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Haryana

नायब सिंह सैनी का कांग्रेस पर प्रहार: पारदर्शी भर्ती से युवाओं का विश्वास बहाल, “झूठ की दुकान” की राजनीति बेनकाब

February 25, 2026 09:04 PM

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस द्वारा लाए गए काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा के उपरांत जवाब देते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस ने वर्षों तक “झूठ की दुकान” खोलकर जनता को गुमराह किया। इन्होंने भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने के लिए “भर्ती रोको गैंग” खड़ा किया।

 

मुख्यमंत्री ने सदन में नौकरियों से संबंधित विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार ने पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है, जबकि कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्टाचार चरम पर था और “रेवड़ी कल्चर” को बढ़ावा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि सरकार की उपलब्धियों से बौखलाया विपक्ष  निराश, हताश और कुंठाग्रस्त हो अनर्गल आरोप लगा रहा है, लेकिन तथ्यात्मक जवाब से उसकी झूठ की राजनीति पर ताला लग चुका है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने अपने काम रोको प्रस्ताव में तीन परीक्षाएं रद्द होने तथा 8 हजार 653 पदों के विज्ञापन को वापिस लेने की बात कही है। लेकिन वास्तविक्ता है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 8 हजार 653 पदों के विज्ञापन को वापिस लिया था, क्योंकि सीईटी परीक्षा होनी थी और नए अभ्यर्थी भी इस परीक्षा में शामिल हो सकें। इसी संदर्भ में आयोग ने बढ़े हुए पदों के साथ फिर से विज्ञापन निकाल दिया।

 

उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास तथ्य नहीं है, लेकिन सरकार के पास यह बात आई कि ग्राम सचिव का पेपर लीक हुआ। इस आशंका के चलते यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसे 28 जून, 2024 को फिर से विज्ञापित किया गया और 17 अगस्त, 2024 को लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। यही नहीं, इसका परिणाम भी 17 अक्तूबर, 2024 को घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्यों के पास कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि इसी सवाल को पिछले सत्र में तारांकित प्रश्न संख्या 46 के रूप में पूछा जा चुका है और सरकार ने हर बिंदु पर जवाब दिया। विपक्ष का काम झूठ बोलना है, इन्होंने तो झूठ की दुकान खोल रखी है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पटवारी व नहरी पटवारी की परीक्षा पात्रता मापदंड में बदलाव के कारण रद्द की गई थी। इसे सामान्य पात्रता परीक्षा के अधीन पूरा कर लिया गया है। इसी प्रकार, पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा भी पेपर लीक की आशंका के चलते रद्द की गई थी। इसकी भी तारीख फिर से निर्धारित करके सफलतापूर्वक परीक्षा आयोजित की गई और 16 जून, 2022 को परिणाम घोषित किया गया।

 

उन्होंने कहा कि सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी भर्ती के संदर्भ में भी पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न हुई। अंतिम परिणाम माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के कारण लंबित है। सरकार इस मामले की प्रभावी पैरवी कर रही है और न्यायालय का निर्णय आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सहायक प्रोफेसर के 2 हजार 424 पदों के विरुद्ध 1,022 पदों की सिफारिश विभाग को भेजी जा चुकी है तथा शेष पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। हेडमास्टर के पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया भी न्यायालय के आदेश के कारण रुकी हुई है, जिस पर सरकार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

 

 

कांग्रेस ने 10 साल में की 3593 भर्तियांजबकि पिछले 11 सालों में वर्तमान सरकार ने एचपीएससी के जरिये 11 हजार 17 युवाओं की भर्ती की

 

मुख्यमंत्री ने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन यानि एचपीएससी के जरिये कांग्रेस कार्यकाल में की गई भर्तियों का विवरण देते हुए बताया कि 1 अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2006, 1 अप्रैल 2006 से 31 मार्च 2007 तथा 1 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2008 तक किसी भी साल में एक भी भर्ती नहीं की। 1 अप्रैल, 2008 से 31 मार्च, 2009 में 22, 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2010 में 176, 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2011 में 712 तथा 1 अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2012 में 1046 युवाओं की भर्ती की। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2013 में 1046, 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 में 448 तथा 1 अप्रैल 2014 से अक्तूबर 2014 तक 143 युवाओं की भर्ती की। इस प्रकार कांग्रेस ने अपने 10 साल के कार्यकाल में 3593 युवाओं की भर्ती की।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार ने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन यानि एचपीएससी के जरिये पिछले 11 सालों में कुल 11 हजार 17 युवाओं की भर्ती की है। इससे पता चलता है कि वर्तमान सरकार हर परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के पारदर्शी ढंग से आयोजित करवा रही है। सरकार की इस सफलता से विपक्ष निराशा और हताशा में है। इसी के चलते प्रदेश के युवाओं को भ्रमित करने के लिए इस प्रकार के नेरेटिव चलाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में जब से हमारी सरकार आई है, सरकार ने पूर्णतः पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई है। जो हरियाणा के युवा हरियाणा की भर्ती एजेंसियों से निराश और हताश हो गये थे, उनमें इन एजेंसियों के प्रति विश्वास लौटा है। यह सिर्फ वर्तमान सरकार में होता है कि जरा सी गड़बड़ी की आशंका भी होती है, तो परीक्षा रद्द कर दी जाती है।  परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए हर पल सरकार हरियाणा के युवाओं के साथ खड़ी है।

