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HARYANA-बिल्डिंग न टीचर, कैसी एजुकेशन हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने डिग्री कॉलेजों की वर्कलोड शीट जारी कर बयां की हकीकत

February 27, 2020 06:50 AM

COUTESY NBT FEB 27

बिल्डिंग न टीचर, कैसी एजुकेशन
हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने डिग्री कॉलेजों की वर्कलोड शीट जारी कर बयां की हकीकत

 

सेक्टर-14 के गर्ल्स कॉलेज में खुले में बैठकर छात्राओं को पढ़ना पड़ता है
कॉलेजों में 92 स्थायी टीचर और 57 गेस्ट टीचर्स हैं। कई सीटें अभी भी खाली हैं। छात्रों की संख्या 6300 है। ऐसे में टीचरों के लिए निदेशालय से डिमांड की गई है। - पूजा खुल्लर, प्रिंसिपल, द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज
शिक्षकों की कमी काफी अधिक है, जिसका असर परिणामों में देखने को मिलता है।

- जया, छात्रा, गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज
99 शिक्षकों में से केवल 26 ही रेग्युलर हैं और 43 गेस्ट टीचर हैं। - सत्यमन्यु यादव, प्रिंसिपल, सेक्टर-9 गवर्नमेंट कॉलेज
शिक्षक ही नहीं होंगे तो कक्षाएं भी कैसे लग पाएंगी, ऐसे में छात्रों का भविष्य पर असर पड़ता है।

- भावेश स्टूडेंट, सेक्टर-9 कॉलेज
नए कॉलेजों में बिना शिक्षकों के छात्र
जिले के 4 नए कॉलेजों में कोई भी शिक्षक स्थायी नहीं है, यहां पर सभी शिक्षक डेपुटेशन में है। जिसमें फर्रुखनगर गवर्नमेंट कॉलेज में बीकॉम में जो सबसे जरूरी है आकउंट्स, उसका कोई शिक्षक ही नहीं है। हिंदी, इंग्लिश और पॉलिटिकल साइंस विषय के एक भी शिक्षक कॉलेज में नहीं हैं। रिठौज कॉलेज में इंग्लिश में और हिस्ट्री में एक भी शिक्षक नहीं हैं। मानेसर में हिस्ट्री और मैथ्स का शिक्षक नहीं हैं।
वैसे तो कई विषयों में शिक्षकों की कमी है लेकिन साइंस स्ट्रीम में सबसे अधिक शिक्षकों की कमी से कॉलेज जूझ रहे हैं। सरकार हमेशा विज्ञान विषय के प्रति छात्रों को मोटिवेट करती है, ताकि छात्रों के बेहतरी के साथ देश को तकनीकि में बेहतर भविष्य मिले।
द्रोणाचार्य कॉलेज में मैथ्स में 11, फिजिकल एजुकेशन में 12, इंग्लिश में 7, बॉटनी में 5 और साइकोलॉजी में 4 शिक्षक कम हैं। सेक्टर-9 कॉलेज में कंप्यूटर साइंस में 4, फिजिकल एजुकेशन में 3। सेक्टर-14 गवर्नमेंट कॉलेज में मैथ्स में 8, जियोलॉजी में 11, फिजिक्स में शिक्षक कम हैं।
शिक्षकों की कमी ही कारण है कि रिजल्ट पर्सेंट में 40 से 50 पर्सेंट गिरावट आई है। कुछ वर्षों में प्रत्येक सेमेस्टर रिजल्ट के बाद री-अपीयर वाले छात्रों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।
बिगड़ा अनुपात
रिजल्ट का स्तर गिरा
साइंस स्ट्रीम में सबसे ज्यादा

है जरूरत
9 बड़े कॉलेजों में 188 शिक्षकों की कमी
2 बड़े कॉलेजों में 15 से 25 कक्षाओं की कमी है
4 कॉलेजों के पास तो अभी तक अपनी बिल्डिंग ही नहीं
40% से 50%

गिरावट आई है रिजल्ट प्रतिशत में
1. फिजिकल एजुकेशन, मैथ्स, बॉटनी में शिक्षक सबसे कम

2. पुराने कॉलेजों के शिक्षकों को ही नए कॉलेजों में डेपुटेशन पर पढ़ाने के लिए भेजा जाता है

3. फर्रुखनगर गवर्नमेंट कॉलेज में अकाउंट्स का कोई शिक्षक ही नहीं है
सरकारी डिग्री कॉलेजों में स्टूडेंट्स की तुलना में कम है शिक्षकों की संख्या•साक्षी रावत, गुड़गांव

 

गुड़गांव को एजुकेशन हब कहा जाता है, जहां देश-विदेश के छात्र हायर स्टडी के लिए आते हैं, लेकिन इस एजुकेशन हब के सरकारी कॉलेजों की स्थिति यहां के टीचरों की संख्या से बयां की जा सकती है। हर साल सीटों के मुकाबले कई गुना अधिक छात्र आवेदन करते हैं, ताकि वे अपना भविष्य बना सकें लेकिन बिना शिक्षकों के यह भविष्य किस तरह से तय होगा, यह खुद सरकार भी नहीं जानती। इसका खुलासा हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने कॉलेजों की वर्कलोड शीट जारी कर किया है। दिल्ली से सटे गुड़गांव में 9 सरकारी कॉलेज हैं, जिसमें 5 कॉलेज पुराने और 4 कॉलेज बीते दो वर्षों में खुले हैं। इन सभी में 188 शिक्षकों की कमी हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी शिक्षा के हालात और बिगड़ते ही जा रहे हैं।

जिले को 2018-19 में मानेसर गवर्नमेंट कॉलेज और रिठौज गवर्नमेंट कॉलेज मिला। वहीं 2019-20 में सेक्टर-52 और फर्रुखनगर गवर्नमेंट कॉलेज। कॉलेजों की संख्या में तो इजाफा हुआ लेकिन शिक्षकों की संख्या घट गई। पुराने कॉलेजों के शिक्षकों को ही नए कॉलेजों में डेपुटेशन के लिए पढ़ाने के लिए भेजा गया। वहीं इन दो वर्षों में नई नियुक्ति कम हुई और रिटायर्ड शिक्षकों की संख्या अधिक रही। सभी 9 कॉलेजों में क्लास रूम की कमी भी है। जिनमें से 4 कॉलेजों के पास तो अभी तक अपनी बिल्डिंग ही नहीं है। उधार के कुछ कमरों में छात्र हायर स्टडी ले रहे हैं। वहीं दो बड़े कॉलेजों में 15 से 25 कक्षाओं की कमी है। कुछ छात्र शेड के नीचे पढ़ते हुए नजर आते हैं तो कुछ छात्र ओपन ग्राउंड में पढ़ाई करते दिख जाते हैं।

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