हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में धान खरीद के 5000 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो वह सदन के पटल पर रखे।
मुख्यमंत्री ने विधायक श्री अशोक अरोड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 5000 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा पूरी तरह तथ्यहीन है। धान की खरीद भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकृत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है और इसकी निगरानी सुदृढ़ तंत्र से सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के समय तो सब जानते हैं कि कितने बड़े—बड़े घोटाले होते थे। इनके समय में व्यवस्था सही नहीं थी, जिससे किसानों को नुकसान होता था। जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है, जिससे किसानों को भी अपनी आय का पता लगने लगा है। पहले तो किसानों को यही पता नहीं होता था कि उसकी आय कितनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने धान खरीद प्रणाली में व्यापक सुधार किए हैं। खेत स्तर से गेट पास की डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय किसानों को भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, कई बार एक-एक वर्ष तक राशि लंबित रहती थी, जबकि आज किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है और उन्हें अपनी आय की स्पष्ट जानकारी मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर फर्जी पर्ची, डुप्लीकेट प्रविष्टि या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आई है तो सरकार ने उसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा कि इनके समय में जो फर्जीवाड़ा हुआ, उस पर तो कोई कार्रवाई की होगी, वही सदन को बताएं। उन्होंने कहा कि आज चिंता किसानों को नहीं हो रही है, बल्कि कांग्रेस को हो रही है। विपक्ष केवल आरोप लगाने के बजाय रचनात्मक सुझाव दें। सरकार हर सकारात्मक सुझाव पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह विषय महत्वपूर्ण है और सभी को मिलकर व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है। जहां-जहां शिकायतें प्राप्त हुई हैं, वहां जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष के समय में तो फर्जीवाड़े होते रहते थे, कोई पकड़ में नहीं आता था
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाती है और इस प्रक्रिया की निगरानी बहु-स्तरीय तंत्र के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। सालों-साल यही व्यवस्था चलती रही है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसमें बदलाव किया है। मंडी में धान की आवक से लेकर राइस मिलर्स से चावल की वापसी तक हर कदम पर चेक लगाया है। इस बदलाव को विपक्ष देखना ही नहीं चाहते। इनके समय में तो फर्जीवाड़े होते रहते थे, कोई पकड़ में नहीं आता था। लेकिन, वर्तमान राज्य सरकार ने नई व्यवस्था में कोई भी फर्जीवाड़ा होता है तो पकड़ में आ जाता है। उस पर कड़ी कार्रवाई भी होती है। सरकार सिस्टम में लगातार सुधार जारी रखे हुए हैं और इसे चाक-चौबंद बनाकर रहेंगे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसान अपने खेत में धान लगाता है तो उसका पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करता है। इसका सत्यापन करवाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि कितने क्षेत्र में धान लगाया है और उपज का भी सही आकलन किया जाता है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि पोर्टल पर सत्यापन की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। गत खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान राज्य की खरीद संस्थाओं द्वारा 3 लाख 1 हजार किसानों से 62 लाख 13 हजार मीट्रिक टन नान-बासमती धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। गत सीजन में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के अनुसार, धान (गैर-बासमती) के लिए कुल 30 लाख 17 हजार 968 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया। राज्य में अनुमानित उत्पादन 97 लाख 86 हजार मीट्रिक टन आंका गया। खरीद नीति पूरी तरह डेटा-आधारित है। मंडियों में जितनी फसल आई, उसी का वजन, सफाई और तुलाई के बाद वास्तविक खरीद दर्ज की गई।
धान खरीद में अनियमितताओं पर सख्ती, 12 एफआईआर दर्ज, 6.37 करोड़ की रिकवरी की
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन गेट पास और बैंक खातों में सीधा भुगतान जैसे प्रावधान लागू किए गए। कुछ मंडियों में अनियमितताओं की शिकायतें भी प्राप्त हुईं। इन मामलों में गंभीरता से जांच की है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर एवं नवंबर 2025 के दौरान सभी जिलों में संयुक्त कमेटियां गठित कर राइस मिलों में भंडारित धान की भौतिक जांच करवाई है। जहां-जहां प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई गई, वहां संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों, आढ़तियों एवं राइस मिलरों के विरुद्ध कुल 12 एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई हैं। इन मामलों की जांच निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ की जा रही है तथा संलिप्त व्यक्तियों की गिरफ्तारियां भी की गई हैं। इसके