हरियाणा के राज्यपाल और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पीएच.डी, यूजी, पीजी की डिग्री हासिल करने के बाद अब युवा पीढ़ी अपने अगले लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ेगी। यह युवा पीढ़ी नवाचार, उद्यमिता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करके भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका अदा करेगी। इस देश की युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र को एक राष्ट्रीय मिशन समझकर आगे बढ़ना होगा।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में 35वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पहले राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के अनुमोदन पर सर्वोच्च न्यायालय, भारत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को विश्वविद्यालय की तरफ से डॉक्टर ऑफ लॉ की मानद उपाधि देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में अलग-अलग विषयों में पीएचडी के 112 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की और 89 विद्यार्थियों को अपनी-अपनी कक्षाओं में टॉप करने पर गोल्ड मेडल और प्रमाण देकर सम्मानित किया। इस दीक्षांत समारोह में पीएचडी सहित पीजी और यूजी के करीब 3000 विद्यार्थियों को डिग्री देकर सम्मानित किया गया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की तरफ से राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता, न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी, न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश भारद्वाज, न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलका सरीन को सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। आज का दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा की यात्रा का समापन नहीं बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। राज्यपाल ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित विकसित भारत 2047 का लक्ष्य एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसके वास्तविक शिल्पकार देश के युवा हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक नौकरी तक सीमित न रहने और नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाले बनने की प्रेरणा दी।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को डॉक्टर ऑफ लॉ (मानद) उपाधि प्रदान किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके विधि और न्याय क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान की पहचान है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताया कि न्यायमूर्ति बिंदल इसी संस्थान के पूर्व छात्र भी हैं। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। विश्वविद्यालय को नैक से ए ग्रेड प्राप्त हुआ है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्लैटिनम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने शोध, पेटेंट, नए शैक्षणिक कार्यक्रमों और इंडस्ट्री 4.0 से जुड़े आधुनिक विषयों में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि भगवद्गीता के उस संदेश की याद दिलाती है कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के साथ-साथ मूल्यों को भी जीवन में अपनाने की अपील की।