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Haryana

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पांचो सदस्यों का होगा 11 जुलाई को कार्यकाल पूरा

July 04, 2020 01:40 PM

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पांचो सदस्यों का होगा 11 जुलाई को कार्यकाल पूरा  




चंडीगढ़ - आज से  ठीक  एक सप्ताह बाद  11  जुलाई 2020 को   हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग  के पांच सदस्यों - नीलम अवस्थी , अमर नाथ सौदा , भोपाल सिंह , विजय पाल सिंह और प्रदीप जैन जिनका   कार्यकाल  गत वर्ष 12 जुलाई, 2019 से  एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था, वह पूर्ण  हो जाएगा हालांकि आयोग के चेयरमैन (अध्यक्ष ) भारत भूषण भारती का  कार्यकाल अगले वर्ष मार्च- 2021 तक है. अब यह देखने लायक होगा कि  मौजूदा भाजपा-जजपा गठबंधन में आयोग के कुल दस सदस्यों में दोनों दलों में से कितने कितने सदस्य लगाए जाते हैं.

2015  और 2016 में पांच- पांच सदस्य लगाए गए

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि सवा  पांच वर्ष पूर्व  मार्च- 2015 में  खट्टर सरकार द्वारा भारत भूषण   भारती को तीन वर्षो  के लिए आयोग  का चेयरमैन एवं नीलम अवस्थी, देवेंदर सिंह, अमर नाथ सौदा, भोपाल सिंह एवं विजय पाल सिंह को तीन वर्षो के लिए सदस्य लगाया गया था. इसके सवा वर्ष बाद  जुलाई, 2016 में आयोग में पांच और सदस्यों  डॉ. एच.एम. भारद्धाज, राजबाला सिंह, प्रदीप जैन, सुरेंद्र कुमार और डॉ. हंस राज यादव की नियुक्ति भी तीन वर्षों  के लिए की गयी. हालांकि इन बाद के पांच सदस्यों के  नाम कभी भी आयोग की वेबसाइट पर नहीं दर्शाया गए.

2018 और 2019 में पांच- पांच सदस्यों को मिला आंशिक कार्यकाल  

उन्होंने  आगे बताया कि सवा   दो वर्ष पूर्व   मार्च, 2018 में  खट्टर सरकार ने  चेयरमैन भारती को तो तीन वर्ष का लगातार दूसरा कार्यकाल  प्रदान कर दिया परन्तु उनके साथ मार्च, 2015  में नियुक्त पांच अन्य सदस्यों का कार्यकाल केवल बढ़ाकर  11 जुलाई 2019 तक कर किया. हालांकि गत वर्ष 2019   आयोग के दस सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने पर  केवल पांच को एक वर्ष के कार्यकाल का विस्तार  दिया.  मौजूदा प्रावधानों के अनुसार आयोग में चेयरमैन के अलावा दस अन्य सदस्य लगाए जा सकते हैं.

आयोग के  दर्जे पर  एडवोकेट की याचिका लंबित

बहरहाल  दो वर्ष पूर्व जुलाई- 2018 में हेमंत ने प्रदेश  के राज्यपाल ,मुख्यमंत्री और तत्कालीन मुख्य सचिव दीपेन्दर  सिंह ढेसी एवं अन्य को अलग अलग याचिकाएं भेजकर 50 वर्ष पहले हरियाणा सरकार की एक गजट नोटिफिकेशन द्वारा  28 जनवरी 1970 को अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड , जिसका  नाम दिसंबर 1997 में बदलकर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग  कर दिया गया , का मूल गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक के अंतर्गत किये जाने   एवं आज तक उसी नोटिफिकेशन में समय समय पर तत्कालीन प्रदेश  सरकारों द्वारा नोटिफिकेशन मार्फत  संशोधन किये जाने पर कानूनी प्रश्न चिन्ह उठाये हालांकि आज तक राज्य सरकार की ओर  से उन्हें इस सम्बन्ध में कोई  जवाब प्राप्त नहीं हुआ.

अनुच्छेद 309 में नहीं बन सकता हैं आयोग

 हेमंत ने बताया कि भारत के  संविधान के उक्त अनुच्छेद में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के  सरकारी कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा सम्बन्धी अधिनियम एवं नियम बनाने का प्रावधान है एवं किसी भी प्रकार से भी इस अनुच्छेद के तहत उक्त सरकारी कर्मचारियों के  कोई  चयन एजेंसी अर्थात बोर्ड या आयोग गठित नहीं किया जा सकता. उन्होंने आगे बताया की  केंद्र सरकार द्वारा भी अपने कर्मचारी चयन आयोग,  जिसे पहले अधीनस्थ सेवाएं आयोग कहा जाता था, का सर्वप्रथम  गठन नवंबर 1975 में भारत सरकार के कार्मिक विभाग के  रेसोलुशन (संकल्प ) द्वारा किया गया था. इसके बाद मई 1999 में उक्त केंद्रीय आयोग  का  पुर्नगठन भी  कार्मिक मंत्रालय के नए रेसोलुशन द्वारा किया गया अर्थात दोनों बार इसके गठन में संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक का प्रयोग एवं उल्लेख कहीं नहीं किया गया जिससे स्पष्ट होता है की हरियाणा द्वारा उक्त प्रावधान में हरियाणा कर्मचारी आयोग का गठन कानूनी तौर एवं संवैधानिक दृष्टि से  उचित नहीं है.

 हेमंत ने बताया कि  मार्च -2018 में खट्टर सरकार द्वारा विधानसभा से बनाया गया हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा की शर्तें ) अधिनियम 2018,  जिसमे आज तक तीन बार संशोधन भी किया गया है, वह हालांकि संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत आता है. जहाँ तक हरियाणा लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग का विषय है,  तो हेमंत ने बताया कि केंद्र  अर्थात  संघ  और राज्यों  के लोक सेवा आयोगों के गठन के  लिए संविधान के अनुच्छेद 315 में स्पष्ट उल्लेख एवं प्रावधान  है.

चौटाला द्वारा दिलवाये कानूनी दर्जे को हूडा ने करवाया निरस्त

हेमंत ने यह भी बताया कि  आज से साढ़े 15 वर्ष पूर्व तत्कालीन ओम प्रकाश चौटाला सरकार ने दिसंबर 2004 में हरियाणा विधानसभा द्वारा  हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम 2004 बनवा आयोग को वैधानिक मान्यता प्रदान कर दी थी  हालांकि इसके केवल तीन महीनो बाद  मार्च 2005 में जब विधानसभा आम  चुनावो के बाद  भूपिंदर हूडा प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने नई विधानसभा के पहले ही सत्र में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (निरसन ) विधेयक 2005 सदन से पारित करवाकर  आयोग को मिला कानूनी दर्जा समाप्त करवा दिया हालांकि दोनों सरकारों ने यह तब यह अपने अपने राजनीतिक कारणों के फलस्वरूप करवाया  था. बहरहाल, तब से लेकर आज तक यह आयोग सरकारों द्वारा समय समय पर जारी नोटिफिकेशनो से ही संचालित किया जा रहा है एवं इसका कोई वैधानिक दर्जा नहीं है जोकि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है

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