अतिरिक्त खाद्य आपूर्ति विभाग, खरीद एजेंसियों एवं मार्केटिंग बोर्ड द्वारा 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच आरंभ की गई है। इनमें से 28 को निलंबित किया जा चुका है। इनके अलावा, राइस मिलरों से 6 करोड़ 37 लाख रुपये की राशि की रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा करवाई जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करती है। संदिग्ध धान के उठान से जुड़े श्रम, ढुलाई एवं परिवहन ठेकेदारों की अदायगी पर भी रोक लगा दी गई है और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सरकार के आंकड़े वास्तविक स्थिति पर आधारित, किसी प्रकार की कृत्रिम वृद्धि या हेराफेरी नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ सदस्यों द्वारा फसल आवक और खरीद के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा उठाया गया है। किसी भी मंडी में आवक का आंकड़ा अनुमानित होता है, जबकि खरीद का आंकड़ा तुलाई के बाद वास्तविक वजन के आधार पर दर्ज होता है। उदाहरण के तौर पर, जिला अंबाला, फतेहाबाद, कैथल, करनाल और सिरसा में आवक एवं खरीद के आंकड़ों में कोई असामान्य अंतर नहीं पाया गया है। 30 से 50 प्रतिशत अंतर होने का आरोप निराधार एवं तथ्यहीन है। जिला महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी में खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान धान की आवक एवं खरीद शून्य रही। यह दर्शाता है कि सरकार के आंकड़े वास्तविक स्थिति पर आधारित हैं और किसी प्रकार की कृत्रिम वृद्धि या हेराफेरी नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा 10 प्रतिशत टूटे चावल की अनुमति के साथ सी.एम.आर. के लिए राज्य को 8 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था। यह लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है और भारतीय खाद्य निगम को समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिसंबर, 2025 के सत्र में भी ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से यह विषय उठाया गया था। सरकार ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच और सुधारात्मक कदम उठाए। डबल इंजन सरकार प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सक्रिय शासन में विश्वास करती है।
ई-खरीद पोर्टल किया जा रहा अपग्रेड, जियो-टैगिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी से पारदर्शिता होगी सुनिश्चित
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ई-खरीद पोर्टल को अपग्रेड किया जा रहा है। आगामी रबी एवं खरीफ सीजन 2026-27 में जियो-टैगिंग आधारित गेट पास, वाहनों का ऑटोमैटिक नंबर प्लेट कैप्चर, मंडियों, गोदामों और राइस मिलों की जियो-फेंसिंग, प्रवेश एवं निकास द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही, किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन, तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से भौतिक जांच जैसे प्रावधान भी लागू किए जाएंगे। भौतिक जांच अब पूरी तरह जियो-फेंसिंग के अंतर्गत होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नियुक्त कर्मचारी स्थल पर पहुंचकर ही निरीक्षण करें। इससे किसी भी प्रकार की कागजी खानापूर्ति की संभावना समाप्त हो जाएगी। हमने 11 दिसंबर, 2025 को प्रति एकड़ उपज सीमा में संशोधन भी किया है। ताकि, वास्तविक उत्पादन और खरीद के आंकड़ों में सामंजस्य स्थापित हो सके।
उन्होंने कहा कि बाजरा किसानों के हित में भी सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत 575 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को लाभ देने का निर्णय लिया गया। लगभग 1 लाख 57 हजार किसानों से 6 लाख 23 हजार मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की गई और 358 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित की जा रही है।
हरियाणा की पहल से खाद सब्सिडी में 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की हुई बचत
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को खाद की बिक्री हेतु आईएफएमएस पोर्टल के साथ जोड़ा है। इससे डी.ए.पी. का उद्योगों में और यूरिया का प्रदेश से बाहर होने वाली बिक्री पर रोक लगी है। इससे पिछले 5 महीने से भी कम समय में देश की खाद सब्सिडी में 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत हुई है। यह सिर्फ और सिर्फ़ एम.एफ़.एम.बी. पोर्टल के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अन्य सभी प्रदेशों से आग्रह कर रही है कि वे भी इस प्रकार की प्रणाली अपनाएं, ताकि उर्वरक सब्सिडी का लाभ सिर्फ पात्र किसानों को ही मिले। हरियाणा के अलावा अभी तक कोई और प्रदेश इस प्रकार की व्यवस्था लागू नहीं कर पाया है।
उन्होंने कहा कि एम.एफ़.एम.बी. और ई-ख़रीद के माध्यम से गत 12 सीजन में हमने फसल खरीद की 1 लाख 64 हजार करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डाली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है—किसान का हक किसी भी सूरत में मारा नहीं जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद या स्तर पर क्यों न हो। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार की नीतियां किसान-केंद्रित हैं, प्रक्रिया पारदर्शी है और नीयत साफ है।