हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में बुधवार को ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ की मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (एसजेएचआईएफएम) तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के बीच एमओयू साईन किया गया। यह समझौता हरियाणा में अकादमिक शोध, नीति अध्ययन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
एसजेएचआईएफएम की ओर से डॉ. राज नेहरू तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने एमओयू का आदान-प्रदान किया। एमओयू का मुख्य उद्देश्य एसजेएचआईएफएम को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एक एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च सेंटर के रूप में स्थापित करना है, जहां राजकोषीय प्रबंधन, सार्वजनिक नीति, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप बजट निर्धारण, डेटा आधारित सुशासन तथा अन्य संबद्ध अंतर्विषयक क्षेत्रों में डॉक्टोरल शोध किया जा सकेगा। यह व्यवस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा विश्वविद्यालय के लागू नियमों के अधीन होगी।
इस सहयोग के तहत शोधार्थियों को एसजेएचआईएफएम में अपने मुख्य शोध कार्य करने का अवसर मिलेगा और साथ ही वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की अकादमिक विशेषज्ञता तथा शोध वातावरण का लाभ उठा सकेंगे। दोनों संस्थान आपसी हित के क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाओं, नीति अध्ययनों, प्रकाशनों, वर्किंग पेपर्स, सम्मेलनों, सेमिनारों तथा अन्य अकादमिक एवं नीति-केंद्रित गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगे।
एमओयू के तहत पात्र एसजेएचआईएफएम शोधकर्ताओं एवं फैकल्टी सदस्यों को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की निर्धारित अकादमिक प्रक्रिया के माध्यम से पीएच.डी. पर्यवेक्षक के रूप में मान्यता दिए जाने पर भी विचार किया जा सकेगा। पंजीकृत शोधार्थी आवश्यक अनुमति एवं गोपनीयता संबंधी प्रावधानों के अधीन दोनों संस्थानों की संबंधित शोध सुविधाओं, डाटासेट्स और ज्ञान संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। इस एमओयू के लिए एसजेएचआईएफएम के सलाहकार प्रो. आर.एस. राठौर ने समन्वय किया। उनके प्रयासों से दोनों संस्थानों के बीच इस संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिला।
यह पहल हरियाणा में एक मजबूत शोध तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रभावी सुशासन, सुदृढ़ राजकोषीय प्रबंधन, सतत विकास और बेहतर सार्वजनिक नीति निर्माण के लिए साक्ष्य-आधारित ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा।