंडली, पानीपत के सेक्टर-29 तथा कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में सीईटीपी स्थापित किए जाएंगे।
अधिकारियों ने मुख्य सचिव को भूमि अधिग्रहण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), निविदा प्रक्रिया तथा आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों की प्रगति की जानकारी दी।
बैठक में बताया गया कि सोनीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल, रोहतक और यमुनानगर में 9 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल प्रसंस्करण क्षमता 1,455 टन प्रतिदिन (टीपीडी) होगी।
इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन पंचायती राज विभाग, हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (हरेडा), गेल तथा बीपीसीएल द्वारा किया जा रहा है। इनका उद्देश्य जैविक अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का उत्पादन करना है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि यमुना नदी का पुनर्जीवन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को बेहतर आपसी समन्वय के साथ कार्य करने, परियोजनाओं की नियमित एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने तथा सभी स्वीकृत एवं प्रस्तावित परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से हरियाणा की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, यमुना में प्रदूषित जल का प्रवाह कम होगा तथा नदी के पर्यावरणीय स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
बैठक में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग अग्रवाल, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री अशोक कुमार मीणा, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री सुशील सारवान तथा विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।