गुस्ताखी माफ हरियाणा - पवन कुमार बंसल । करीब तीन दशक पहले, जब वह हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव बनने से बहुत दूर थीं, सुमिता मिश्रा ने एक ऐसा साहसिक ऑपरेशन अंजाम दिया था जो किसी मुंबई थ्रिलर की कहानी को टक्कर दे सकता है।
उस समय वह कुरुक्षेत्र में एडीसी के पद पर तैनात थीं। उन्हें क्षेत्र में नकली घी बनाने वाले एक गिरोह की सूचना मिली। चुनौती यह थी कि आरोपियों को रंगे हाथों पुख्ता सबूतों के साथ पकड़ा जाए।
युवा, ऊर्जावान और दृढ़ निश्चयी मिश्रा ने एक अनोखी योजना बनाई। उन्होंने खुद को एक ग्राहक के रूप में पेश किया और एक स्थानीय डेयरी मालिक से अपनी बहन की शादी के लिए कई क्विंटल घी का ऑर्डर दिया। ऑर्डर तुरंत स्वीकार कर लिया गया।
इसके बाद शुरू हुआ एक बेहद सुनियोजित ऑपरेशन । जैसे ही डिलीवरी की तैयारी हो रही थी, मिश्रा ने छापे की पूरी व्यवस्था कर ली। सही समय पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
इस ऑपरेशन ने देश की पहली बड़ी नकली घी निर्माण इकाई का पर्दाफाश किया। सूझबूझ, रणनीति और साहस से भरी इस घटना ने जल्द ही व्यापक सुर्खियां बटोरीं। इसकी चर्चा न केवल देशभर में हुई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इसे प्रमुखता मिली, जिससे मिश्रा को उनकी निर्णायक कार्रवाई के लिए खास पहचान मिली।
नाटक और दृढ़ संकल्प से भरपूर यह घटना आज भी हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में याद की जाती है।