 

उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्य अपने कार्यकाल में होने वाली गड़बड़ियों को भूल गए हैं। इनके समय में तो गड़बड़ियाँ ये खुद करते थे, तो पकड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता था। नौकरियों की बंदरबांट की जाती थी। भाई-भतीजावाद और क्षेत्रवाद का बोलबाला था। अब तक ऐसे मामलों में 26 एफआईआर दर्ज की गई है।

 

उन्होंने शायराना अंदाज में विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब न खर्ची चलती है, न सिफारिश का दौर है, यह नया हरियाणा है, यहाँ काबिलियत का जोर है। जिनके दौर में परचे भी बोली पर बिक जाते थे, वे आज पाठ पढ़ा रहे, यह कैसा शोर है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के 10 सालों के शासनकाल में की गई 11 भर्तियां रद्द हुई हैं। ये भर्तियां इन्होंने रद्द नहीं की थी बल्कि न्यायालय द्वारा रद्द की गई। इतना ही नहीं, कांग्रेस सरकार द्वारा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने वाली नीति भी कोर्ट ने रद्द कर दी थी और 4,645 कर्मचारियों को छः महीने में निकालने का आदेश दिया था जबकि वर्तमान सरकार ने उन्हें समायोजित किया। इसके अलावा, कांग्रेस सरकार 9,870 जे.बी.टी. टीचर्स को ज्वाइन करवाये बगैर उनका भविष्य अधर में छोड़कर चली गई थी। जबकि वर्तमान सरकार ने उन्हें ज्वाइन करवाया। इनेलो सरकार में भर्ती किए गए 3,500 सिपाही, जिन्हें कांग्रेस सरकार ने निकाल दिया था, उन्हें भी समायोजित किया।

 

मुख्यमंत्री ने सदन में कांग्रेस पर आंकड़ों के जरिये भी हमला बोला। उन्होंने सदन में बताया कि कोर्ट द्वारा कांग्रेस शासन काल में 7,338 भर्तियों को रद्द किया गया। इनमें पीटीआई      1983, आर्ट एण्ड क्राफ्ट के 816 पद, हिंदी प्राध्यापक के 251, कलर्क के 662 तथा कंप्यूटर ऑपरेटर के 146 पद शामिल है। इसके अलावा एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर के 102, जेई के 381, सहायक लाइनसमैन के 1586, ऑपरेटर-बिजली विभाग के 188, कैनाल पटवारी के 786 तथा लोअर डिवीजन कलर्क के 437 पद शामिल है। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि खुद कांग्रेस के नेता ही कह रहे है कि उनके समय में नौकरियों में बंदरबांट होती थी। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में योग्य व सक्षम युवाओं को दर-किनार किया गया। इनकी विफलताओं के कारण जब इन्हें विश्वास हो गया कि अब जनता इन्हें नकार देगी तो आखिरी समय में इन्होंने भाई-भतीजावाद का एक बड़ा उदाहरण पेश किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि काम रोको प्रस्ताव में हरियाणा लोक सेवा आयोग के द्वारा भूगोल विषय के सहायक प्रोफेसर भर्ती में 32 प्रश्न बिहार लोक सेवा आयोग से तथा इतिहास के पेपर में 24 प्रश्न दूसरे प्रदेश के पेपरों से आने का सवाल किया है। जबकि प्रश्न पत्र तैयार करने की एक प्रक्रिया है। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। यह प्रक्रिया पहले की सरकारों के समय से चलती आई है, वही अब भी जारी है। जहां तक इतिहास के पेपर के प्रश्नों का सवाल है न्यायालय ने इसके विरुद्ध लगी याचिका को खारिज कर दिया है और भूगोल के विषय में मामला कोर्ट में चल रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का ये सवाल है कि पी.जी.टी. कम्प्यूटर साईंस के 1 हजार 711 पदों की भर्ती के लिए परीक्षा ली गई थी और इसमें मात्र 39 अभ्यर्थी ही पास हो पाए।

