हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि चंडीगढ़ लंबे समय से खेल उत्कृष्टता का केंद्र रहा है और इसने देश को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आज यहां उपस्थित युवा खिलाड़ियों में ही भविष्य के वे चैंपियन हैं, जो भारत की गौरवशाली हॉकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे तथा देश और क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।
राज्यपाल आज चंडीगढ़ के सेक्टर-42 स्थित हॉकी स्टेडियम में ‘हॉकी चंडीगढ़’ द्वारा आयोजित ‘ओलंपिक दिवस’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर फर्स्ट लेडी श्रीमती मित्रा घोष भी उपस्थित थीं।
प्रो. असीम कुमार घोष ने युवा खिलाड़ियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे पूरे जोश, समर्पण और अनुशासन के साथ खेलें, निरंतर मेहनत कर उत्कृष्टता हासिल करें तथा खेल भावना के उच्चतम मूल्यों को आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और उपलब्धियों के माध्यम से न केवल अपने परिवार, बल्कि अपने शहर, प्रदेश और देश का भी गौरव बढ़ाएं।
खेल को जीवन का महान शिक्षक बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी मैदान पर उतरता है—चाहे वह हॉकी का मैदान हो, एथलेटिक्स ट्रैक हो या बॉक्सिंग रिंग—तो वह ऐसे जीवन-मूल्य सीखता है, जिन्हें कोई कक्षा पूरी तरह नहीं सिखा सकती। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन सिखाता है, ऐसा अनुशासन जो खिलाडी को सूर्योदय से पहले उठने के लिए प्रेरित करता है। यह संघर्षों का सामना करने का साहस देता है और हर बार गिरकर दोबारा उठ खड़े होने की शक्ति प्रदान करता है। खेल जीत में विनम्रता और हार में धैर्य बनाए रखना सिखाता है। ये ऐसे जीवन-मूल्य हैं, जो जीवन भर आपका मार्गदर्शन करते हैं।
हॉकी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि यह खेल देश के हृदय में एक विशेष स्थान रखता है। भारत का राष्ट्रीय खेल होने के साथ-साथ एक सदी से अधिक समय से देशवासियों के उत्साह और जुनून का प्रतीक रहा है। हॉकी ने देश को अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां और अविस्मरणीय क्षण दिए हैं, जो आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय हॉकी का हालिया प्रदर्शन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि समर्पण, अनुशासन और टीम भावना के बल पर बड़ी से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे ऐसे युग में जी रहे हैं, जहां अवसरों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा भी अत्यंत तीव्र है। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक ही नहीं देता, बल्कि खिलाडी के व्यक्तित्व और चरित्र का भी निर्माण करता है। यह लक्ष्य निर्धारित करना, उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना, टीम भावना के साथ कार्य करना, प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना और निरंतर स्वयं को बेहतर बनाते रहना सिखाता है।
इससे पूर्व, राज्यपाल ने प्रतिभागी टीमों से परिचय प्राप्त किया और हॉकी मैच का अवलोकन किया। उन्होंने विजेता एवं प्रतिभागी टीमों को पुरस्कार भी वितरित किए।
इस मौके पर हॉकी चंडीगढ़ के मुख्य संरक्षक डॉ. चंद्र शेखर, राज्यपाल के परिसहाय स्क्वाड्रन लीडर पी. भरत, हॉकी चंडीगढ़ के अध्यक्ष श्री करण गिलहोत्रा, हॉकी चंडीगढ़ के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पुष्पिंदरजीत सिंह, हॉकी चंडीगढ़ के वाइस प्रेसिडेंट श्री अनिल वोहरा और अन्य गणमान्य भी मौजूद रहे।