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Haryana

FARIDABAD- मंत्री और विधायकों ने कहा- खर्चे में कटौती कर आय के साधन बढ़ाएं, सरकार से आर्थिक मदद की उम्मीद कम करें

December 15, 2019 05:33 AM


COURTESY DAINIK BHASKAR DEC 15
बैठक : निगम की माली हालत सुधारने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री और विधायकों ने अफसरों को दी सलाह

नगर निगम की आर्थिक हालत सुधारने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और विधायकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय में शनिवार को बैठक की। इसमें निगम अधिकारियों को सलाह देते हुए कहा कि अपनी आमदनी का स्रोत खुद पैदा करें। राज्य सरकार के भरोसे न रहें। मंत्रियों व विधायकों ने कहा कि नगर निगम शहर का माई-बाप है। उसे अपनी जिम्मेदारी खुद निभानी चाहिए। बकाएदारों पर सख्ती कर उनसे बकाया वसूला जाए। आखिर सरकार कब तक पैसे निगम को देती रहेगी। चिंतनीय बात यह है कि निगम अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहा है। इससे वेतन के लिए कर्मचारियों को आंदोलन करना पड़ रहा है। करीब सवा घंटे तक चली बैठक में नगर निगम, जिला प्रशासन, एचएसवीपी, पीडब्ल्यूडी, बिजली बोर्ड, पुलिस कमिश्नर समेत अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे। माना जा रहा है कि राज्य सरकार अब नगर निगम की मदद करने को तैयार नहीं है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि 31 मार्च 2019 के बाद नए फाइनेंशियल ईयर में सरकार कोई फंड नहीं देगी। ऐसे में नगर निगम चलाने के लिए अधिकारियों को अपनी आय के साधन तलाशने हाेंगे। बैठक में परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा, विधायक नरेंद्र गुप्ता, सीमा त्रिखा, राजेश नागर, मेयर सुमन बाला, डीसी अतुल कुमार, निगम कमिश्नर सोनल गोयल, पुलिस कमिश्नर केके राव समेत अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे।
मंत्री ने की निगम की आमदनी और खर्च की समीक्षा, बकाएदारों से सख्ती के साथ वसूली करने के लिए कहा
अभी नगर निगम की यह है हालत
आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम की महीने की इनकम महज 11 करोड़ है जबकि खर्च 37 करोड़। हालत ये है कि निगम के पास न तो कर्मचारियों के वेतन का पैसा है और न ही किसी मेंटिनेंस का। जनरल फंड से सिविल वर्क तक का काम बंद है। कई ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद भी काम नहीं हो रहा है। हालात इतने खराब हैं कि ट्यूबवेलों की मोटर जलने, एसटीपी की मोटर जलने पर उसकी मरम्मत तक का पैसा नहीं है। इसका खामियाजा शहर की जनता को उठाना पड़ रहा है। सीवर सफाई के लिए सुपर सॉकर मशीन तक नहीं है। पूरे शहर में सीएम अनाउंसमेंट के अलावा कोई भी सिविल वर्क नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में निगम की आय के स्रोत
निगम अधिकारियों के मुताबिक प्रॉपर्टी टैक्स, सीवर, पानी शुल्क, मल्टी फ्लैक्स शो टैक्स, बिजली के उपयोग पर अतिरिक्त कर, फायर टैक्स, कर्मचारियों के मकान का किराया, ट्रांसफर फीस, जमीन जायदाद की बिक्री पर स्टांप ड्यूटी, बिल्डिंग प्लान एप्लीकेशन फीस, कोपिंग फीस, तहबाजारी दिवाली एवं दशहरा मेला, विज्ञापन शुल्क, जन्म एवं मृत्यु की कोपिंग शुल्क, मुर्दा मवेशी की नीलामी, टेंडर फीस आदि से हर माह करीब 11-12 करोड़ रुपए की आय होती है। स्टांप ड्यूटी शुल्क तो हर तीसरे माह आती है।
हर महीने इन पर 37 करोड़ खर्च
नगर निगम को चलाने के लिए हर महीने 37 करोड़ से अधिक की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि आय से तीन गुना खर्च होने से हमेशा आर्थिक तंगी की समस्या बनी रहती है। निगम का हर महीने का जो खर्च होता है उसमें कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन धारकों की पेंशन, स्टेशनरी, पानी सप्लाई, रोड का पेंचवर्क, स्ट्रीट लाइटों का मेंटिनेंस, निगम की गाड़ियों के लिए डीजल व पेट्रोल, वाहनों की सर्विसिंग, ट्यूबवेल लगवाने, खराब होने वाली मोटरों का मेंिटनेंस, पार्कों की मरम्मत व सौंदर्यीकरण आदि है।
खर्चों में कटौती कर फंड लीकेज पर रोक लगाओ
बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने निगम अधिकारियों से कहा कि आप अपने खर्च में जहां तक संभव हो कटौती करो। जहां फंड में कहीं लीकेज है। उसे प्रभावी ढंग से रोको। जिन लोगों पर निगम का बकाया है। चाहे वह बिल्डर हो या अन्य बकाएदार, उन पर सख्ती कर वसूली की जाए। अभी तक आपके पास ऐसा कोई रिकार्ड ही नहीं है कि निगम सीमा क्षेत्र में कितनी प्रापर्टी है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि नगर निगम की जो प्रॉपर्टी जैसे दुकानें आदि हैं उनका आक्शन कर उनसे राजस्व एकत्र किया जाए। निगम अपनी जमीन पर टाउनशिप स्कीम बनाकर उससे राजस्व की व्यवस्था करे।
रोड साइड अतिक्रमण की समस्या खत्म करो
केंद्रीय मंत्री ने निगम अधिकारियों से यह भी कहा कि पूरे शहर में रोड साइडों पर अतिक्रमण है। क्या निगम अफसरों को दिखाई नहीं देता। इसे हर हाल में खत्म किया जाना चाहिए। पूरे सिस्टम को आनॅलाइन किया जाए। जिससे शहरवासियों को इसका फायदा मिल सके।
नगर निगम के प्रमुख खर्चे (रुपए में)
सेलरी खर्च करीब 16 करोड़
पेंशन खर्च करीब 07 करोड़
बिजली बिल करीब 9 करोड़
आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन पर करीब 3.50 करोड़
डीजल, पेट्रोल व गोशाला खर्च करीब 1.25 करोड़
मेडिकल बिल करीब 25 लाख
310 नए चतुर्थ श्रेणीकर्मी का वेतन करीब 1.25 करोड़
निगम को समझनी होगी अपनी िजम्मेदारी
राज्य के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा कि नगर निगम में 7000 कर्मचारी हैं। क्या काम हो रहा है और कौन काम कर रहा है कुछ पता नहीं। दस दस साल से बिल्डरों पर बकाया है। निगम अधिकारी उनसे अपना पैसा नहीं वसूल पा रहे। निगम को अपनी जिम्मेदारी खुद समझनी होगी। अपनी आय के स्रोत खुद तलाशने होंगे।

 
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