हरियाणा सरकार ने पानीपत के एक दिव्यांग बच्चे के लिए लगभग 35 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक बायोनिक कृत्रिम अंग (Bionic Prosthetic Limbs) उपलब्ध कराने को मंजूरी दी है। यह बच्चा करंट लगने की दुर्घटना में अपने दोनों हाथ और एक पैर खो चुका था। आधुनिक तकनीक से लैस ये कृत्रिम अंग उसे फिर से आत्मनिर्भर जीवन जीने, दैनिक कार्यों को सहजता से करने तथा सम्मान पूर्वक आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण सहारा प्रदान करेंगे।
यह निर्णय हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HMSCL) के निदेशक मंडल की 40वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने की। बैठक में राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार तथा स्वास्थ्य अवसंरचना को और मजबूत बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
बैठक में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (PGIDS), रोहतक स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए लगभग 82 लाख रुपये की लागत से 3-डी कोन बीम कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CBCT) एक्स-रे मशीन खरीदने की स्वीकृति प्रदान की गई। यह अत्याधुनिक मशीन दांतों, जबड़ों और मुख संबंधी जटिल रोगों की अत्यंत सटीक जांच में सहायक होगी, जिससे रोगियों को बेहतर उपचार योजना और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।
इसके अलावा, राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए लगभग 20 लाख रुपये की लागत से 30 माइक्रो-सेंट्रीफ्यूज मशीनें खरीदने का निर्णय लिया गया। इन मशीनों की सहायता से रक्त एवं अन्य जैविक नमूनों की जांच पहले से अधिक तेज़ और सटीक होगी, जिससे रोगों का समय पर निदान और शीघ्र उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मानसून के दौरान डेंगू की रोकथाम और समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समिति ने राज्यभर में उपयोग के लिए लगभग 47 लाख रुपये की लागत से 2,500 डेंगू एनएस-1 (NS1) डायग्नोस्टिक किट खरीदने को भी मंजूरी दी। इन किटों के माध्यम से डेंगू संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान संभव होगी, जिससे मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोग की प्रभावी निगरानी और नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने से संबंधित विभिन्न अन्य प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया तथा उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। इन निर्णयों से हरियाणा में गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और तकनीक-संचालित स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूती मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।