उन्होंने कहा कि हर विषय की प्रकृति अलग-अलग होती है। हो सकता है कि इस परीक्षा में पेपर कठिन रहा हो। रिक्त पद 1 हजार 672 को भरने के लिए फिर से विज्ञापन जारी किया जा चुका है। हरियाणा का युवा सक्षम है। गेट, नीट आदि परीक्षाओं में सफलता के झण्डे गाढ़ चुके युवा इस बार अवश्य सफल होंगे।

 

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों का यह कहना कि एचपीएससी द्वारा परीक्षाओं में कटऑफ की नीति वर्तमान सरकार ने लागू की है, जो सरासर गलत है। सब को मालूम है कि पूरे देश में सभी शिक्षा बोर्ड 10वीं, 12वीं में 33 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को पास नहीं करते। एचसीएस एग्जिक्यूटिव ब्रांच नियम 2008 में बने थे। तब से यह नियम है कि जो अभ्यर्थी 45 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया जाएगा। यह नियम 2008 से आज तक ऐसा ही चल रहा है।

 

उन्होंने कहा कि हर परीक्षा पास करने के लिए एक कटऑफ होता है। 10वीं, 12वीं की परीक्षा हो अथवा अन्य डिग्री व प्रतियोगी परीक्षाएं हों। पी.जी.टी. कम्प्यूटर साईंस भर्ती परीक्षा का 5 फरवरी, 2026 को जारी परिणाम इस बात का प्रमाण है। इसमें 1,711 पदों के लिए मात्र 39 अभ्यर्थी ही पास हो पाए। रिक्त रहे 1 हजार 672 पदों को भरने के लिए फिर से 5 फरवरी, 2026 को जारी कर दिया गया था।

 

उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल, 2015 से आज तक लगभग 300 विज्ञापनों के माध्यम से कुल 15 हजार 483 पदों के परिणाम हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित किए गए। इनमें से लगभग 45 विज्ञापनों में ही ऐसा हुआ है कि चुने गए अभ्यर्थियों की संख्या विज्ञापित पदों से कम रही। फिर भी ऐसे कई प्रस्ताव विचाराधीन हैं जिनसे यह सुनिश्चित हो पाए कि भविष्य में ऐसी परिस्थिति आने पर कोई विशेष प्रावधान करके इस समस्या का हल निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्य नौकरियों की भर्ती में बाहरी युवाओं के चयन का भ्रम फैलाकर हरियाणा के होनहार युवाओं का मनोबल तोड़ने का काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 अप्रैल, 2024 से 12 फरवरी, 2026 के बीच 4437 पदों की सिफारिशों में यदि लगभग 22 प्रतिशत अभ्यर्थी अन्य राज्यों से हैं, तो यह अन्य राज्यों को तवज्जो देने की बात नहीं है। बल्कि खुली प्रतियोगी परीक्षा की प्रकृति है। एच.पी.एस.सी. भर्ती के पद अखिल भारतीय पात्रता वाले होते हैं। इन पर संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर का सिद्धांत लागू होता है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत देश का कोई भी पात्र उम्मीदवार आवेदन करके परीक्षा दे सकता है। हर परीक्षा में लगभग 90 प्रतिशत हरियाणा के युवा ही लगे हुए हैं। 1 अप्रैल 2024 से आज तक कुल 4437 भर्तियों में लगभग 11 प्रतिशत उम्मीदवार बाहर के हैं। आरक्षित पदों पर केवल हरियाणा के उम्मीदवार ही लग सकता है।

 

मिनिमम प्रतिशत कटऑफ की सीमा नई नहींपहले से निर्धारित है:

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मिनिमम प्रतिशत कटऑफ की सीमा नई नहीं है, बल्कि यह तो कांग्रेस के शासनकाल वर्श 1980 से ही चली आ रही है। इसी कड़ी में,एचपीएससी ने सिब्जेक्टिव पेपर में 35 प्रतिशत की कटऑफ का निर्णय 2021 में लिया। जून 2023 में एचपीएससी की पीजीटी की भर्ती के लिए आवेदन मांगने वाली एडवटाइजमेंट के खिलाफ इसी विषय पर अनेक रिट पिटिशन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की गई कि सिब्जेक्ट नाॅलेज टेस्ट में 35 प्रतिशत का कटऑफ नहीं होना चाहिए। 15 नवंबर, 2023 के अपने निर्णय द्वारा माननीय हाईकोर्ट ने इन सभी रिट पिटिशनों को खारिज किया और अपने आदेश में साफ लिखा कि अभ्यर्थियों को मिनिमम कटऑफ मार्क्स को कम करवाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि एचपीएससी को पूरा अधिकार है कि वे भर्ती के लिए कोई मापदंड अपना सकता है। हरियाणा लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी है। चयन प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद सभी अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिका की जांच करने का अवसर भी प्रदान किया जाता है।

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