धान फसल की सरकारी खरीद पर सहकारी विपणन समितियों को मिलने वाले कमीशन के मुद्दे को लेकर सरकार एवं HAFED प्रबंधन के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है। इसके बावजूद यदि समितियों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश की सहकारी विपणन समितियां एक बार फिर आंदोलन की राह पर जाने को मजबूर हो सकती हैं।
यह जानकारी देते हुए हनुमान गोदारा, प्रदेश अध्यक्ष (पैक्स प्रकोष्ठ), सहकार भारती हरियाणा ने बताया कि धान खरीद पर पहले समितियों को MSP का 0.25 प्रतिशत कमीशन, लगभग ₹5.97 प्रति क्विंटल, मिलता था, जिसे सितंबर 2025 में घटाकर मात्र ₹1.33 प्रति क्विंटल कर दिया गया। इससे समितियों की आय पर गंभीर असर पड़ा है।
गोदारा ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 25 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई तथा इसके बाद HAFED प्रबंधन के साथ भी वार्ता की गई। 26 अगस्त को HAFED के Board of Administrators की बैठक के दौरान भी प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर चर्चा की गई और सकारात्मक समाधान का भरोसा दिया गया।
उन्होंने कहा कि सहकारी विपणन समितियां सरकार से टकराव नहीं चाहतीं, बल्कि न्यायसंगत कमीशन और स्पष्ट नीति चाहती हैं। समितियां किसानों की सरकारी खरीद व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और मंडी स्तर पर खरीद, रिकॉर्ड, स्टॉक तथा अन्य operational कार्यों की जिम्मेदारी निभाती हैं।
गोदारा ने स्पष्ट किया कि यदि धान खरीद सीजन शुरू होने से पहले कमीशन की पुरानी दर बहाल करने तथा गेहूं खरीद के कमीशन में बढ़ोतरी के संबंध में ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो सहकारी विपणन समितियां अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगी।
उन्होंने कहा—
“हम अपना अधिकार मांगते हैं, किसी से भीख नहीं मांगते। सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना प्रदेश में सहकारिता को मजबूत करना संभव नहीं है।”