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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया

January 23, 2020 05:27 PM

चंडीगढ़:नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा ने शिरकत की।इस दौरान कुमारी सैलजा ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और स्वतंत्रता की लड़ाई में उनके महान योगदान को याद किया।कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए कुमारी सैलजा ने कहा कि आज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और क्रांतिकारी नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी को देश याद कर रहा है, आज नेता जी की जयंती है। नेता जी वह शख्सियत थे, जिन्होंने अपना तन मन धन सब भारतवर्ष की आजादी के लिए न्योछावर कर दिया था। आज वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाली उनकी यादें हमारे साथ हैं।वह लंबे तक कांग्रेस पार्टी से जुडे रहे थे। वर्ष 1921 में सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी से मुलाकात की थी और वह कांग्रेस पार्टी से जुड़ गए। गांधी जी की सलाह पर वह स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे। नेताजी ने कांग्रेस पार्टी मे कई पदों पर अहम जिम्मेदारियां संभाली थी।  वह कांग्रेस के महासचिव भी रहे थे। वह दो बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी चुने गए थे। कांग्रेस पार्टी ने आजादी के लड़ाई के लिए कई आन्दोलन खड़े किए थे। महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू,जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद के साथ मिलकर नेता जी ने देश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी। कांग्रेस के कई नेताओं ने आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए तो कांग्रेस के कई नेता स्वतंत्रता संग्राम में जेल में बंद रहे। कई आंदोलन कांग्रेस पार्टी ने चलाए। अपनी कुर्बानीयों से कांग्रेस ने अंग्रजों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया था।साथियों जब देश में स्वतंत्रता सेनानी देश को आजाद कराने के लिए अलग अलग तरीके से लड़ रहे थे, उस वक्त वर्ष 1942 में भारत को अंग्रेजों के कब्जे से स्वतन्त्र कराने के लिये आजाद हिन्द फौज नामक सशस्त्र सेना का संगठन किया गया था। वर्ष 1943 में आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान सुभाष चंद्र बोस के हाथों में सौंप दी गई।कांग्रेस के साथ आजाद हिंद फौज ने भी देश की अजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था। कांग्रेस पार्टी और आजाद हिंद फौज के अजादी पाने के अलग-अलग रास्ते जरुर थे, इनको लेकर कुछ मतभेद भी थे, लेकिन दोनों की मंजिल एक थी। आजाद हिंद फ़ौज की पांच में से तीन ब्रिगेडों के नाम कांग्रेस नेताओं के नाम पर रखे गए थे। गांधी ब्रिगेड,नेहरू ब्रिगेड और आजाद ब्रिगेड नाम रखना बताता था कि कांग्रेस से अलग होने के बाद भी सुभाष चंद्र बोस का कांग्रेस प्रेम बना रहा था। जय हिंद का नारा नेता जी ने ही दिया था। मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी, हमारे पिता जी और कांग्रेसजन नमस्ते के स्थान पर जय हिन्द कहते थे।गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर सुभाष चंद्र बोस ने ही संबोधित किया। उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से गाँधी जी के नाम जारी एक प्रसारण में अपनी स्थिति स्पष्ठ की और आज़ाद हिन्द फौज़ द्वारा लड़ी जा रही इस निर्णायक लड़ाई की जीत के लिये उनकी शुभकामनाएँ माँगीं थी। 

 

स्वतंत्रता संग्राम या कांग्रेस की राजनीति से इतर कई ऐसे प्रसंग देखने को मिलते हैं, जो नेताजी और नेहरू जी के मजबूत व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाते हैं। जब नेहरू जी अपनी पत्नी कमला नेहरू के इलाज के लिए यूरोप गए तो, न केवल नेताजी ने उनकी मदद की बल्कि, कमला नेहरू के अंतिम संस्कार की भी व्यवस्था की और पत्नी की मौत से शोकाकुल नेहरू जी को ढांढस बंधाया- बिलकुल एक छोटे भाई की तरह। वैसे भी नेहरू जी ने एक जगह नेताजी का जिक्र करते हुए उनको उनको छोटे भाई की तरह बताया था। यह सुभाष चंद्र बोस का पंडित नेहरू के प्रति सम्मान और संबंधों  की घनिष्ठता ही थी कि उन्होंने आईएनए में एक रेजिमेंट का नाम नेहरू जी को समर्पित किया था।

 

नेताजी की मौत की खबर सुनकर पंडित नेहरू लगभग टूट-से गए थे। आजादी के बाद प्रधानमंत्री नेहरू जी सदैव नेताजी की पत्नी और बेटी की हर संभव मदद को लेकर तत्पर रहे। 

 

इंदिरा गांधी जी ने वर्ष 1967 में अपने एक संबोधन में कहा था कि नेताजी वास्तव में भारत की बहादुरी के प्रतीक थे। यह आग थी, इस देशभक्ति के उस उत्साह में, जिसने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय सेना बनाने के लिए प्रेरित किया।

 

आखिर में यही कहना चाहूंगी कि आजादी के समय लाखों लोग धर्म, मजहब, जाति को बिना जाने स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े थे। हमारे सामने फिर से चुनौती है कि हम देश को एकजुट करें। जो काम हमारी अध्यक्ष सोनिया गांधी जी और हमारे नेता राहुल गांधी जी कर रहे हैं देश को एकजुट करने का, हमें भी उनसे प्रेरणा लेकर उनकी देश को एकजुट रखने की मुहिम का दृढता से साथ देना है। इस देश को जोड़े रखने के लिए हमारे महानपुरुषों ने अपनी जवानियां देश के लिए न्योछावर कर दी। उस समय स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ रहे लोगों ने सपना देखा था एक अखंड भारत का, आज उस अखंड भारत, देश की एकता को बनाए रखने की जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी की बनती है। जो हमें संविधान मिला है, डॉ अंबेडकर और अन्य महान पुरुषों द्वारा रचित, उसको हमें संभाल कर रखना है। उसको बचाना है, इन नई चुनौतियां में आज हम सब नेता जी को याद करते हुए हम फिर एक बार खुद को समर्पित करें। उनके योगदान को याद करते हुए यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि कोई हमारे इतिहास और स्वंतंत्रता संग्राम को भुला ना पाए। क्योंकि आज के दिन कोशिश की जा रही है, इतिहास को बदलने की, महापुरुषो के योगदानों को भुलाने की, विवाद करने की। 

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