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Editorial

श्रमिकों की चिंता

January 07, 2020 06:00 AM

COURTESY DAINIK JAGRAN JAN 7

EDITORIAL

हरियाणा सरकार श्रमिकों की चिंता कर रही है। हर संवेदनशील सरकार को अपने नागरिकों की चिंता करनी चाहिए। लेकिन सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि वह श्रमिकों के लिए जो कर रही है, उसका क्रियान्वयन कितना हो रहा है? यदि प्रभावी क्रियान्वयन होगा तो श्रमिकों की स्थिति बदल जाएगी। जैसे कार्यस्थल पर महिला श्रमिकों को सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाती है तो महिला श्रमिक कई परेशानियों से निजात पा सकेंगी। सरकार यह व्यवस्था भी कर रही है कि आवश्यकतानुसार श्रमिकों को हेलमेट, सुरक्षात्मक जूते वेल्डिंग करने वाले श्रमिकों को सुरक्षात्मक चश्मे प्रदान किए जाएं, यह भी श्रमिकों की सुरक्षा के दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रदेश सरकार उनकी परेशानियों को समझ रही है। विचारणीय है कि श्रमिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं पहले से भी चल रही है। इनमें प्रमुख है औद्योगिक क्षेत्र में दस रुपये में भरपेट भोजन की व्यवस्था। हालांकि अभी बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं, जहां ये कैंटीनें नहीं खोली जा सकी हैं। यदि सरकार श्रमिकों के लिए हर औद्योगिक क्षेत्र में पर्याप्त कैंटीन खोलने की व्यवस्था को भी प्राथमिकता पर ले ले तो श्रमिकों के स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति में काफी सुधार आ जाएगा। उनकी श्रम शक्ति बढ़ेगी। उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और वे अपना अधिक योगदान कर सकेंगे। श्रमिकों को चिकित्सा व्यवस्था का लाभ भी कम ही मिल पाता है। इसके लिए सरकार को श्रमिकों को जागरूक करने के प्रयास भी करने चाहिए। श्रमिकों के अधिकारों और उनके लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उन तक पहुंचानी चाहिए। जब तक उन्हें पता ही नहीं होगा कि सरकार उनके लिए क्या सुविधाएं दे रही है, वे उसका लाभ कैसे उठा सकेंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार जिस तरह श्रमिकों की चिंता कर रही है, इस बात की भी चिंता करेगी कि उसका लाभ वास्तव में श्रमिकों को मिले, अन्यथा योजनाएं बनती तो जरूरतमंदों के लिए हैं, लेकिन क्रियान्वयन में पारदर्शिता न होने से वे कुछ विशेष लोगों की अतिरिक्त आय का साधन बनकर रह जाती हैं।

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