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हरियाणा सरकार ने आखिरकार अढ़ाई वर्ष बाद उपायुक्तों को ज़िलाधीश बनाने सम्बन्धी नोटिफिकेशन जारी की, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर एडवोकेट ने उठाया था मामला

May 16, 2020 10:26 AM

विकेश शर्मा

चंडीगढ़ - हरियाणा सरकार के न्याय-प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन, आईएएस द्वारा गत 11 मई 2020 को एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर सीआरपीसी की धारा 20(1) में प्रदेश में हर ज़िले के उपायुक्त के पद पर तैनात अधिकारियों को उनकी जिला में नियुक्ति तक सीआरपीसी 1973 की धारा 20(1) में कार्यकारी मजिस्ट्रेट एवं अपने सम्बंधित ज़िले का जिला मजिस्ट्रेट (ज़िलाधीश) नियुक्त किया है। सवाल यह है कि चूँकि ताज़ा नोटिफिकेशन बीती 12 मई को हरियाणा सरकार के गजट (राजपत्र ) में प्रकाशित हुई है इसलिए यह उसी दिन से प्रभावी होगी अर्थात 12 मई से पहले हरियाणा में हर ज़िले में तैनात उपायुक्तों द्वारा अपने ज़िले के जिलाधीशों के तौर पर जो भी कार्यवाही की गयी हैं एवं जो भी आदेश एवं निर्देश पारित किये गए हैं , उन्हें कानूनी मान्यता देने की भी आवश्यकता होगी. गौरतलब हैं कि अब तक सभी जिलों के डीसी (उपायुक्त) और डीएम(ज़िलाधीश) का कार्य भी कर रहे थे। परन्तु कानूनी तौर पर ऐसा उपयुक्त नहीं है अर्थात डी.सी. अपने ज़िले का पदेन (अपने पद के कारण) ही डीएम नहीं होता है. वैसे पड़ोसी राज्य पंजाब ने जबकि आज से साढ़े छः वर्ष पहले जनवरी, 2014 में ऐसी नोटिफिकेशन जारी की थी, जिसे पॉवर नोटिफिकेशन के नाम से जाना जाता है.
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि अक्तूबर, 2017 में जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक संवैधानिक बेंच के निर्णय - अजैब सिंह बनाम गुरबचन सिंह (फरवरी, 1965 ) का अध्ययन किया, तो उन्हें स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) ,1973 की धारा 20 (1) के तहत आदेश/नोटिफिकेशन जारी होने के पश्चात ही डी.सी. अपने ज़िले के डी.एम. के तौर पर कानूनी रूप पर से कार्य कर सकता है और अगर इसके बगैर वह ऐसा करता है तो डी.एम. के तौर पर उसके द्वारा पारित आदेशो एवं की गयी कार्यवाही की कोई कानूनी मान्यता एवं वैधता नहीं होगी. ज्ञात रहे कि सीआरपीसी की धारा 144 में कर्फ्यू और लॉकडाउन संबंधी सभी आदेश और निर्देश भी डीसी द्वारा जिलाधीश के तौर पर ही जारी किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि जब उन्हें हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के हर उपायुक्त को वैधानिक एवं आधिकारिक तौर पर अर्थात सीआरपीसी की धारा 20(1) में अपने सम्बंधित ज़िले के ज़िलाधीश के रूप में पदांकित करने सम्बंधित जारी आदेश या अधिसूचना नहीं प्राप्त हुई तो आज से अढ़ाई वर्ष पूर्व दिसम्बर, 2017 में उन्होंने इस मुद्दे पर सर्वप्रथम एक आर.टी.आई. हरियाणा सरकार के न्याय-प्रशासन विभाग में दायर कर हरियाणा में डीसी को डीएम के रूप में पदांकित करने सम्बन्धी नोटिफिकेशन की कॉपी की मांग की जिसे उक्त विभाग ने जनवरी, 2018 में प्रदेश के सभी 22 जिलो के उपायुक्तों को भेज उन सभी को उक्त सूचना याचिकाकर्ता को उपलब्ध करवाने एवं इस बारे में विभाग को भी सूचित करने को कहा. इसी के साथ हेमंत ने एक और आर.टी.आई. मुख्य सचिव कार्यालय के कार्मिक विभाग में भी दायर की जिसमे उन्हें जनवरी 2018 में सीधा जवाब दे दिया गया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी कोई नोटिफिकेशन उपलब्थ नहीं है.जब अप्रैल, 2018 तक राज्य के सभी उपायुक्तों से उक्त अधिसूचना की प्रति प्राप्त नहीं हुई, तो हेमंत ने एक और आरटीआई न्याय प्रशासन विभाग में अप्रैल, 2018 में दायर की जिसमे उन्होंने फरवरी, 1965 के सुप्रीम कोर्ट के उक्त निर्णय का हवाला भी दिया जिसके जवाब में विभाग ने आज से ठीक दो वर्ष पहले 14 मई, 2018 को अंतरिम जवाब में यह सूचित किया गया कि यह मामला राज्य सरकार के पास विचाराधीन है और निर्णय होते ही उन्हें सूचना प्रदान कर दी जायेगी. तब से बीते दो वर्षो से जब जब उन्होंने इस बारे में पूछताछ की, तो बताया गया कि यह मामला गृह सचिव के अधीन न्याय प्रशासन विभाग और मुख्य सचिव के कार्मिक विभाग के मध्य लटका रहा कि ऐसी नोटिफिकेशन दोनों में से कौन जारी करेगा. ज्ञात रहे कि इससे पहले हेमंत की ही आरटीआई के कारण ही 18 जून, 2018 को पंजाब के राज्यपाल, जो यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक भी है, ने चंडीगढ़ के डीसी को डीएम पदांकित करने के लिए गजट अधिसूचना जारी की थी जिसे उसी वर्ष 18 दिसंबर 2018 को संशोधित रूप में पुन: जारी किया गया

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