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डेथ वारंट पर अमल में 8 दिन बचे, पर आखिरी मुलाकात के लिए नाम और वक्त नहीं बता रहे चारों गुनहगार

January 24, 2020 05:44 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JAN 24
दोषी बोले- पहला अपराध था, माफ कर दें; सरकार बोली- मां-बाप का हत्यारा अनाथ होने की दलील नहीं दे सकता
निर्भया केस: डेथ वारंट जारी करने वाले जज का तबादला

फांसी की सजा को कानूनी दांव-पेच में उलझाने पर सुप्रीम काेर्ट ने गुरुवार काे सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस एसए बाेबडे ने कहा कि मृत्युदंड के खिलाफ अपीलों का एक छाेर पर अंत जरूरी है। दाेषी काे कभी नहीं लगना चाहिए कि इसका सिरा खुला रहेगा और सजा काे चुनाैती देने की लड़ाई अंतहीन चलती रहेगी।
फांसी टालने के लिए निर्भया के दोषियों द्वारा कानूनी हथकंडे आजमाने के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बेहद अहम है। यूपी के अमराेहा में 10 माह के बच्चे सहित 7 लोगों की हत्या करने वाले प्रेमी जाेड़े की मृत्युदंड के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि काेर्ट कानून के अनुसार काम करेगा। पीड़िताें काे न्याय देना जजाें का कर्तव्य है। काेर्ट काे दोषियों ही नहीं, पीड़िताें के अधिकार भी देखने चाहिए। निर्भया के गुनहगाराें की अाेर इशारा कर कोर्ट ने कहा, 'फैसले का सम्मान कर सजा स्वीकार करनी चाहिए। फांसी काे अंतहीन मुकदमों में फंसाने की इजाजत नहीं दे सकते।' सभी पक्षाें की दलीलें सुनकर काेर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। शेष | पेज 9 पर
कानूनी हथकंडों से फांसी की सजा टालने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
फांसी के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी: चीफ जस्टिस
7 लोगों के हत्यारे प्रेमी जोड़े की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की
निर्भया के दाेषियों की अाेर इशारा कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सजा स्वीकार करें
दोषियों के वकीलों ने मांग की कि फांसी माफ कर सुधरने का माैका दिया जाए। सीनियर एडवाेकेट अानंद ग्राेवर अाैर मीनाक्षी अानंद ने कहा कि दाेषी गरीब अाैर अशिक्षित पृष्ठभूमि से हैं। यह उनका पहला अपराध था। जेल में शबनम का बर्ताव अच्छा है। वहां बच्चों को पढ़ाती है। जेल में होने वाले कई सामाजिक कार्यक्रमाें में भी शामिल होती है।
निर्भया के चारों गुनहगारों को फांसी के लिए 1 फरवरी सुबह 6 बजे का वक्त तय है। लेकिन एक के बाद एक कानूनी हथकंडे चल रहे चारों गुनहगार मान रहे हैं कि उस दिन भी फांसी नहीं हाेगी। चारों में से किसी ने भी ितहाड़ जेल प्रशासन को यह नहीं बताया है कि फांसी से पहले वह किस परिजन से और कब मिलना चाहते हैं। न ही यह बताया है कि वह कोई वसीयत करना चाहते हैं या नहीं। डीजी जेल संदीप गोयल ने बताया िक पत्र सौंपने के एक सप्ताह बाद भी दोषियों ने कोई जवाब नहीं दिया है।
हर अपराधी के अंदर एक मासूम दिल ही बताया जाता है। लेकिन, हमें अपराध काे भी देखना हाेता है। हम सिर्फ दाेषियाें के जीवन अाैर मृत्युदंड पर ही जाेर नहीं देना चाहते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सजा अपराध के अनुपात में ही हाेनी चाहिए। - एसए बोबडे, सीजेआई
यूपी सरकार ने दोषियों की मांग का विराेध किया। साॅलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, 'माता-पिता का हत्यारा खुद काे अनाथ बताकर दया नहीं मांग सकता। जेल में सुधार के अाधार पर दाेषी की सजा माफ होने लगी ताे हर काेई एेसी मांग करने लगेगा। एेसे अपराधियाें के लिए कानून की एक अाैर खिड़की खुल जाएगी।'
उधर, िनर्भया के दाेषियाें का डेथ वारंट जारी करने वाले सेशन जज एसके अराेड़ा डेपुटेशन पर सुप्रीम काेर्ट रजिस्ट्री में भेजे गए हैं। निर्भया के माता-पिता की याचिका वही सुन रहे थे। अब नए जज यह केस सुनेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के वकील से कहा, 'आप कह रहे हैं कि 10 माह के बच्चे को मारने के बाद अब उसका व्यवहार बदला है? हत्या याेजना बनाकर शातिर दिमाग से की गई थीं। दाेषी काे सिर्फ इसलिए माफ नहीं कर सकते हैं, क्योंकि दूसरे अपराधियों के साथ उसका व्यवहार अच्छा है। सभी पहलू देखकर ही मौत की सजा सुनाई गई थी।'
जेल की कोठरी से एक-डेढ़ घंटे ही निकल पाते हैं दोषी
निर्भया के चारों गुनहगार जेल नंबर 3 के हाई सिक्योरिटी सेल की अलग-अलग कोठरियों में हैं। दूसरे कैदियों से तो दूर ये लोग आपस में भी नहीं मिल पाते। दिन में एक-डेढ़ घंटे के लिए ही इन्हें कोठरियों से निकाला जाता है। चारों एक साथ नहीं िनकाले जाते

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