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हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र 25 जनवरी से पहले होने की संभावना,संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित 126 वें संविधान संशोधन विधेयक, 2019 के अनुसमर्थन के लिए आवश्यक

December 18, 2019 03:51 PM

चंडीगढ़ - भारतीय संसद के दोनों सदनों ने गत सप्ताह संविधान ( 126 वां संशोधन) विधेयक, 2019 पारित कर दिया है जिसके द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन कर लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओ में अनुसूचित जाति (एस.सी.) और अनुसूचित जनजाति (एस.टी.) के लिए सीटों का आरक्षण, जो आगामी 25 जनवरी, 2020 को समाप्त हो रहा था, उसे 10 वर्ष के लिए और अर्थात 25 जनवरी 2030 तक बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस बारे में कानूनी जानकारी देते हुए बताया कि उक्त विधेयक को केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद ही भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं प्राप्त हो जायेगी अपितु उक्त संविधान संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति से पहले भारतीय गणतंत्र के सभी राज्यों में से कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा इसका अनुसमर्थन (रेटिफिकेशन) करना भी आवश्यक है जैसे कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 (2 ) में उल्लेख है. हेमंत ने बताया कि ऐसा इसलिए आवश्यक है क्योंकि उक्त संविधान संशोधन विधेयक संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व से सम्बंधित है इसलिए देश के न्यूनतम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा इसका अनुमोदन आवश्यक है.

 

उन्होंने आगे बताया कि पिछले साठ वर्षो में छः बार जब-जब संसद द्वारा इस प्रकार का संविधानिक संशोधन किया गया, तब देश के कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों ने तब तब ऐसे ही संबंधित विधेयकों का अनुसमर्थन किया था, जिसके बाद ही तत्कालीन राष्ट्रपति ने उन पर अपनी स्वीकृति दी थी. हेमंत ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 334 में ऐसे आरक्षण की समय सीमा हालांकि मूल रूप से तो संविधान लागू होने के मात्र 10 वर्ष तक के ही की गयी थी अर्थात 25 जनवरी 1960 तक परन्तु सर्वप्रथम वर्ष 1959 में संसद द्वारा संविधान (8 वां संशोधन ) विधेयक,1959 पारित कर इस समय सीमा को संशोधित कर 20 वर्ष अर्थात 25 जनवरी 1970 तक किया गया, फिर 1969 में
संविधान (23 वां संशोधन ) विधेयक,1969 द्वारा इसे 30 वर्ष अर्थात 25 जनवरी 1980 तक, फिर वर्ष 1980 में संविधान (45 वां संशोधन ) विधेयक,1980 के द्वारा इसे 40 वर्ष अर्थात 25 जनवरी 1990 तक, फिर वर्ष 1989 में संविधान (62 वां संशोधन ) विधेयक,1989 द्वारा इसे 50 वर्ष अर्थात 25 जनवरी 2000 तक, इसके बाद वर्ष 1999 में संविधान (79 वां संशोधन ) विधेयक,1999 द्वारा इसे
60 वर्ष अर्थात 25 जनवरी, 2010 तक और आज से दस वर्ष पहले वर्ष 2009 में संविधान (95 वां संशोधन ) विधेयक,2009 द्वारा इसे 70 वर्ष अर्थात 25 जनवरी 2020 कर दिया गया था जिसे अब संशोधित कर 80 वर्ष अर्थात 25 जनवरी 2030 तक किया जाना है. उन्होंने बताया कि लोक सभा में इस समय कुल 543 सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए 84 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित है अर्थात कुल 131 सीटें आरक्षित हैं जबकि वर्ष 2009 लोक सभा आम चुनावो से पहले यह संख्या 120 होती थी जिसमे 79 अनुसूचित जाति और 41 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी. देश के सभी राज्यों की विधानसभाओ में अनुसूचित जाति की लिए 614 जबकि अनुसूचित जनजाति की लिए 554 सीटें आरक्षित है. उन्होंने यह भी बताया वर्ष 2001 में हुए संविधान संशोधन के फलस्वरूप लोक सभा और विधानसभा के चुनावी हलकों सम्बन्धी परिसीमन की कवायद वर्ष 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आंकड़ों के प्रकशित होने के बाद अर्थात 2031 के बाद ही संभव हो पाएगी जिसका अर्थ है लोकसभा और राज्यों की विधानसभा की मौजूदा कुल सीटें और आरक्षित सीटें तब तक के लिए वर्तमान जैसी ज्यों की त्यों कायम रहेंगी. हेमंत ने यह भी बताया कि चूँकि अगले वर्ष 2020 के आरम्भ में ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, जिसकी विधानसभा की कुल 70 में से 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, के अगले विधानसभा आम चुनाव निर्धारित हैं एवं वह 22 फरवरी 2020 से पहले संपन्न करवाने कानूनन आवश्यक हैं, इसलिए संविधान (126 वां संशोधन) विधयेक, 2019 जिसे संसद की दोनों सदनों ने बीते सप्ताह पारित कर दिया है उसे देश के आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अगले लगभग एक महीने में अनुसमर्थन करना आवश्यक है ताकि 25 जनवरी 2020 तक इस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कर दे एवं यह समय पर लागू किया जा सके.

 
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