हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि राजस्थान के धारूहेड़ा क्षेत्र से रेवाड़ी जिले के मैसानी बैराज में आने वाले दूषित पानी के कारण आसपास के 16 से 17 गांवों की उपजाऊ भूमि प्रभावित हो रही है। इस पानी में रासायनिक अपशिष्ट (केमिकल वेस्ट) की मात्रा अधिक होने से कृषि भूमि की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग को व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री राव नरबीर सिंह हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शून्य काल में विधायक अर्जुन चौटाला द्वारा उठाए गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने सदन को बताया कि हाल ही में उनकी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक हुई, जिसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। बैठक में इस विषय पर गंभीर चर्चा की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मैसानी बैराज में आने वाले पानी का प्रवाह प्राकृतिक है, जिसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। ऐसे में व्यावहारिक समाधान के रूप में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) से जुड़ी एक समग्र योजना तैयार की जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 150 करोड़ रुपये होगी, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा 100 करोड़ रुपये तथा हरियाणा और राजस्थान सरकार द्वारा 25-25 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित योजना के तहत इस पानी को उपचारित कर सिंचाई के कार्य में उपयोग करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा और भूमि की उत्पादकता को बचाया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूर्व में धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से दूषित पानी आने की समस्या थी, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के प्रयासों से राजस्थान की ओर बैराज का निर्माण करवाने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। पिछले दो-तीन महीनों से औद्योगिक क्षेत्र से दूषित पानी का प्रवाह बंद है, जिससे राहत मिली है।
राव नरबीर सिंह ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में शीघ्र प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।