हरियाणा के सहकारिता क्षेत्र में वित्तीय प्रदर्शन, डिजिटल सेवाओं, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा वितरण, अनाज भंडारण तथा सहकारी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लाभ में चल रही प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) की संख्या 33 से बढ़कर 51 हो गई है, जबकि प्रथम चरण के तहत चिन्हित सभी 710 पैक्स का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है।
वर्तमान में 515 पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में कार्य कर रही हैं। व्यापक राज्य सहकारिता नीति तैयार करने की प्रक्रिया भी जारी है। वहीं, रोहतक स्थित सेंटर ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट (सीसीएम) को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्ध राज्य स्तरीय सहकारी संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां राज्य सहकारी विकास समिति (एससीडीसी) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न पहलों एवं उपलब्धियों की समीक्षा की।
बैठक में पैक्स की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए तैयार किए गए रोडमैप की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करते हुए अधिकारियों को 31 मार्च, 2027 तक कम से कम 100 और पैक्स को लाभ में लाने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रथम चरण के तहत चिन्हित सभी 710 पैक्स ने 7 अगस्त, 2026 तक डे-एंड प्रक्रिया पूरी कर ली है और वे ई-पैक्स प्रणाली में शामिल हो चुकी हैं। इनमें से 708 पैक्स का ऑनलाइन ऑडिट भी पूरा किया जा चुका है।
सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज यादव ने बताया कि सहकारी समितियों के माध्यम से डिजिटल नागरिक सेवाओं का विस्तार हुआ है। कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में कार्य कर रही पैक्स की संख्या 410 से बढ़कर 515 हो गई है। पैक्स के माध्यम से जन औषधि केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी प्रगति हुई है। मुख्य सचिव ने जन औषधि केंद्र संचालित करने वाली सभी पैक्स के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अनाज भंडारण योजना की भी समीक्षा की गई। इसके तहत कुल 55 स्थानों की पहचान की गई है, जहां लगभग 3.06 लाख मीट्रिक टन की कुल भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना है।
सहकारी शिक्षा के क्षेत्र में रोहतक स्थित सेंटर ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुसार इस केंद्र को सहकारी महाविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करते हुए इसे सहकारिता क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर की संस्था त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
बैठक में व्यापक राज्य सहकारिता नीति तैयार करने के सम्बन्ध में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके लिए एक समिति गठित की गई है। विभिन्न संस्थानों एवं हितधारकों से सुझाव मांगे जा चुके हैं और नीति का प्रारूप प्रशासनिक अनुमोदन के लिए विचाराधीन है।
समिति ने हरको बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) की वित्तीय स्थिति, सहकारी बीमा योजनाओं, पैक्स के माध्यम से उर्वरक से संबंधित गतिविधियों तथा सहकारिता क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए किए जा रहे अन्य उपायों की भी समीक्षा की।
बैठक में यह भी बताया गया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) के माध्यम से हरियाणा में आलू टिश्यू कल्चर सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। विकास एवं पंचायत विभाग ने इस सुविधा के लिए उपयुक्त आलू उत्पादक क्षेत्र में साथ लगती लगभग 50 एकड़ भूमि चिन्हित करने पर सहमति दी है।
इस सुविधा के माध्यम से किसानों को रोगमुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली आलू रोपण सामग्री उपलब्ध कराने, उत्पादकता बढ़ाने तथा कृषि विकास को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ-साथ राज्य की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान मिलने की उम्मीद है।
बैठक में विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती निवेदिता तिवारी, हरको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रफुल्ल रंजन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।