फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित किए जा रहे 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में इस वर्ष न केवल कलाकारों की कलाकारी, बल्कि हरियाणा कारागार विभाग की सुधारात्मक जेल नीति की सफलता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हरियाणा प्रदेश की 18 जेलों के बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों को मेले में प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखा गया है, जो बंदियों के पुनर्वास और उनके जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन की कहानी बयां कर रहे हैं।
मेले में कारागार विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल नंबर 1130 से 1133 , 1135 व 1136 पर बंदियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद उपलब्ध हैं। स्टॉल पर नक्काशीदार लकड़ी का फर्नीचर, बढ़ईगिरी के उत्कृष्ट नमूने और पेंटिंग, जेल की बेकरी के उत्पाद और शुद्ध एलोवेरा आधारित हर्बल उत्पाद, कढ़ाई, सिलाई, टेक्सटाइल और दैनिक उपयोग की हस्त निर्मित वस्तुएं उपलब्ध है। स्टॉल पर उपस्थित उत्पाद बाजार में मिलने वाले उत्पादों से सस्ते व भरोसेमंद है। इन उत्पादों की कीमत 50 रुपये से लेकर 60 हजार रुपये तक रखी गई है, जिन्हें पर्यटक इनकी गुणवत्ता और मजबूती के कारण काफी पसंद कर रहे हैं।
बंदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का किया जा रहा प्रयास
हरियाणा कारागार विभाग की सुधारात्मक पहलों के तहत प्रदेश सरकार द्वारा जेलों में चलाए जा रहे व्यापक सुधार कार्यक्रमों के तहत बंदियों को विभिन्न व्यवसायों में व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बंदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्टॉल केवल उत्पादों की बिक्री का केंद्र नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर हर व्यक्ति सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ सकता है।
पर्यटक कर रहे बंदियों के कौशल की सराहना
शिल्प मेले में पर्यटक न केवल इन वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि बंदियों के कौशल और उनके सुधार के प्रति विभाग के प्रयासों की सराहना भी कर रहे हैं। यह पहल हरियाणा सरकार की आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को जेलों के भीतर भी प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रमाण है।