Saturday, July 04, 2020
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Haryana

कोरोना संक्रमण की वजह से 40 करोड़ भारतीय रोजगार खो चुके हैं। कारखाने आदि बंद पड़े हैं: अभय चौटाला

May 30, 2020 06:31 PM

कोरोना संक्रमण की वजह से देश व प्रदेश के सभी नागरिकों को मुश्किल  दौर से गुजरना पड़ रहा है और इस संक्रमण ने 1930 के दशक की महामंदी और जनजीवन की अस्त-व्यस्तता को याद करवा दिया है। यह बात इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने संक्रमण से जूझ रहे किसान, मजदूर व उनके लिए सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का मूल्यांकन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से 40 करोड़ भारतीय रोजगार खो चुके हैं। कारखाने आदि बंद पड़े हैं। हरियाणा सरकार कुछ जिलों में मोदी जी की ऑपरेशन ग्रीन योजना शुरू करने जा रही है जिसमें टमाटर, आलू, प्याज उत्पाद आदि को शामिल किया जाएगा। इन तीनों सब्जियों को मिलाकर योजना का नाम ‘टीओपी’ रखा है।
इनेलो नेता ने कहा कि ऑपरेशन ग्रीन योजना पहले से ही मुख्यमंत्री भावांतर किसान योजना के नाम से वर्ष 2018 से लागू है जिसमें टमाटर, प्याज, आलू और फूलगोभी फसलों को शामिल किया गया था। इस योजना का अर्थ है कि उपरोक्त फसलों का मॉडल भाव निश्चित किया जाता है अगर बाजार में किसानों को उससे कम भाव मिलता है तो उस भाव के अंतर की भरपाई सरकार करेगी, इसलिए इसको भावांतर किसान योजना कहते हैं। परंतु जब ये योजना बुरी तरह फेल हो गई तो इसका नाम बदलकर मोदी ऑपरेशन ग्रीन योजना नाम रख दिया है।
इनेलो नेता ने कहा कि पिछले दिनों तोशाम में किसानों न सैकड़ों एकड़ में लगे टमाटर कोरोना संक्रमण की वजह से कोई मुफ्त में लेने के लिए भी तैयार नहीं था जिसकी वजह से किसानों को धरना देना पड़ा। परंतु इतना कुछ होने के बाद भी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। योजनाओं का नाम बदलने से किसान की आमदनी दुगुनी नहीं होगी। कभी तो मेरी फसल मेरा ब्यौरा, कभी मेरा पानी मेरी विरासत, पीएम किसान सम्मान निधि योजना आदि कितने ही नाम हैं जिसके बारे में सरकार कहती है कि ये किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए लागू की गई हैं परंतु किसान इन योजनाओं की वजह से मंडियों में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मंडियों में किसानों का शोषण जारी है। स्वामी नाथन आयोग की शर्तों के अनुसार लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक खरीद मूल्य निर्धारित किया जाना चाहिए था जबकि सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केवल 4.5 फीसदी की ही वृद्धि की है। सरकार ने विशेष आर्थिक पैकेज में 11 घोषणाएं की हैं जिसमें से 8 कृषि के बारे में हैं और 3 कृषि रिफार्म से जुड़ी हुई हैं। इन योजनाओं में कृषि उपजों के लिए भण्डारण बनाना, माइक्रो इकाइयों की स्थापना करना, मछली पालन उद्योग में बढ़ौतरी करना और पशु टीकाकरण आदि योजनाओं का नाम दिया गया है जबकि यह योजनाएं पहले से ही लागू हैं और सरकार ने किसानों के लिए आर्थिक पैकेज में कोई ऐसी नई योजना शामिल नहीं की है जिससे किसानों की आर्थिक हालत पर सीधा सकारात्मक असर पड़े और किसान, मजदूर की आमदनी में बढ़ौतरी हो। यह ठीक है कि  आज प्रदेश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है परंतु किसानों ने इस दौर में भी प्रवासी मजदूरों के लिए भरपेट भोजन उपलब्ध करवाया और सब्जी-फल, दूध आदि कम से कम मूल्य पर देने का काम किया। इतना होने के बावजूद भी सरकार कृषि के महत्व को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है जबकि 63 प्रतिशत आबादी कृषि पर ही निर्भर है। अगर कृषक-मजदूर की आर्थिक हालत में सुधार होगा तो निश्चित तौर पर देश व प्रदेश की आर्थिक दशा पर अनुकूल असर पड़ेगा। परंतु सरकार की नीतियां कृषि को प्रोत्साहन देने की बजाय निरुत्साहित करने की है।

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