हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि कौशल, रोजगार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार मानती है। ‘हरियाणा विजन-2047’ के तहत शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधार प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर, सक्षम और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेंगे तथा हरियाणा को देश के अग्रणी शिक्षा एवं कौशल केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री वीरवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में तकनीकी शिक्षा विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग की ‘हरियाणा विजन-2047’ के तहत आगामी रोडमैप एवं कार्ययोजना की समीक्षा बैठक ले रहे थे। इस दौरान दोनों विभागों से संबंधित बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं तथा शिक्षा क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने विशेष निर्देश भी दिए। इस दौरान उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एके सिंह, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी कुमार, तकनीकि शिक्षा विभाग के महानिदेशक डॉ प्रभजोत सिंह, सेकेंडरी एजुकेशन के महानिदेशक श्री जितेंद्र कुमार, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव, मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का लक्ष्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है, ताकि प्रदेश के युवा भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में आने वाले समय में 10 इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) विकसित होने जा रही हैं। ऐसे में अभी से इस दिशा में कार्य किया जाए कि युवाओं को एडवांस तकनीक आधारित शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध हो सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पाठ्यक्रम और सिलेबस तैयार करते समय उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए। साथ ही उद्योग जगत के साथ संवाद स्थापित कर उनकी जरूरतों के अनुरूप शॉर्ट टर्म स्किल कोर्स शुरू किए जाएं, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जा सके और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री ने आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेजों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, रैंकिंग और प्रदर्शन में सुधार के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की नियमित मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जाए, ताकि शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।
पॉलिटेक्निक संस्थानों को बनाया जाएगा अत्याधुनिक
बैठक के दौरान प्रदेश में स्थापित किए जा रहे चार नए पॉलिटेक्निक कॉलेजों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के अन्य पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने, आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराने तथा आधारभूत ढांचे को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीक से जोड़ने वाली सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने मशीनरी अपग्रेड करने, बिल्डिंग निर्माण सहित तमाम जरूरी सुविधाएं प्रदान करने संबंधित भी निर्देश दिए।
प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण और स्टार्टअप पर भी हुई चर्चा
मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों में हरियाली, स्वच्छता और बेहतर वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों का डिजाइन आकर्षक हो तथा विद्यार्थियों को सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल मिले। बैठक में इनक्यूबेशन सेंटरों के माध्यम से स्थापित स्टार्टअप्स की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सफल स्टार्टअप्स की प्रेरणादायक कहानियों को विद्यार्थियों और युवाओं तक पहुंचाया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवा नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकें।
स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाने पर फोकस*
स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्कूलों में चल रहे निर्माण कार्यों, प्रयोगशालाओं तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं की गुणवत्ता की निगरानी के लिए विजिलेंस कमेटी के गठन के निर्देश दिए। ये कमेटियां स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी तथा विद्यार्थियों से संवाद कर शिक्षा की गुणवत्ता, उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं के बारे में फीडबैक भी प्राप्त करेंगी। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल व्यवस्थाएं बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाना होना चाहिए।
स्कूलों में होगा स्वच्छता पीरियड, मिलेगा सर्टिफिकेट
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों और स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने के लिए सप्ताह में एक पीरियड स्वच्छता गतिविधियों के लिए निर्धारित करने के निर्देश दिए थे, इस पर भी उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट ली। जिस पर अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके है, स्कूल में एसेंबली के दौरान हरियाणा राज्य गीत का गायन भी हुआ करेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए कि सामाजिक सरोकारों और स्वच्छता के प्रति होने वाली गतिविधियों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
टेंडर प्रक्रियाओं के समय को कम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्कूलों से संबंधित खरीद और टेंडर प्रक्रियाओं को 7 से 14 दिनों के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेश का कोई भी स्कूल ऐसा नहीं होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठना पड़े। सभी विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में डेस्क उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने स्कूलों में बाउंड्री वॉल, स्वच्छता, सौंदर्यीकरण तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में 1065 लैब स्थापित की जानी हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने इनकी संख्या बढ़ाकर 2 हजार करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिल सके।
हर स्कूल में होंगे चौकीदार और सफाई कर्मचारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का कोई भी विद्यालय चौकीदार और सफाई कर्मचारी के बिना नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के माध्यम से भी यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही स्कूलों के लिए डस्टिबिन लेने और सफाई व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए ग्राम पंचायत और यूएलबी से सामांज्स्य बनाने के भी निर्देश दिए गए है।
सुपर-100 प्लस और नया सेंटर होगा स्थापित
बैठक में निपुण हरियाणा मिशन, सुपर-100 योजना तथा स्कूल छोड़ चुके बच्चों की ट्रैकिंग व्यवस्था की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए और अधिक बेहतर अवसर उपलब्ध कराने हेतु ‘सुपर-100 प्लस’ कार्यक्रम शुरू करने तथा इसके लिए एक अतिरिक्त विशेष केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके तहत राजकीय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करवाई जाती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के समान अवसर प्रदान करना है। बैठक में स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविरों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी में किसी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का पता चलता है तो उसके अभिभावकों को समय पर इसकी जानकारी दी जाए, ताकि उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में जल्द ही 1500 विशेष शिक्षकों (स्पेशल टीचर्स) की भर्ती की जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जर्मन भाषा शिक्षण के लिए एमओयू किया जा चुका है और इस दिशा में कार्य प्रगति पर है।