स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि झज्जर और चरखी दादरी के पीसी एंड पीएनडीटी अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने बिहार के गया जिले में चल रहे एक अंतरराज्यीय लिंग निर्धारण रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में हरियाणा के दो एजेंटों, एक अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक और सोनोलॉजिस्ट बताने वाले एक व्यक्ति सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि सभी चारों आरोपियों के खिलाफ पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
डॉ. मिश्रा ने जानकारी दी कि झज्जर और चरखी दादरी के जिला सक्षम प्राधिकारियों को पिछले सप्ताह जानकारी मिली थी कि झज्जर जिले के छुछकवास गांव के रहने वाले सुरेंद्र और राकेश यादव, झज्जर, दादरी और आसपास के इलाकों से गर्भवती महिलाओं को पैसों के बदले अवैध भ्रूण लिंग निर्धारण के लिए बिहार ले जा रहे थे।
इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए जिला सक्षम प्राधिकारी (झज्जर) ने एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम में झज्जर से नोडल अधिकारी (पीसी एंड पीएनडीटी) डॉ. संदीप कुमार, डॉ. बसंत कुमार दुबे और विनोद कुमार, तथा चरखी दादरी से डॉ. उदयभान और डॉ. संदीप शामिल थे।
एक डिकॉय (फर्जी ग्राहक) ऑपरेशन के तहत एक गर्भवती महिला को फर्जी ग्राहक बनाकर भेजा गया, जिसके साथ उसका पति बनने का नाटक करने वाला एक व्यक्ति भी था। आरोपियों ने कथित तौर पर 50,000 रुपये में अवैध लिंग निर्धारण जांच करने की बात स्वीकार की और 19 जून की रात को डिकॉय ग्राहक को छुछकवास बुलाया। इसके बाद महिला को बिहार के गया जिले के टिकारी कस्बे में ले जाया गया, जबकि संयुक्त पीएनडीटी टीमें सुरक्षित दूरी से उस वाहन का पीछा कर रही थीं।
स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि टिकारी पहुंचने पर आरोपी महिला को 'शिव शक्ति अल्ट्रासाउंड सेंटर' ले गए, जो कथित तौर पर अवैध रूप से चलाया जा रहा था। वहां केंद्र संचालक रामाश्रय प्रसाद और खुद को सोनोलॉजिस्ट बताने वाले गुलशन कुमार ने अल्ट्रासाउंड जांच की और बताया कि गर्भ में लड़का है।
डिकॉय महिला के साथी से संकेत मिलते ही गया के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत गया जिला पीएनडीटी इकाई के अधिकारियों की मदद से संयुक्त पीएनडीटी टीमों ने केंद्र पर छापा मार दिया। छापे के दौरान टीमों ने रामाश्रय प्रसाद, गुलशन कुमार, सुरेंद्र और राकेश यादव को पकड़ लिया और परिसर से एक अवैध अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त की। इसके बाद चारों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए गया जिले के टिकारी थाने को सौंप दिया गया, जहां प्रासंगिक पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम, बीएनएस और एनएमसी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
प्रवक्ता ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी सिविल सर्जन कार्यालय या जिला पीएनडीटी अधिकारियों को दें। उन्होंने कहा कि प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण करना और करवाना, दोनों ही दंडनीय अपराध हैं, जिनमें तीन से पांच साल तक की कैद की सजा हो सकती है। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ विश्वसनीय जानकारी देने वाले मुखबिरों को 1 लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा और उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।