हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार बजट घोषणाओं और संकल्प पत्र में किए गए वादों को धरातल पर उतारने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए तीन नई नीतियों से संबंधित प्रोत्साहन योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में निवेश करने वाले उद्यमियों को पारदर्शी, समयबद्ध और परेशानी-मुक्त व्यवस्था उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि निवेश के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हों।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बुधवार को चंडीगढ़ में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास, एम एस एम ई क्षेत्र, कृषि-आधारित उद्योग तथा फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा एग्री-बिजनेस एंड फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2026, हरियाणा प्रोग्रेसिव एम.एस.एम.ई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026 तथा मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 से संबंधित प्रोत्साहन योजनाओं एवं वित्तीय प्रावधानों पर चर्चा की गई।
बैठक में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री राव नरबीर सिंह, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता,उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, वित्त विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री सी.जी. रजनीकांत उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी निवेशक को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पात्रता प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले संबंधित निवेश, रोजगार, दस्तावेजों और परियोजना की पात्रता का पूर्ण सत्यापन किया जाए तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पात्र निवेशकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध करवाना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 के तहत 18 प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 के तहत प्रस्तावित 18 प्रमुख वित्तीय प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी तथा इन योजनाओं के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के लिए पहले पांच वर्षों में अनुमानित वित्तीय प्रावधान 5,305.89 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि इस नीति को हरियाणा को देश के प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में मजबूत करने, उत्पादन लागत को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, संतुलित एवं टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने तथा इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस नीति के तहत 10 लाख नए रोजगार सृजित करने, 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने तथा वार्षिक मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को बढ़ाकर 3.24 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।
डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 के तहत प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध और सरल बनाया गया है। इसके तहत प्रारंभिक जांच वैधानिक लेखा परीक्षक तथा स्वतंत्र चार्टर्ड इंजीनियर के प्रमाण-पत्र और अंडरटेकिंग के आधार पर कुल प्रोत्साहन राशि का पहला 50 प्रतिशत हिस्सा मात्र 7 कार्य दिवसों के भीतर वितरित किया जाएगा। इसमें वित्त विभाग और संबंधित विभाग की निर्धारित प्रक्रिया शामिल होगी। इसके बाद विभाग द्वारा गठित समिति अथवा तृतीय-पक्ष एजेंसी (Third-Party Agency) द्वारा विस्तृत जांच और साइट विजिट पूरी किए जाने के बाद शेष 50 प्रतिशत राशि 45 कार्य दिवसों के भीतर जारी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रोत्साहन राशि के वितरण में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। यदि सरकारी संस्थाओं की ओर से निर्धारित समय-सीमा के बाद प्रोत्साहन राशि के वितरण में देरी होती है, तो वित्तीय वर्ष 2026-27 से ऐसी देरी पर 8 प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा। वहीं, प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अनुमोदन के केवल तीन स्तर रखे गए हैं। आवेदन के प्रसंस्करण में देरी को कम करने के लिए विभाग स्तर पर केवल एक बार स्पष्टीकरण अथवा प्रश्न पूछने (Single Opportunity for Query Raising) का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि आवेदन की स्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। आवेदन, उसकी जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया हरियाणा के सिंगल विंडो सिस्टम (SWS) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जाएगी।
हरियाणा प्रोग्रेसिव एम.एस.एम.ई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026 के तहत 60 पहलों से एम.एस.एम.ई, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा
डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को हरियाणा प्रोग्रेसिव एम.एस.एम.ई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026 की प्रमुख विशेषताओं और इसके तहत प्रस्तावित प्रोत्साहनों की जानकारी दी तथा नीति के प्रावधानों पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि यह नीति राज्य के एम.एस.एम.ई क्षेत्र को मजबूत करने तथा छोटे एवं मध्यम उद्यमों को निवेश, टेक्नोलॉजी, वित्त, रोजगार और निर्यात के नए अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। नीति में 60 परिवर्तनकारी पहलों को वित्त, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, निर्यात, सस्टेनेबिलिटी और स्किल्स जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत रखा गया है। नीति का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना, 5 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित करना और हरियाणा के निर्यात को दोगुना करना है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पहली बार निर्यात करने वाले एम.एस.एम.ई से लेकर मौजूदा निर्यातकों तक को इंटरनेशनल क्वालिटी सर्टिफिकेशन, एक्सपोर्ट क्रेडिट, एक्सपोर्ट इंश्योरेंस, फ्रेट सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन और इंटरनेशनल ट्रेड फेयर्स में भागीदारी जैसी सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है। हरियाणा निर्यात केंद्र के माध्यम से एक्सपोर्ट डॉक्यूमेंटेशन, रेगुलेटरी कंप्लायंस, क्वालिटी सर्टिफिकेशन, लॉजिस्टिक्स, मार्केट इंटेलिजेंस और बायर कनेक्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है।
हरियाणा एग्री-बिजनेस एंड फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2026 से कृषि उपज में वैल्यू एडिशन और किसानों से उद्योग तक मजबूत होगा जुड़ाव
डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को हरियाणा एग्री-बिजनेस एंड फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2026 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए नीति के 11 प्रस्तावों पर अनुमोदन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि इस नीति का उद्देश्य राज्य के मजबूत कृषि उत्पादन आधार को फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यातोन्मुख उद्योगों से जोड़ना है। नीति का लक्ष्य 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित करना और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में लगभग 30,000 नए रोजगार सृजित करना है। साथ ही फूड-प्रोसेसिंग निर्यात को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने और पोस्ट-हार्वेस्ट लॉसेस को कम करने पर भी जोर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि नीति में नई इकाइयों की स्थापना, विस्तार और विविधीकरण के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन के अंतर्गत वैल्यू-एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे आईक्यूएफ लाइंस और ब्लास्ट फ्रीजर्स, को सहायता दी जाएगी। बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को मजबूत करने के लिए फार्म-लेवल एग्रीगेशन से लेकर रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों, एफपीओ, प्रोसेसर्स और बाजारों के बीच बेहतर जुड़ाव विकसित करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि तीनों नीतियों का लाभ केवल निवेश के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से हरियाणा के युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें निवेशक को सुविधा, उद्योग को प्रतिस्पर्धी वातावरण, युवाओं को रोजगार और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिले। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी प्रोत्साहन योजनाओं में पात्रता की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और किसी भी स्तर पर अपात्र व्यक्ति या इकाई को लाभ न मिले।