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कलकत्ता हाईकाेर्ट ने कहा- पत्नी का लगातार झगड़ा करना पति की सेहत के लिए हानिकारक, यह तलाक का आधार भी

March 27, 2020 06:19 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR MARCH 27

कलकत्ता हाईकाेर्ट ने कहा- पत्नी का लगातार झगड़ा करना पति की सेहत के लिए हानिकारक, यह तलाक का आधार भी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पत्नी के जुल्मों से परेशान एक व्यक्ति को तलाक की अनुमति दे दी है। जस्टिस संपति चटर्जी और मानोजित मंडल की बेंच ने कहा कि पत्नी का पति के खिलाफ झूठा केस दर्ज कराना पति के प्रति क्रूरता है। लगातार झगड़ा करना पति की सेहत के लिए हानिकारक है। ससुरालवालों के खिलाफ लगातार क्रूर व्यवहार दर्शाता है कि पत्नी वैवाहिक रिश्ता बरकरार ही नहीं रखना चाहती।
याचिकाकर्ता प्रमोद सिंह (परिवर्तित नाम) की शादी सीमा सिंह (परिवर्तित नाम) से 2002 में हुई थी। शादी के बाद ही सीमा ने घर का काम करने से इनकार कर दिया और महिला समिति की सदस्य बन गई। इसके बाद लगातार उससे और उसके परिवार वालों से झगड़ा शुरू कर दिया। इसके चलते प्रमोद का परिवार एक अलग मकान में रहने लगा। 2007 में प्रमोद ने तलाक की अर्जी लगाई तो सीमा ने समझौता कर लिया। इस पर केस वापस ले लिया गया। उसके बाद एक दिन सीमा ने पति को घर में घुसने नहीं दिया। इस पर प्रमोद अपने परिजन के पास रहने लगा तो सीमा ने प्रमोद व उसके परिजन पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करवा दिया। इस मामले में प्रमोद और उसके पिता 9 दिन जेल में रहे। फिर कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इस झूठे केस के आधार पर प्रमोद ने बर्दवान कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 2011 में खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रमोद ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
पति पर झूठा केस दर्ज करवाने के मामले को क्रूरता माना
हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि पति पर झूठा केस दर्ज कराना क्रूरता है और तलाक का आधार भी है। हालांकि, जब पति ने तलाक की याचिका दायर की तो महिला के व्यवहार में बदलाव आया और समझौता किया। मगर बाद में वह पति के प्रति फिर से झगड़ालू हो गई। लोकल पंचायत के समक्ष महिला ने पति और ससुराल वालों के प्रति अपने क्रूर व्यवहार में बदलाव लाने की बात की थी, मगर उसमें बदलाव नहीं आया। पत्नी लगातार पति से झगड़ा करती रहती थी, जो पति की सेहत के लिए हानिकारक है। ऐसे में दोनों के विवाह संबंध को कानूनी रूप से खत्म कर देना उचित होगा। कोर्ट पति के पक्ष में तलाक की डिक्री देते हुए इस विवाह बंधन को खत्म घोषित करती है।

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