Monday, April 06, 2020
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केजरीवाल की हैट्रिक, दिल्ली में आप की जोरदार वापसी से भाजपा में उदासी व कांग्रेस का सूपड़ा साफ

February 11, 2020 06:29 PM

चंडीगढ़ - राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधानसभा के सातवें आम चुनावो में आम आदमी पार्टी (आप ) ने सभी एग्जिट पोल नतीजों को सच साबित करते हुए तीन -चौथाई से अधिक बहुमत से सत्ता में वापसी की है. कुल 70 सदस्यी विधानसभा में आप पार्टी को 63 सीटें प्राप्त हुई है जबकि उसको 53 % से ऊपर वोट प्राप्त हुए हैं जो पांच वर्ष पूर्व फरवरी, 2015 में हुए विधानसभा आम चुनावो की तुलना में मिले 54.34 % के ही आसपास हैं. उन चुनावो में आप पार्टी को रिकॉर्ड 67 सीटें मिली थी. अबकी बार भाजपा को करीब 39 % वोट मिले हैं जो 2015 विधानसभा चुनावो की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत अधिक हैं हालांकि पिछली बार मिली 3 सीटो की अपेक्षा इस बार भाजपा को 7 सीटें मिली हैं. अभी नौ महीने पहले मई, 2019 में हुए 17 वी लोक सभा चुनावो में भाजपा को 56 .5 % वोट मिले थे एवं सभी सातो लोक सभा सीटें हासिल की जबकि कांग्रेस को 22 % वोट एवं आप को 18 % वोट मिले थे.ज्ञात रहे कि वर्ष 2017 में दिल्ली में हुए दो विधानसभा उपचुनावों के बाद आप की सीटें एक कम अर्थात 66 हो गयी थी जब अप्रैल, 2017 में भाजपा-अकाली दल के प्रत्याशी मनजिंदर सिंह ने राजौरी गार्डन उपचुनाव में जीत हासिल की. उस उपचुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी चंदेला दूसरें नंबर पर रही थी जबकि आप के हरजीत सिंह की ज़मानत जब्त हो गयी थी. यह उपचुनाव इसलिए हुआ क्योंकि 2015 चुनावो में यहाँ से निर्वाचित आप के विधायक जरनैल सिंह ने इस सीट से त्यागपत्र दे दिया था क्योंकि उन्होंने वर्ष 2017 में संपन्न पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ना था. इसके बाद अगस्त, 2017 में बवाना सीट पर हुए दूसरें उपचुनाव में आप के उम्मीदवार राम चन्दर ने हालांकि भाजपा के वेद प्रकाश को पराजित कर दिया था. उस उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहा था. यह उपचुनाव इसलिए हुआ था क्योंकि 2015 चुनावो में निर्वाचित आप के विधायक वेद प्रकाश आप को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे.पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने आज तक दिल्ली विधानसभा के हुए सभी छः विधानसभा आम चुनावो के आधिकारिक आंकड़ों का गहन अध्ययन करने के बाद बताया कि नवंबर, 1993 में जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए जब पहले विधानसभा चुनाव करवाए गए, तो उस समय भाजपा को 43 % वोट और 70 में से 49 सीटें जबकि कांग्रेस को 34 % वोट और 14 सीटें मिली. सबसे पहले मदन लाल खुराना, फिर साहिब सिंह वर्मा और बाद में कुछ समय के लिए सुषमा स्वराज भाजपा की मुख्यमंत्री बनी. इसके बाद वर्ष 1998 चुनावो में कांग्रेस को 48 % वोट और 52 सीटें मिली जबकि भाजपा को 34 % वोट और 15 सीटें मिली जिसके बाद शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री बनाई जो दिसंबर, 2013 तक इस पद पर रही. इस दौरान वर्ष 2003 चुनावो में कांग्रेस को 48 % वोट और 47 सीटें मिली जबकि भाजपा को 35 % वोट और 20 सीटें मिली जबकि वर्ष 2008 चुनावो में कांग्रेस को 40 % वोट और 43 सीटें जबकि भाजपा को 36 % वोट और 23 सीटें प्राप्त हुई. इसके बाद वर्ष 2013 में हुए चुनावो में भाजपा को 33 % वोट और 31 सीटें मिली, कांग्रेस को 24 % वोट जबकि केवल 8 सीटें मिली. पहली बार चुनाव लड़ने वाली आप पार्टी को 29 % वोट और 28 सीटें मिली।

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