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Editorial

राजनीति अभी रहने दें कोरोना से जंग

April 07, 2020 07:18 AM

COUTESY NBT APRIL 7 EDIT

राजनीति अभी रहने दें


कोरोना से जंग
अभी जब देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है, तब इसे लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं की बयानबाजी और खींचतान दुर्भाग्यपूर्ण है। जब से तबलीगी जमात के बहुत सारे लोगों के कोरोना से संक्रमित होने की खबर आई है, तभी से कुछ नेता-कार्यकर्ता इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि समुदाय विशेष का एक तबका जान-बूझकर कोरोना फैला रहा है। इसे कोरोना जिहाद तक कह दिया गया। राजनीति का हाल यह है कि हरियाणा के स्वास्थ्य एवं गृह मंत्री अनिल विज ने कोरोना की आड़ में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर निजी कमेंट किए। उन्होंने कहा कि इटली के लोग ताली बजाकर और मोमबत्तियां जला कर अपने देश की एकता को प्रदर्शित कर रहे, मगर भारत में इटली वाली के बच्चे इसका विरोध कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि बीजेपी आलाकमान ने सांप्रदायिक बयानबाजी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के नेताओं से कहा है कि वे कोरोना महामारी को सांप्रदायिक रंग न दें। ऐसा कोई बयान न दें, जिससे समाज में विभाजन की आशंका बढ़े। उधर बंगाल में राहत कार्यों को भुनाने की होड़ का भी गलत संदेश जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राहत सामग्री बांटने का सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया गया। बीजेपी का आरोप है कि जब उनके नेताओं ने राहत सामग्री बांटने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें मना कर दिया। सत्तारूढ़ टीएमसी इस आरोप से इनकार कर रही है। उसका कहना है कि बीजेपी नेता सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रख रहे। बीजेपी की दलील है कि ममता बनर्जी कोरोना को अगले चुनावों में भुनाना चाहती हैं। इसी तरह पिछले दिनों दिल्ली और यूपी सरकार के बीच परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के कई दौर चले। प्रधानमंत्री के एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए सुझाए गए प्रतीकात्मक उपायों में भी कई लोगों ने राजनीतिक आशय ढूंढ लिए। इसके सांकेतिक महत्व को स्वीकार करने के बजाय सत्ताधारी दल के नेताओं ने इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का अभियान बना डाला और ताली-थाली बजाने या दीया जलाने के दौरान कुछ लोगों ने राजनीतिक नारे भी लगाए। दरअसल नरेंद्र मोदी ने यह आह्वान किसी राजनीतिक दल के नेता के रूप में नहीं बल्कि पूरे देश के अभिभावक के रूप में किया था और अभी के माहौल में ऐसी हर अपील को इसी रूप में लेने की जरूरत है। वे देश के मुखिया हैं और सारे राजनीतिक प्रतिनिधियों को, चाहे वे किसी भी दल के हों, अभी उनके सहयोगी की भूमिका निभानी चाहिए। यह वक्त आपसी मतभेदों को भुलाने का है, भुनाने का नहीं। लॉकडाउन के बाकी बचे दिन बेहद संवेदनशील हैं और जिस बड़े संकट का सामना हम कर रहे हैं, वह अभी ठीक से सामने भी नहीं आया है। कोरोना वायरस हिंदू-मुस्लिम नहीं देखता। हमें मिलकर उसका मुकाबला करना होगा। पहले समाज और देश को बचाएं, राजनीति बाद में होती रहेगी।

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