हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा की हाल ही में खरीदी गई 70 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस के नए बेड़े ने 1 अगस्त से 15 सितंबर के बीच 9,273 मरीज-कॉल अटेंड किए, जिससे राज्य में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया नेटवर्क मजबूत हुआ है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि एएलएस एम्बुलेंस को सभी 23 जिलों में तैनात किया गया है और इन्हें इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है। हरियाणा के रेफरल ट्रांसपोर्ट बेड़े में वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों की 562 चालू एम्बुलेंस शामिल हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि 70 नई एम्बुलेंस को जोड़ने का उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार मरीजों का समय पर और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना तथा पूरे हरियाणा में अस्पताल-पूर्व आपातकालीन देखभाल को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि राज्य का एम्बुलेंस नेटवर्क हर दिन औसतन लगभग 4,500 मरीजों को ले जाता है, जबकि ईआरएसएस-112 के तहत औसत रिस्पांस टाइम 9 से 11 मिनट के बीच है। औसतन एक एम्बुलेंस रोजाना दो से तीन कॉल अटेंड करती है और लगभग 90 से 120 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
लगभग 3,900 रेफरल मामले संभाले गए
70 नई एम्बुलेंस की प्रदर्शन रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्होंने 1 अगस्त से 15 सितंबर तक 46 दिनों की अवधि के दौरान 9,273 कॉल अटेंड कीं। जिला और एम्बुलेंस-वार प्रदर्शन विवरण के अनुसार, इनमें से 3,886 रेफरल मामले थे, जबकि 2,955 कॉल गर्भवती महिलाओं से संबंधित थीं। अन्य 572 मामले सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे, जबकि 1,860 को अन्य श्रेणियों के तहत वर्गीकृत किया गया था।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह तैनाती उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए समय पर आपातकालीन देखभाल तक पहुंच में सुधार लाने के हरियाणा के प्रयासों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी। एनएचएम की रिपोर्ट के अनुसार, एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत करने का प्राथमिक उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और अन्य गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधाओं तक समय पर पहुँचाना सुनिश्चित करके शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने में मदद करना है।
उन्नत क्रिटिकल-केयर उपकरण मौजूद
सामान्य मरीज परिवहन वाहनों के विपरीत, ये 70 नई एम्बुलेंस मरीज को ले जाने के दौरान ही उन्नत अस्पताल-पूर्व आपातकालीन सहायता प्रदान करने के लिए उपकरणों से सुसज्जित हैं। इन उपकरणों में ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर, सिरिंज पंप, ऑटोमेटेड स्ट्रैचर, डिफिब्रिलेटर, मल्टीपारा मॉनिटर, सुक्शन मशीन और ऑक्सीजन डिलीवरी सिस्टम के अलावा अन्य आवश्यक क्रिटिकल-केयर उपकरण शामिल हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इससे मरीज के अस्पताल पहुँचने का इंतज़ार करने के बजाय परिवहन के दौरान ही क्रिटिकल-केयर सहायता शुरू हो जाती है। इन 70 नई एम्बुलेंसों को जिला आवश्यकताओं के अनुसार पूरे हरियाणा में वितरित किया गया है। फरीदाबाद और गुरुग्राम को पांच-पांच, जबकि भिवानी, करनाल, मेवात (नूंह), महेंद्रगढ़, पानीपत और रेवाड़ी को चार-चार एम्बुलेंस मिली हैं। हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, रोहतक, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर को तीन-तीन एम्बुलेंस मिली हैं, जबकि अंबाला, चरखी दादरी, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, पलवल और पंचकुला को दो-दो एम्बुलेंस मिली हैं।
हरियाणा में 562 चालू एम्बुलेंस उपलब्ध
राज्य के वर्तमान परिचालन बेड़े में 48 मौजूदा एएलएस एम्बुलेंस और 70 नई खरीदी गई एम्बुलेंस शामिल हैं। इसके अलावा 191 बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एम्बुलेंस, 210 पेशेंट ट्रांसपोर्ट एम्बुलेंस, पांच नियोनैटल केयर एम्बुलेंस और 38 किल्कारी वाहन शामिल हैं, जिससे कुल परिचालन बेड़ा 562 हो गया है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि मजबूत बेड़े से आपातकालीन चिकित्सा परिवहन की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और दक्षता में सुधार होगा, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहाँ आपातकालीन स्थल और स्वास्थ्य सुविधा के बीच का हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। नई खरीदी गई एम्बुलेंस के प्रदर्शन की समीक्षा राज्य स्वास्थ्य समिति, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा की 12वीं कार्यकारी समिति की बैठक के अवलोकनों पर अनुपालन और की गई कार्रवाई के हिस्से के रूप में की गई थी। विस्तृत प्रदर्शन रिपोर्ट 1 अगस्त से 15 सितंबर, 2026 तक की अवधि को कवर करती है।