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Haryana

SIRSA- अनलॉक के दूसरेे ही दिन एक साथ तीन धरने-प्रदर्शन कर्मचारियों के साथ नेता और शिक्षकों को भी नहीं परवाह

June 03, 2020 07:10 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JUNE 3

अनलॉक के दूसरेे ही दिन एक साथ तीन धरने-प्रदर्शन कर्मचारियों के साथ नेता और शिक्षकों को भी नहीं परवाह
लघुसचिवालय में विधायक, पीटीआई व अनुबंधित हेल्थ कर्मीे बैठे धरने पर
अनलॉकडाउन के दूसरे दिन ही लघुसचिवालय में एक साथ तीन धरने लग गए। जिसमें नेता से लेकर पीटीआई और स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने सोशल डिस्टेंस की परवाह किए बैगर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरना लगाकर बैठे रहे। खास बात यह रही कि इस दौरान जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी अपने कार्यालयों में मौजूद रहे और उनकी ओर से लगाई गई धारा 144 की धज्जियां उड़ती रही।
भले ही किसान और कर्मचारियों के हित में ये धरने थे, मगर जिस प्रकार से जिला में कोरोना फैल रहा है। उसके मुताबिक सभी को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हुए सोशल डिस्टेंस का पालन करना भी जरूरी था। सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताई जानी चाहिए, मगर महामारी ना फैले इसलिए सभी को नियमों का पालन करना जरूरी है। यहां बता दें कि जिला में अब तक 47 केस आ चुके हैं। जिसमें से 36 केस एक्टिव है। इसलिए सभी को संकम्रण से बचने के लिए अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
धरना नंबर 3: हमें गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया, धरने पर बैठना हमारी मजबूरी
स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधार पर कार्यरत गांव धोतड़ निवासी सुनील कुमार व भादरा बाजार सिरसा निवासी श्रीधर सुधाकर ने अपने साथियों के साथ लघुसचिवालय के समक्ष धरना दिया और नौकरी पर रखने की मांग की। इन कर्मचारियों ने 26 मई को भी धरना दिया था। इस दौरान भी धूप में अर्धनग्न होकर प्रशासन के समक्ष अपना दुखड़ा रोया था और एक ज्ञापन भी डीसी को सौंपा था। उस समय इन्हें आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी उन्हें नौकरी पर नहीं रखा गया। इसलिए उन्होंने मंगलवार को दोबारा से धरना दिया है। कर्मचारियों ने कहा कि काफी समय से अनुबंध आधार पर स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। सुनील ऐलनाबाद में बिजली मैकेनिक था तो श्रीधर डबवाली में बिजली मैकेनिक था। उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सांठ गांठ कर दोनों को अगस्त 2019 में नौकरी से बिना कोई कारण बताए निकाल दिया। उनके स्थान पर पंजाब व राजस्थान से आए युवकों को नौकरी पर रख लिया। धरना देना हमारी मजबूरी।
धरना नंबर 2: टीचर्स बोले-नहीं बचा कोई विकल्प तो विरोध प्रदर्शन करना पड़ा
वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई 1983 पीटीआई शिक्षकों की भर्ती को रद्द करने के फरमान से आक्रोशित पीटीआई शिक्षकों ने मंगलवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले डीसी कार्यालय में धरना दिया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। यूनियन के जिलाध्यक्ष भूप सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार के शासन काल में 1983 पीटीआई शिक्षकों की भर्ती की गई थी। भर्ती के दौरान टेस्ट होना था, लेकिन कुछ शिक्षकों का टेस्ट नहीं लिया गया, जिस पर भर्ती के दौरान 68 शिक्षकों ने इस भर्ती को कोर्ट में चैलेंज किया। इन शिक्षकों का आरोप था कि भर्ती में धांधली बाजी की गई है। करीब पांच वर्षों तक इस मामले की कोर्ट में सुनवाई चली। कुछ समय पूर्व कोर्ट ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के आदेश दिए। भूप सिंह ने बताया कि इस भर्ती के दौरान नियुक्त हुए टीचर दस साल से अधिक की सेवाएं पूरी कर चुके हैं, ऐसे में उनके सामने अब कोई और विकल्प भी नहीं है। भर्ती प्रक्रिया में कुछ शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की गई है तो केवल उन टीचरों को ही नौकरी से निकाला जाए।
अभय बोले : मैंने तो कम लोग बुलाए पर सरकार से प्रताड़ित लोग खुद चलकर आए
ऐलनबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला ने सिरसा के लघुसचिवालय के समक्ष अपने सैंकड़ों समर्थकों के साथ दिए गए जिला स्तरीय धरने में सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि किसानों को अगले सात दिन में गेहूं और सरसों की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो 9 जून को फिर से एक धरना दिया जाएगा। अभय सिंह चौटाला सोमवार ने बताया कि सरकार का वादा था कि किसानों को 72 घंटे के अंदर सरसों व गेहूं की खरीद की अदायगी की जाएगी जबकि 60 प्रतिशत से ज्यादा किसान कम से कम 20-25 दिनों से गेहूं की अदायगी के लिए कभी आढ़ती के पास, कभी सरकारी खरीद एजेंसी के कार्यालयों में चक्कर काट रहे हैं। अब तक लगभग 16 हजार करोड़ रुपये के कुल भुगतान के विरुद्ध केवल 1600 करोड़ रुपये ही किसानों को उनका भुगतान किया गया है। सोशल डिस्टेंस को लेकर मीडिया की ओर से पूछे गए सवाल पर अभय सिंह ने कहा कि उन्होंने नियमों को ध्यान में रखकर कम लोग बुलाए थे। मगर सरकार से प्रताड़ित लोग खुद चलकर आए हैं।

किसानों के समर्थन में दिए गए धरने के दौरान संबोधित करते विधायक अभय सिंह चौटाला।
लघुसचिवालय में हटाए गए पीटीआई शिक्षक धरने दौरान नारेबाजी करते हुए।

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